Tue. Apr 21st, 2026

ललित निबन्ध

रामनवमी पर विशेष- राम : भारतीय सभ्यता के मूल आधार 

 

राम का जीवन केवल एक ऐतिहासिक आख्यान नहीं, बल्कि मानवता के लिए शाश्वत आचार-संहिता है

सरकार की विफलता और अंतरिम सरकार का इतिहास : श्वेता दीप्ति

 

डॉ श्वेता दीप्ति, सम्पादकीय हिमालिनी अंक दिसम्बर। नेपाल में अंतरिम सरकार का इतिहास लम्बी अवधि

वर्तमान समय मे अक्षय सुहाग की सार्थकता : वाणी नित्या

 

वाणी नित्या, काठमांडू ।नस्त्री का अस्तित्व पुरुष से जुड़ा है अनादिकाल से। सम्पूर्णता के द्योतक

विद्यापति : कालजयी महाकवि : विनोदकुमार विमल

 

सन्दर्भ – महाकवि विद्यापति की पुण्यतिथि   महाकवि विद्यापति भारतीय भाषा और साहित्य के भविष्य द्रष्टा

तिहार : रोशनी, प्रेम और समृद्धि का त्योहार : विनोदकुमार विमल

 

 तिहार  या यम पंचक में हर दिन विभिन्न जातियों, देवताओं और पारिवारिक संबंधों का उत्सव

योग जीवन जीने का दर्शन है : डॉ. श्वेता दीप्ति

 

  शरीरिक स्वास्थ्य का जीवन में आधारभूत मूल महत्व है । जैसा कि स्विट्जरलैण्ड में जन्मे

समकालीन राजनीति में स्टेटोडायनामिक प्रोग्रेसिविज़्म की प्रासंगिकता : डॉ. विधुप्रकाश कायस्थ

 

डॉ. विधुप्रकाश कायस्थ, काठमांडू । स्टेटोडायनामिक प्रोग्रेसिविज़्म, जो शब्द “स्टेटो” (राज्य या स्थिरता) और “डायनेमिक”

“संघ का विजयादशमी उद्बोधन 2024- निहितार्थ” : प्रवीण गुगनानी

 

प्रवीण गुगनानी, विदेश मंत्रालय में सलाहका। आज भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का माप, ताप, व्याप,

एकात्म मानववाद – एक दिव्य सिद्धांत (दीनदयाल जी की जयंती पर विशेष) : प्रवीण गुगनानी

 

प्रवीण गुगनानी, सलाहकार, विदेश मंत्रालय । महान दार्शनिक प्लेटो के शिष्य व सिकंदर के गुरु

भारतीय ज्ञान परंपरा – भारतीय शिक्षा प्रणाली : नई शिक्षा नीति

 

प्रवीण गुगनानी, इसे युगांतरकारी कदम कहा जाना चाहिये या अपनी भूमि, अपनी मिट्टी से जुड़ने का

संघ शिक्षावर्ग – राष्ट्रसाधना के प्रशिक्षण का प्रसंग : प्रवीण गुगनानी

 

प्रवीण गुगनानी, सलाहकार, विदेश मंत्रालय, भारत सरकार । ग्रीष्म की छूट्टियों में जब कि सामान्यतः

नारी स्रष्टा किरण आचार्य की वर्तमान साहित्य गतिविधि तथा उनके द्वारा रचित परसुराम उपन्यास

 

नेपालगञ्ज/(बाँके) पवन जायसवाल । कृति समालोचक लेक प्रसाद प्याकुरेल द्वारा प्रस्तुत शिक्षण पेशा में कुशल

श्रीगुरुजी की शक्तिशाली राष्ट्र की अवधारणा : प्रवीण गुगनानी

 

प्रवीण गुगनानी, ग्वालियर । श्री गुरुजी, माधव सदाशिव राव गोलवलकर शक्तिशाली भारत की अवधारणा के

सरल नहीं होता हैं मोहन, विष्णु और भजनलाल हो जाना : प्रवीण गुगनानी

 

प्रवीण गुगनानी, ग्वालियर । भारतीय जनता पार्टी में एक टर्म या शब्द चलता है, “देवतुल्य कार्यकर्ता”

सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद : मुरलीमनोहर तिवारी सीपू

 

मुरलीमनोहर तिवारी (सीपू), बीरगंज । धनतेरस यानी की धनत्रयोदशी, हर साल कार्तिक माह के कृष्ण

धर्म का धर्म एवं जीवन धर्म vs धर्म युद्ध और जीवन युद्ध : कैलाश महतो

 

कैलाश महतो, परासी । नेपोलियन हिल कहते हैं, “ईसाई धर्म आज दुनिया में सबसे क्षमतावान

ईमानदार कलमकार- मुंशी प्रेमचंद : लक्ष्मी प्रसाद चौधरी

 

ईमानदार कलमकार : मुंशी प्रेमचंद साहित्य में यथार्थवादी परंपरा की आधारशिला रखने वाले मुंशी प्रेमचंद

जानिए क्यों रह गयी माँ नर्मदा कुंवारी…?? : डॉ शशि कला लढ़िया

 

जानिए क्यों रह गयी माँ नर्मदा कुंवारी…?? कहते हैं नर्मदा ने अपने प्रेमी शोणभद्र से

नवलपरासी का प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थल रामग्राम : डॉ. कौशलेन्द्र श्रीवास्तव

 

हिमालिनी,5 अप्रैल, 2023 | नेपाल के पश्चिमी भूभाग में अवस्थित तराई के तीन जिले कपिलवस्तु,

प्रजातांत्रिक प्रशिक्षण,मनुष्य जन्म से ही परतंत्र है : डा.अशोक माहासेठ

 

 डा. अशोक माहासेठ, काठमांडू । चौरासी लाख जीवधारी के बीचमे मनुष्य उत्कृष्ट जीव है ।

एकादश विश्व हिंदी सम्मेलन–एक अद्यतन रिपोट -: रघुवीर शर्मा

 

विश्व हिंदी सम्मेलन हिंदी भाषा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण और सबसे बड़ा अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन है जिसमें

अंतरास्ट्रीय जगत में हिंदी का बढ़ता आकाश : मुरली मनोहर तिवारी (सीपू)

 

मुरली मनोहर तिवारी (सीपू), बीरगंज । निस्सन्देह हिन्दी आज सारे विश्व में ‘अंतर्राष्ट्रीय भाषा’ के

कठोर परिश्रम सफ़लता की कुंजी है : एडवोकेट किशन भावनानी

 

अलसस्य कुतो विद्या,अविद्यस्य कुतो धनम्। अधनस्य कुतो मित्रं,अमित्रस्य कुतः सुखम् –योगवासिष्ठ आओ नए वर्ष में

महामहिम भारत के राष्ट्रपति को  ग्रंथ ‘जयशंकर प्रसाद महानता के आयाम” की प्रथम प्रति भेंट

 

मुंबई विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर करुणाशंकर उपाध्याय ने अपना सद्य: प्रकाशित ग्रंथ जयशंकर प्रसाद महानता

म.प्र. ने जलाई हिंदी की मशाल : डॉ. वेदप्रताप वैदिक

 

*डॉ. वेदप्रताप वैदिक*केरल, तेलंगाना और तमिलनाडु के क्रमशः मुख्यमंत्री, मंत्री और नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र

मुसलमानों ने बॉलीवुड को बिगाड़ा है ,बनाया नहीं : राजेश झा

 

राजेश झा, मुम्बई।’राष्ट्रद्रोही मुसलमान’ जब अपने समाज में भी दुत्कारे जाने लगे हैं , राष्ट्रवादी