नमक से जुड़ा है जीवन- प्रेमलाल महर्जन
अंशुकुमारी झा, हिमालिनी अंक सितम्बर 025 । नमक मानव जीवन के लिए एक अत्यन्त आवश्यक पदार्थ है । इसे सफेद सोना भी कहा जाता है क्योंकि यह केवल भोजन का स्वाद बढाने के लिए ही नहीं बल्कि शरीर के लिए भी अनेक प्रकार से उपयोगी है । अगर हम स्वास्थ्य की दृष्टि से देखें तो नमक में सोडियम और क्लोराइड तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में जल संतुलन बनाए रखने, स्नायु एवं मांसपेशियों की कार्यप्रणाली ठीक रखने और रक्तचाप को नियन्त्रित करने में सहायक होते हैं । भोजन की दृष्टि से नमक के बिना भोजन बेस्वाद हो जाता है । नमक ही भोजन में स्वाद और ताजगी बनाए रखता है । हमारे समाज में नमक को वफादारी और विश्वास का प्रतीक माना जाता है । नमक हराम और नमक हलाल जैसे मुहावरे इसी महत्व को प्रकट करते हैं । तसर्थ नमक केवल स्वाद का साधन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है । इसका संतुलित उपयोग मानव जीवन के लिए अनिवार्य है । इसी सन्दर्भ में साल्ट टे«डिंग कार्पोरेशन के ६३वें वार्षिकोत्सव पर राष्ट्रीय उपभोक्ता मन्च के अध्यक्ष प्रेमलाल महर्जन से हिमालिनी संवाददाता अंशु झा से हुई बातचीत का संपादित अंशः

० उपभोक्ताओं के लिए नमक के प्रयोग के विषय में आप क्या कहना चाहते है ?
– नेपाल में सदियों से नमक का प्रयोग होता आ रहा है । मानव जाति के लिए नमक अत्यन्त ही महत्वपूर्ण तत्व है । पानी से भी अधिक महत्व नमक का है । नमक के बिना जीना मुश्किल है । इसलिए हमारे शरीर के लिए नमक बहुत ही आवश्यक है ।
० नेपाल में नमक कारोबार का विकासक्रम क्या है ?
– विक्रम संवत् २००९ साल से पहले नेपाल में नमक का कारोबार सरकार नहीं करती थी । साहु महाजन ही अन्य वस्तु के साथ–साथ नमक का भी करोबार करते थे । व्यापारी ही नमक का आयात करता था और सरकार उसका मूल्य निर्धारण करती थी । उसके बाद नमक बेचा जाता था । २००९ साल के बाद नेपाल में नमक का कारोबार करने वालों की संख्या बढ़ने लगी जिससे नमक खरीद बिक्री में अनियमितता होने लगी । मूल्य में, तौल में, गुणस्तर में गड़बड़ होने लगा । नमक जहाँ–जहाँ पहुँचना होता वहाँ तक पहुँचने नहीं दिया गया । विशेष रूप से तराई और हिमाली क्षेत्र में नमक नहीं पहुँचता था जिससे वहाँ की जनता राज्य से दूर होने लगी अर्थात उसे अपने देश की व्यवस्था प्रति वितृष्णा होने लगी । इस विषय को नियमन करने के लिए सरकार ने २००९ साल में ही एक राजपत्र में श्वेतपत्र जारी किया और उसी के आधार पर नमक का कारोबार अपने नियन्त्रण में कर लिया । इतना करने में नेपाल सरकार को लगभग ११ वर्ष लग गया । २०२० साल में नेपाल सरकार ने साल्ट टे«डिंग कार्पोरेशन लि.२०२० जारी की और उसी के अनुसार नमक का कारोबार उनको सौंपा दी । उस वक्त साल्ट ट्रेडिंग कार्पोरेशन पूर्णरूपेन सरकारी स्वामित्व के तहत था ।

२०२७ साल में तत्कालीन उक्त संस्था के प्रमुख यम बहादुर मल्ल ने प्रतिबद्धता जनाते हुए यह जिम्मेदारी ली कि मेची से महाकाली तक सम्पूर्ण जनता में नमक मैं पहुँचाऊँगा । उस वक्त नेपाल में लगभग ८० लाख जनता थी । उन्होंने ८० लाख जनता में नमक पहँचाने का बीड़ा उठाया ताकि एक भी व्यक्ति नमक से वंचित न रहे । तत्पश्चात सरकार ने साल्ट ट्रेडिंग कार्पोरेशन एक्ट खारिज कर कम्पनी ऐन अन्तर्गत साल्ट ट्रेडिंग कार्पोरेशन गठन की और इसे नेपाल का पहला नमूना सार्वजनिक संस्था के रूप में व्यवस्थित की । उसके बाद नमक का बिक्री वितरन कुछ सहज हो गया ।

० उस वक्त नमक का गुणस्तर कैसा था ?
– जनता को नमक तो उपलब्ध हुआ परन्तु वह आयोडिनरहित था जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ने लगा । २०२३ साल के सर्वे के अनुसार ५५ प्रतिशत जनता आयोडिन की कमी से किसी न किसी रोग से ग्रसित थे । विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसन्धान अनुसार नेपाल के सर्वे में आयोडिन की कमी से ४ प्रतिशत लोग सुस्त मनःस्थिति के पाए गए । उसके बाद जनता की स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए नेपाल सरकार नमक में आयोडीन मिश्रित करने लगी । आयोडीन मानव जाति के लिए एकदम महत्वपूर्ण तत्व है । जिसे सुक्ष्म पोषक तत्व भी कहा जाता है । नमक में आयोडीन मिलाने से नेपाली जनता में पाए जाने वाले विभिन्न रोग जैसे गाँठ का रोग, कुष्ठ रोग, लूला लंगड़ा इत्यादि को नियमन किया गया । अभी हमलोग २०८२ साल में हैं और आयोडीनयुक्त नमक ६२ साल से खा रहे हैं । वर्तमान में अगर हम देखते हैं तो विगत से बहुत ही सुधार हुआ है । एक रिसर्च के अनसार १० लाख जनता में से सिर्फ ४ लोगों को ही यह रोग दिखाई पडता है ।
अगर हम सरकार की कोई एक अच्छी वस्तु देखें तो उसमें सिर्फ नमक ही है । सरकार ने नमक की आपूर्ति सही तरीके से की जिसके कारण हिमाल, पहाड़ और तराई सभी जगह की जनता लाभान्वित हुई है । आयोडीन की कमी से जो लोग रोग से ग्रसित थे उसमें सुधार हुआ । लोगों को रोगोें से मुक्ति मिली । अगर स्वास्थ्य क्षेत्र में देखा जाय तो सबसे अधिक सुधार आयोडीनयुक्त नमक से हुआ है ।
० तत्कालीन समय में नमक बिक्री वितरण सिस्टम कैसी थी ?
– सरकार ने निजी क्षेत्र को बहुत बार नमक बिक्री वितरण के लिए जिम्मेवारी दी । नमक सप्लाई के लिए हिमाली नून उद्योग को जिम्मेदारी दी वह असफल रहा । बाद में भी एक दूसरी संस्था को सौंपी उससे भी नहीं हुआ । तत्पश्चात पुनः साल्ट ट्रेडिंग को ही सौंपा गया । सर्वोच्च अदालत ने भी निर्णय किया कि साल्ट ट्रेडिंग ही उपयुक्त और गुणस्तर नमक बिक्री वितरण कर सकता है । फिलहाल २०८२ साल में भी सरकार ने निजी क्षेत्र को खारिज कर साल्ट टे«डिंग को ही नमक सप्लाई की जिम्मेदारी दी है । साथ ही नून उत्पादन तथा बिक्री वितरण ऐन २०७५ को फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया गया है ।
समग्र में नेपाली जनता को अब आयोडीनयुक्त नमक की कोई दिक्कत नहीं है । नेपाली जनता को हर वक्त गुणस्तरीय नमक उपलब्ध है ।
० नमक में आयोडीन ज्यादा होने की चर्चा जो चल रही है, उसके बारे में आप क्या कहना चाहेंगे ?
– जी, अभी लोगों में जो यह भ्रम फैला हुआ है कि नमक में आयोडिन ज्यादा है, यह नहीं खाना चाहिए । कई लोग नमक को भून कर खा रहे हैं तो कई लोग नमक को धो कर खा रहे है । कोई सेन्धा नमक का प्रयोग कर रहे हैं तो कई लोग काला नमक का प्रयोग कर रहे है आदि इत्यादि । यह सब हमारे स्वास्थ्य के लिए सरासर घातक है । अगर सच कहा जाय तो यह भ्रामक विज्ञापन फैलाकर के कुछ लोग अपना लाभ ले रहे हैं । आयोनून अभी हमारे यहाँ २० रुपये में सभी जगह उपलब्ध है, परन्तु जो लोग सेन्धा नमक, काला नमक का प्रयोग करते हैं उन्हें १२० रुपये प्रति किलो पड़ रहा है । यहाँ तक की व्यवसायी लोग तीन सौ चार सौ रुपये किलो भी बेच रहे है । तो इससे स्पष्ट है कि यह एक ठगी धन्धा है । सिर्फ पैसा में ही ठगी नहीं है, गुणस्तर में भी जनता ही ठगा रही है । इसमें आम जनता को चालाक होना चाहिए तभी जाकर वे ठगे जाने से बचेंगे ।
० देश में साल्ट ट्रेडिंग का योगदान क्या है ?
– देश में प्रतिकूल परिस्थिति होने बावजुद भी साल्ट ट्रेडिंग ने नमक वितरण में कभी कमजोरी नहीं किया है । चाहे २०७२ साल का भुकम्प हो या नाकाबन्दी हो या कोरोना का कहर हो या जेन जी का आन्दोलन हो हमेशा साल्ट ट्रेडिंग ने सेवा दी है । सबसे खुशी की बात तो यह है कि सभी चीजों का मूल्य बढ़ा पर नमक का मूल्य नहीं बढ़ा । नाकाबन्दी के समय कुछ अराजक तत्व नमक का पैसा बढ़ाकर उपभोक्ता को दे रहा था पर हमें जानकारी मिलने के बाद उसे नियन्त्रण में लिया गया और उचित मूल्य पर ही नमक वितरण किया गया । राष्ट्रीय उपभोक्ता मन्च ने साल्ट ट्रेडिंग कार्पोरेशन के साथ और नेपाल सरकार के साथ सहकार्य करके विभिन्न जगहों पर खाद्यान्न भी उचित मूल्यों पर वितरण करने लगे । इसने एक साकारत्मक संदेश दिया । इससे संस्थाओं पर जनता का विश्वास दृढ हुआ और जनमानस में सुशासन की अनुभूति हुई । हमारे विचार में ऐसी संस्थाओं को राज्य को और भी प्रोत्साहित करना चाहिए ।
० इसबार आपके यहाँ ६३वां वार्षिकोत्सव है, इसके लिए आप क्या कहना चाहेंगे ?
– इस अवसर पर हम साल्ट ट्रेडिंग परिवार को हृदय से शुभकामना देते हैं जो इतने सही तरीके से संस्था को चलाते आ रहे हैं । तत्पश्चात हम कहना चाहेंगे कि नमक का महत्व कालान्तर से ही है । अपने गाँव, वडा में नमक पहुँचाकर प्रतिनिधि लोगों का चुनाव जीतने का इतिहास है । हमारे यहाँ तराई हो या पहाड़ हो या हिमाल सभी जगह नमक की राजनीति हुई है । नमक के अड्डा में जिसकी पहुँच होती थी वही चुनाव जीतता था । अभी साल्ट ट्रेडिंग सिर्फ नमक ही नहीं दैनिक उपभोग्य की वस्तु राशन–तेल सभी वस्तुए उचित गुणस्तर और उचित मूल्य पर वितरण करती है । ऐसी संस्था राज्य का एक गहना ही है । पर विडम्बना यह है कि सरकार का इस तरफ ध्यान ही नहीं होता । सरकार हर वर्ष दशहरा दीपावली के अवसर पर सुपथ मूल्य में दुकान खोलने बोलती और कुछ प्रतिशत अनुदान की बात करती है पर वह अनुदान अभी तक नहीं मिला है ।

