सहमति वेगैर का संविधान किसी भी हालत में स्वीकार नही : डा. भट्टराई
कैलास दास, जनकपुर, चैत्र १० । एमाओवादी के बरिष्ठ उपाध्यक्ष डा. बाबुराम भट्टराई ने कहा है कि अन्तरिम संविधान, विस्तृत शान्ति सम्झौता, मधेश आन्दोलन तथा अन्य परिवर्तन को छोडकर संविधान निर्माण हुआ तो वह संविधान किसी भी हालत में स्वीकार नही होगा ।
मिथिला ऋतु साप्ताहिक द्वारा प्रकाशित ‘नियति’ व्यङय सङग्रह का मंगलवार जनकपुरधाम में लोकार्पण करते हुए उन्होने कहा कि जनता व्दारा लाया गया परिवर्तन संस्थागत करने के लिए सहमति के आधार में संविधान निर्माण होना चहिये लेकिन सत्तारुढ दल यह मानने के लिए तैयार नही है । इसलिए आन्दोलन करना एक बाध्यता भी है ।
फिलहाल समस्या के निकास तथा सहमति के आधार में सभी का चाहत अनुसार सत्तारुढ दल संविधन नही बनाकर २०४७ साल के संविधान में ही परिवर्तन करना चाहता है । काँग्रेस और एमाले परिवर्तन को आत्मसात नही चाहता है । विगत में भी संविधान निर्माण प्रति दृढ था, लेकिन नेपाली जनता की इच्छा, आकांक्षा उस संविधान से पुरा नही होने के कारण विभिन्न आन्दोलन करना पडा । संविधान जनता की चाहत अनुसार लाने के पक्ष में ३० दलीय मोर्चा है ।
उन्होने यह भी कहा कि तराई मे दो और पहाड में ७ प्रदेश के लिए एमाओवादी सहित सहमति के लिए तैयार है । निर्वाचन प्रणाली में भी बेइमानी करने का सोच में सत्तारुढ दल मे है यह आरोप भी डा.भट्टराई ने लगाया ।
एमाओवादी का पोलिट व्युरो सदस्य एवं पूर्वमन्त्री रामचन्द्र झा ने कहा कि मिथिला के ईतिहास तथा साहित्य समृद्ध है । देश संघियता में अगर गया तो इस क्षेत्र का विकास में सबसे ज्यादा सहयोग मिलेगा ।
कार्यक्रम में ‘नियति’ पुस्तक उपर नेपाल गीत, संगीत तथा नाट्य प्रज्ञा प्रतिष्ठान के सदस्य रमेश रञ्जन झा ने नियति पुस्तक के बारे में विस्तृत व्याख्या किया था ।
पुस्तक के लेखक उमेश साह ने पुस्तक लिखने को मुख्य उद्देश्य के बारे में बताते हुए कहा कि जब डा. बाबुराम भट्टराई देश के प्रधानमन्त्री थे उसी समय के समसमायिक विषय पर यह पुस्तक लिखी गइ है ।
कार्यक्रम में सहप्राध्यापक डा. सुरेन्द्र लाभ ने चर्चा परिचर्चा किया था । कार्यक्रम में सभासद रामसिंह यादव, जनकपुर नगपालिका के पूर्व प्रमुख बजरंग प्रसाद साह, पत्रकार कैलास दास ने पुस्तक के सम्बन्ध में चर्चा किया था ।

