सन्दर्भ – हिंदी दिवस, 2025 : हिंदी की राजभाषा यात्रा
राजभाषा का अर्थ है – राजकाज की भाषा अथवा official language l राजभाषा एक संवैधानिक शब्द है l राजभाषा हिंदी का विकास संस्कृत से होकर पालि, प्राकृत और अपभ्रंश से होते हुए 1000 ई. के आसपास आधुनिक हिंदी के प्रारम्भिक रूप में विकसित हुआ l आदिकालीन हिंदी में डिंगल और पिंगल हिंदी के साथ– साथ ब्रजभाषा और अवधी जैसी बोलियाँ विकसित हुईं l भक्तिकाल के कवियों ने हिंदी को साहित्यिक और धार्मिक भाषा के रूप में प्रतिष्ठित किया अर्थात् भक्तिकाल में अनेक संत कवियों ने हिंदी में साहित्य की रचना की और लोगों का मार्ग दर्शन किया l केवल उत्तरी भारत की नहीं, बल्कि दक्षिण भारत के बल्लभाचार्य, रामानुज, रामानन्द आदि ने भी हिंदी भाषा के माध्यम से अपने मतों का प्रचार किया l
अहिंदी भाषी राज्यों के भक्त कवियों जैसे असम के शंकरदेव, महाराष्ट्र के ज्ञानेश्वर और नामदेव (13 वीं शताब्दी), गुजरात के नरसी मेहता, बंगाल के चैतन्य आदि ने हिंदी को ही अपने धर्म के प्रचार और साहित्य का माध्यम बनाया था l आधुनिक काल में खड़ी बोली का उदय हुआ l मुख्यतः 19 वीं सदी से ब्रजभाषा का स्थान खड़ी बोली ने लेना शुरू किया l खड़ी बोली अनेक नामों से अभिहीत की गई है , यथा – हिन्दुई, हिंदवी, दक्खिनी, दखनी या दकनी, रेखता, हिंदोस्तानी, हिन्दुस्तानी आदि l जर्ज ग्रियर्सन ने इसे वर्नाक्युलर हिन्दुस्तानी का नाम दिया है l
खड़ी बोली गद्य के आरम्भिक रचनाकारों में फोर्ट विलियम कलेज के बाहर दो रचनाकारों — सदासुख लाल ` नियाज` ( सुखसागर ), और इंशा अल्ला खाँ ( रानी केतकी की कहानी ) तथा फोर्ट विलियम कलेज कलकत्ता के दो भाषा मुंशियों – लल्लु लाल जी ( प्रेमसागर ),और सदल मिश्र ( नासिकेतोपाख्यान ) के नाम उल्लेखनीय हैं l भारतेन्दु पूर्व – युग के दो प्रसिद्ध लेखकों – राजा शिव प्रसाद ` सितारेहिंद` और राजा लक्ष्मण सिंह ने हिंदी के स्वरूप निर्धारण के सवाल पर दो सीमान्तों का अनुगमन किया l राजा शिव प्रसाद ने हिंदी का गंवारूपन दूर कर उसे उर्दू-ए -मुअल्ला बना दिया तो राजा लक्ष्मण सिंह ने विशुद्ध संस्कृतनिष्ठ हिंदी का समर्थन किया l

हिंदी सही मायने में भारतेन्दु – युग में ` नई चाल में ढली ` और उनके समय में ही हिंदी के गद्य के बहुमुखी रूप का विकास हुआ l उन्होंने न केवल स्वयं रचना की, बल्कि अपना एक लेखक मण्डल (भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, प्रतापनारायण मिश्र, बालकृष्ण भट्ट, बद्रीनारायण चौधरी ` प्रेमधन `, ठाकुर जग्मोहन सिंह, अम्बिकादत्त व्यास, राधाचरण गोस्वामी) भी तैयार किया, जिसे भारतेन्दु मण्डल कहा गया l इन सभी ने भारतेन्दु के नेतृत्व में हिंदी गद्य की सभी विधाओं में अपना योगदान दिया l
खड़ी बोली और हिंदी साहित्य के सौभाग्य से 1903 ई. में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने सरस्वती पत्रिका के सम्पादन का भार सम्भाला l वे सरल और शुद्ध भाषा के प्रयोग के हिमायती थे l उन्होंने हिंदी के परिष्कार का बीड़ा उठाया और उसे बखुवी अंजाम दिया l
खड़ी बोली के विकास में छायावाद – युग का योगदान काफी महत्त्वपूर्ण है l प्रसाद, पंत, निराला, वर्मा और राजकुमार आदि ने महत्ती योगदान किया l हिंदी काव्य में छायावाद – युग के बाद प्रगतिवाद, प्रयोगवाद, हालावाद आदि आए l इस दौर में खड़ी बोली का काव्य भाषा के रूप में उत्तरोत्तर विकास होता गया l
हिंदी भारत की संघ की राजभाषा होने के साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश. छ्त्तीसगढ़, राजस्थान तथा दिल्ली संघ राज्य की भी प्रमुख राजभाषा है l संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल ( असमिया, बंगाली, डोगरी, गुजराती, हिंदी ,कन्नड़, नेपाली, ओड़िया, पंजाबी, संस्कृत , संताली / संथाली, सिंधी, तमिल, तेलुगु, उर्दू, बोड़ो, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मणिपुरी, मराठी ) अन्य इक्कीस भाषाओं के साथ हिंदी का एक विशेष स्थान है l
राजभाषा हिंदी के विकास के लिए खासतौर से जून 1975 में गृह मंत्रालय के अन्तर्गत राजभाषा विभाग का गठन किया गया है l भारत सरकार का राजभाषा विभाग इस दिशा में प्रयासरत है कि केंद्र सरकार के अधीन कार्यालयों में अधिक से अधिक कार्य हिंदी में हो l इसी कड़ी में राजभाषा विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया जाता है l इसी दिन संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था l इस निर्णय को महत्त्व देने के लिए और हिंदी के उपयोग को प्रचलित करने के लिए 1953 के उपरान्त हर साल 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाया जाता है l राजभाषा हिंदी जहाँ एक ओर अखंड भारत का जयघोष कर रही है और हिंदी भाषा और साहित्य को सशक्त कर रही है, वहीं भारत के सम्पूर्ण प्रशासन को एकता के सूत्र में पिरोने के लिए राजभाषा की अहमियत दिन – प्रतिदिन वृद्धि हो रही है l
हिंदी गंगा के पवित्र प्रवाह की भाँति गतिमान है l हिंदी भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम है , राष्ट्र की वाणी है, पहचान है और समस्त भारत को एक सूत्र में अनुस्यूत करने वाली भाषा है l अद्यतन में, हिंदी सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विश्व के कई देशों में बोली और समझी जाती है l हिंदी भारतीय संस्कृति की नसों में प्रवाहित होनेवाली जीवनरक्त की धारा है, वहीं हिंदी नेपाल के सामाजिक जीवन में सदियों से पूर्णता के साथ समाविष्ट है, समाहित है तथा आज भी नेपाली सांस्कृतिक जीवन को प्रेरित करती है, बौद्धिक सौन्दर्य को उद्भाषित करती है l निश्चित ही हिंदी व्यापक भाषायी समरूपता की मजबूत नींब पर प्रस्फुटित, विकसित और विद्यमान है l
हिंदी के प्रचार- प्रसार हेतु विश्व हिंदी दिवस का बड़ा ही महत्त्व है l विश्व में हिंदी का विकास करने और इसे प्रचारित – प्रसारित करने के उद्देश्य से विश्व हिंदी सम्मेलनों की शुरूआत की गई और प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन 10 जनवरी 1974 को नागपुर में आयोजित हुआ तब से ही इस दिन को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है l विश्व हिंदी सम्मेलन हिंदी भाषा का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है, जिसमें विश्व भर से हिंदी विद्वान, साहित्यकार, पत्रकार, भाषाविज्ञानी, विषय विशेषज्ञ, हिंदी सेवी तथा हिंदी प्रेमी जुटते हैं l
भारत में, नागरी लिपि परिषद, विश्व हिंदी न्यास परिषद, राजभाषा विभाग, संसदीय राजभाषा समिति, राजभाषा आयोग, राजभाषा कार्यान्वयन समिति आदि के अतिरिक्त भारत से बाहर जैसे – मारिशस हिंदी संस्थान (मारिशस), विश्व हिंदी सचिवालय (मारिशस), हिंदी परिषद ( नीदरलैंड ), हिंदी साहित्य सभा ( टोरन्टो ), हिंदी प्रचारिणी सभा ( मारिशस ),हिंदी (अमेरिका),हिंदी संगठन (मारिशस ), हिंदी सोसाइटी ( सिंगापुर ), अंतरराष्ट्रीय हिंदी परिषद नेपाल ,नेपाल हिंदी साहित्य परिषद, जनकपुर बौद्धिक समाज (नेपाल ), कृष्णचन्द्र मिश्र पब्लिकेशन ( नेपाल ), हिंदी शिक्षा संघ ( दक्षिण अफ्रिका ) आदि हिंदी के प्रचार- प्रसार में संलग्न हैं l
अद्यतन में, हिंदी एक जीवंत भाषा के रूप में विकसित हुई है, जो न केवल साहित्य में, बल्कि प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी जगह बना ली है l इसके लिए इंटरनेट, रेडियो तथा हिंदी सिनेमा, दूरदर्शन पर प्रसारित दर्जनों रोचक कार्यक्रमों और समाचार पत्र- पत्रिकाओं की भारी देन है l संगीत के क्षेत्र में `सा रे ग म प ` हों या `इण्डियन आइडल` हों, धार्मिक धारावाहिक यथा – `रामायण`, `महाभारत`,`कृष्णा`, `गंगा मैया`, `यशोदा के नंदलाला` हों या हास्य प्रधान `द कपिल शर्मा शो` हों, सभी ने हिंदी के प्रचार को भारी बल प्रदान किया है l
निष्कर्षतः हिंदी एक सरल, व्यावहारिक एवं जीवंत भाषा है l इस भाषा में जो बोला जाता है, वही लिखा जाता है l इसके पास विपुल शब्द भंडार है l संस्कृत के साथ – साथ इसने अंग्रेजी, उर्दू, फारसी, अरबी, पुर्तगाली, फ्रान्सीसी आदि अन्य भाषाओं के हजारों शब्दों को ग्रहण किया है l हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा होने के साथ – साथ अनेक राज्यों की राजभाषा भी है l जनसंख्या की दृष्ट से विश्व में हिंदी बोलने वालों का दूसरा स्थान है l विश्व के 100 से अधिक विश्वविद्यालयों में आज हिंदी का अध्यनन – अध्यापन होता है l
हिंदी दिवस की हार्दिक हार्दिक शुभकामनाएं !
यह लेख मुख्यतः मेरे द्वारा पढ़ाए गए विभिन्न पुस्तकों और दस्तावेजों पर आधारित है l

