नेपाल की वर्तमान स्थिति और भारत से मजबूत संबंधों की आवश्यकता”
राकेश जैन, उदयपुर । नेपाल इस समय गंभीर राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता से गुजर रहा है। हाल ही में हुए Gen Z आंदोलन ने सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। युवाओं ने भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी, महँगाई और राजनीतिक परिवारवाद के खिलाफ आवाज़ उठाई है। इस आंदोलन ने नेपाल की संसद और सरकार को हिला कर रख दिया है, यहाँ तक कि प्रधानमंत्री को इस्तीफ़ा देना पड़ा। काठमांडू समेत कई शहरों में कर्फ्यू और सेना की तैनाती बताती है कि हालात कितने नाजुक हैं।
ऐसे समय में भारत से मजबूत संबंध बनाना नेपाल के लिए और भी ज़रूरी हो गया है। भारत न केवल नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है बल्कि भूगोल, संस्कृति और इतिहास की दृष्टि से भी उससे गहराई से जुड़ा हुआ है। खुली सीमा, धार्मिक-सांस्कृतिक समानता और आर्थिक सहयोग दोनों देशों को एक-दूसरे के लिए अपरिहार्य बनाते हैं। नेपाल की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा भारत पर निर्भर है—चाहे वह पेट्रोलियम, दवाइयाँ और खाद्यान्न का आयात हो या पर्यटन और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश।
आज जब नेपाल के युवा बदलाव की माँग कर रहे हैं, तब भारत के सहयोग से ही शिक्षा, तकनीक और रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। भारत की साझेदारी से नेपाल अपनी आंतरिक स्थिरता को पुनः स्थापित कर सकता है और चीन जैसे बाहरी दबावों से संतुलन बना सकता है।
स्पष्ट है कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत और नेपाल के रिश्तों को और मजबूत करना केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि दोनों देशों की स्थिरता और समृद्धि के लिए अनिवार्य है। नेपाल को चाहिए कि वह भारत के साथ विश्वास और सहयोग की नई राह खोले, ताकि उसकी जनता का भरोसा बहाल हो और क्षेत्र में शांति तथा विकास का माहौल बन सके।



