प्रधानमंत्री ओली को मिला भारत भ्रमण का औपचारिक निमंत्रण
भाद्र २, २०८२ | विशेष संवाददाता, काठमांडू । भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नेपाल यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को भारत भ्रमण का औपचारिक निमंत्रण दिया है। प्रधानमंत्री ओली आगामी ३१ भाद्र से दो दिवसीय भारत यात्रा पर जाने वाले हैं। यह उनकी प्रधानमंत्री बनने के १३ महीने बाद होने वाली पहली भारत यात्रा होगी।
यात्रा का मुख्य एजेन्डा
प्रधानमंत्री ओली की इस यात्रा में भारत और नेपाल के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी, पंचेश्वर बहुउद्देश्यीय परियोजना तथा सीमा विवाद समाधान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है।

सूत्रों के अनुसार, इस बार वार्ता केवल दिल्ली में ही सीमित न रहकर, बिहार स्थित बोधगया में भी होगी। बोधगया वह स्थान है जहाँ भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया था और यह बौद्ध धर्मावलम्बियों के लिए एक प्रमुख तीर्थस्थल माना जाता है।

विदेश सचिव मिस्री की उच्चस्तरीय मुलाकातें
भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नेपाल आगमन के दौरान शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की—
- राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल से शिष्टाचार भेंट में नेपाल–भारत सम्बन्धों को और प्रगाढ़ बनाने पर चर्चा हुई। राष्ट्रपति पौडेल ने कहा कि नेपाल भारत की प्रगति से लाभान्वित हुआ है और आगे और अधिक सहयोग चाहता है।
- कांग्रेस सभापति शेरबहादुर देउवा, माओवादी अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ तथा परराष्ट्र मन्त्री आरजु राणा देउवा संग भी उन्होंने वार्ता की।
- परराष्ट्र सचिव अमृत राई के साथ हुई बातचीत में पारवहन, व्यापार तथा विकास सहयोग पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
परराष्ट्र मंत्री राणा का सुझाव
परराष्ट्र मंत्री आरजु राणा देउवा ने मुलाकात के दौरान नेपाल–भारत के बीच रेल, सड़क और हवाई कनेक्टिविटी और अधिक बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से—
- रूपन्देही स्थित गौतमबुद्ध अन्तर्राष्ट्रीय विमानस्थल
- पोखरा अन्तर्राष्ट्रीय विमानस्थल
से भारतीय शहरों के लिए सीधी उड़ान शुरू करने का अनुरोध किया।
इसके साथ ही उन्होंने पंचेश्वर बहुउद्देश्यीय परियोजना को जल्द से जल्द कार्यान्वित करने का भी प्रस्ताव रखा। उनके अनुसार इस परियोजना से नेपाल और भारत दोनों को बराबर लाभ मिलेगा।
पंचेश्वर परियोजना की पृष्ठभूमि
सन् २०८० जेठ में तत्कालीन प्रधानमंत्री पुष्पकमल दाहाल की भारत यात्रा के दौरान तीन महीने के भीतर परियोजना की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) को अंतिम रूप देने पर सहमति बनी थी। लेकिन अब तक यह काम अधूरा है। यही कारण है कि यह परियोजना पिछले २९ वर्षों से ठप पड़ी है।
इसका प्रारम्भ २०५२ साल में महाकाली सन्धि के तहत हुआ था, जो नेपाल–भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्रियों शेरबहादुर देउवा और पी.वी. नरसिंह राव के बीच सम्पन्न हुई थी।
अन्तमें
प्रधानमंत्री ओली की आसन्न भारत यात्रा से उम्मीद की जा रही है कि दोनों देशों के बीच संबंधों को नया आयाम मिलेगा। व्यापार को सुगम बनाने, सीमा विवाद सुलझाने, कनेक्टिविटी का विस्तार करने और पंचेश्वर परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में यह यात्रा महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।


