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मंत्रिपरिषद् बैठक में विद्या भंडारी और शेखर कोइराला का जिक्र, ओली ने कहा— सरकार परिवर्तन की कोई संभावना नहीं

 

काठमांडू, ४ साउन (२०८२) | सोमवार शाम प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की अध्यक्षता में नियमित मंत्रिपरिषद् बैठक हुई, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी और नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. शेखर कोइराला का उल्लेख विशेष रूप से किया गया।

बैठक निर्धारित समय साँझ ६ बजे थी, लेकिन यह लगभग सवा घण्टा देरी से शुरू हुई और डेढ़ घण्टा चली। शुरूआती समय में मंत्रालय से जुड़े एजेंडों पर चर्चा हुई और कुछ आवश्यक निर्णय भी लिए गए।

इसके बाद प्रधानमंत्री ओली ने हाल के दिनों में सरकार परिवर्तन को लेकर सार्वजनिक रूप से उठे सवालों का जवाब मंत्रिपरिषद् के भीतर देने की कोशिश की।

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“देउवाजी से निरंतर संपर्क में हूं”
बैठक में मौजूद दो मंत्रियों के अनुसार, ओली ने स्पष्ट किया कि नेपाली कांग्रेस से सरकार में कोई टकराव नहीं है। उन्होंने बताया कि ११ महीने बाद सत्ता नेतृत्व कांग्रेस अध्यक्ष शेरबहादुर देउवा को सौंपने पर पहले से बनी सहमति के अनुसार ही सब कुछ चल रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा— “देउवाजी से मैं लगातार संपर्क में हूं, सभी गतिविधियां आपसी परामर्श में हो रही हैं। हम पूर्व सहमति के अनुसार ही आगे बढ़ रहे हैं।”

साथ ही, उन्होंने मंत्रियों को सक्रिय रहकर अपने-अपने कामों पर ध्यान देने का निर्देश भी दिया।

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“शेखर को विपक्षी उकसा रहे हैं”
प्रधानमंत्री ने बैठक में नेपाली कांग्रेस नेता डॉ. शेखर कोइराला का नाम लेते हुए कहा कि कांग्रेस के कुछ नेता यह धारणा बनाकर चल रहे हैं कि उनके पास पर्याप्त सांसदों का समर्थन है।
ओली के अनुसार— “शेखर कोइराला को विपक्षी दलों ने उकसाया है, लेकिन अभी ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी है कि सत्ता परिवर्तन हो सके।”

विद्या भंडारी से ‘वन-टू-वन’ भेंट
एक अन्य मंत्री के अनुसार, प्रधानमंत्री ओली ने उसी दिन दोपहर में च्यासल स्थित पार्टी कार्यालय में पूर्व राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी से एकांत में बातचीत की थी।
बैठक में ओली ने संकेत दिया कि विपक्ष के कुछ नेता पूर्व राष्ट्रपति को केंद्र में रखकर राजनीतिक कदम उठाना चाहते थे, लेकिन वह संभव नहीं है।
प्रधानमंत्री के मुताबिक— “हम पार्टी के भीतर एकजुट हैं और आज की मुलाकात ने इस एकता को और मजबूती दी है। पार्टी टूटने की बजाय एक साथ आगे बढ़ने की बात हो रही है।”

सूत्रों के अनुसार, मंत्रिपरिषद् बैठक का यह हिस्सा मीडिया में फैल रही चर्चाओं को शांत करने के उद्देश्य से किया गया था।

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