मानसिक रोगियों ने मेरे विरुद्ध मुद्दा डाला हैं – ओली
काठमांडू, मंसिर २६ – पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा है कि उन्हें गिरफ्तार करने की मांग करते हुए कानूनी उपचार खोजने वाले लोग ‘मानसिक रोगी’ हैं। उन्होंने कहा है कि मानसिक रोगियों ने मेरे विरुद्ध मुद्दा डाला है ।
पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने उन सभी को मानसिक रोगी की संज्ञा दी है जिन्होंने उन्हें गिरफ्तार करने तथा कानूनी कारवाई की मांग की है । सर्वोच्च अदालत में लिखित जवाब पेश करते हुए उन्होने कहा है कि उनके विरुद्ध रिट निवेदन पेश किए जाने के काम को ‘मनोरोग के द्योतक’ बताया है । उक्त रिट निवेदन सर्वोच्च अदालत में विचाराधिन है ।
जेन जी आन्दोलन पर दमन कर किशोर किशोरियों की जान लेने और समय मेंं सेना परिचालन नहीं कर देश के महत्वपूर्ण संरचनाओं को ध्वस्त करने में ओली की भूमिका है । यह आरोप लगाते हुए ओली के विरुद्ध सर्वोच्च अदालत में रिट निवेदन दर्ता की गई थी ।
राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के तत्कालिन अध्यक्ष एवं प्रधानमंत्री ओली को तत्काल गिरफ्तार कर अनुसन्धान करने की मांग को रखकर दायर निवेदन के जवाब में ओली ने रिट निवेदन पेश करने वाले पर आक्षेप लगाए हैं ।
उन्होंने अपने लिखित जवाब में कहा है कि ‘सेना परिचालन के विषय में जब कानून ने स्पष्ट रुप से जवाबदेही और जिम्मेदारी तय कर रखी है, तब ऐसी अवस्था में असंवंधित निकायों को जिम्मदार ठहराते हुए कारवाई करने या दोषारोपण करने जैसे कार्य करना और ऐसी मांग करना विपक्षी की मानसिक बीमारी का स्पष्ट संकेत है।’
ओली ने सर्वोच्च अदालत में अपना लिखित जवाब पेश करते हुए जेन जी आन्दोलन पर हुए दमन, बल प्रयोग के विषयों का उल्लेख नहीं किया है । लेकिन उन्होंने प्रतिनिधिसभा विघटन से जुड़े मुद्दों में अपने अधिकांश लिखित जवाब को ‘कॉपी–पेष्ट’ कर अदालत में जमा कर दिया है ।
प्रतिनिधि सभा विघटन संबंधी मुद्दा में ओली ने इस का जिक्र किया है कि उन्होंने सुशीला कार्की के नाम की सिफारिश प्रधानमंत्री के लिए नहीं की थी । साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के निर्णय को असंवैधानिक करार देते हुए प्रतिनिधि सभा पुनस्र्थापना की मांग की थी।


