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जन-जन तक अपने मन की बात पहुंचाने का सटीक माध्यम है : रेडियो

अमिता कमल । आकाशवाणी एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है ‘आकाश से आवाज’ या ‘आकाशीय आवाज’।रेडियो का आविष्कार सन् 1896 में इटली के एक वैज्ञानिक मारकोनी ने किया। मार्कोनी द्वारा विकसित पहली व्यावहारिक रेडियो संचार प्रणाली, रेडियो तरंगों द्वारा टेलीग्राफ सिग्नल प्रसारित करती थी, इसलिए रेडियो संचार को पहले ” वायरलेस टेलीग्राफी ” कहा जाता था। मार्कोनी ने जो पहला संदेश भेजा वह ‘मोर्स कोड’ के रुप में था।… वहीं भारत में रेडियो की बात की जाए, तो जगदीश चंद्र बोस ने सन् 1895 में भारत के कलकत्ता जो अब कोलकाता कहा जाता है के टाउन हॉल में दिखाया कि कैसे विद्युत चुम्बकीय तरंगों को न केवल हवा, बल्कि दीवारों और यहां तक कि लोगों के शरीर के माध्यम से भी वायरलेस तरीके से भेजा जा सकता है।
भारत में रेडियो का इतिहास अगस्त 1921 से प्रारंभ होता है। जब पोस्ट एंड टेलीग्राफ विभाग ने ‘द टाइम्स आफ इंडिया ‘ के सहयोग से बंबई में संगीत कार्यक्रम प्रारंभ किया। वही सन् 1926 में कुछ व्यक्तिगत रेडियो क्लबों
द्वारा प्रसारण कंपनी गठित करके बंबई, कलकत्ता और मद्रास में प्रसारण सेवा प्रारंभ की गई। सन् 1926 में ही भारत सरकार ने इस कंपनी की ओर से पहला प्रसारण 23 जुलाई, 1927 को बंबई में किया। तब बंबई रेडियो स्टेशन का उद्घाटन तत्कालीन वायसराय लार्ड इर्विन ने किया था। कलकत्ता केन्द्र के उद्घाटन के साथ 26 अगस्त 1927 को बंगला में समाचर- बुलेटिन का प्रसारण हुआ। इस प्रकार बंगला को प्रादेशिक भाषाओं में सबसे पहले रेडियो पर समाचर बुलेटिन के रुप में प्रसारित होने का श्रेय प्राप्त है।
आकाशवाणी की स्थापना 23 जुलाई 1927 को हुई थी। तब इसका नाम भारतीय प्रसारण सेवा रखा गया था। सन् 1936 में इसका नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो कर दिया और 1957 में इसे आकाशवाणी नाम से पुकारा जाने लगा। आकाशवाणी की बहुत भषाओं में विभिन्न सेवाएं हैं जो देश भर के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं. जब आकाशवाणी की शुरुआत हुई उस समय इसका उद्देश्य किसान, ड्राइवर, मजदूर और विद्यार्थियों के लिए कार्यक्रम प्रसारित करना था।
आकाशवाणी को पहले ऑल इंडिया रेडियों ही कहा जाता था। सन् 1936 में मैसूर के एक विद्वान और चिंतक एम.वी.गोपालस्वामी ने इस शब्द आकाशवाणी को गढ़ा… जिसका अर्थ होता है आकाश से मिला संदेश । सन् 1939 में कलकत्ता शॉर्टवेव सेवा के उद्घाटन के लिए लिखी गई एक कविता में प्रसिद्ध कवि रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा ‘ऑल इंडिया रेडियो’ को ‘आकाशवाणी’ के रूप में संदर्भित किया गया था ।
गाँव में रहने वाले अधिकांश भारतवासियों के लिए रेडियो समाचार तथा मनोरंजन का इकलौता माध्यम है रेडियो । रेडियो पर समाचार एक सस्ते रिसीवर की सहायता से कहीं भी सुने जा सकते हैं। समाज का आर्थिक रूप से सबसे पिछड़ा तबका भी रेडियो का खर्च वहन कर सकता है ।ऑल इंडिया रेडियो इंडिया का सार्वजनिक सेवा प्रसारक, प्रसार भारती का रेडियो वर्टिकल अपनी स्थापना के बाद से अपने आदर्श वाक्य – ‘ बहुजन हिताय: बहुजन सुखाय ‘ को जीवित रखते हुए अपने दर्शकों को सूचित, शिक्षित और मनोरंजन करने की सेवा कर रहा है।
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि प्राचीन समय में रेडियो एक संचार का बहुत ही बड़ा माध्यम था इसके जरिए लोग अपनी बात को जन जन तक पहुंचा पाते थे और इस पर कई सारे मनोरंजन के कार्यक्रम भी होते थे जिस वजह से लोग पहले के समय में रेडियो को सुनना पसंद करते थे लेकिन वर्तमान समय में बढ़ते टेक्नोलॉजी की वजह से लोगों को रेडियो में दिलचस्पी कम हो गई है और अब लोग अपने पसंद के प्रोग्राम टीवी एवं अपने स्मार्टफोन पर देख लेते हैं।
रेडियो का आविष्कार आज से 140 वर्ष पहले अर्थात सन 1880 में हुआ था और उसके बाद ही इसका प्रचलन धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैल गया। और सन 1906 में रेडियो के जरिए संदेश भेजना आरंभ हुआ और यह पूरे दुनिया भर में फैला और लोगों को यह बेहद पसंद आने लगा। जब इसके ब्रॉडकास्टिंग की सारी जिम्मेदारी भारत सरकार ने अपने ऊपर ले ली तब इसे भारत के कोने कोने तक रेडियो ने भारत में स्वतंत्रता दिलाने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान निभाया, सन 1942 में महात्मा गांधी ने रेडियो पर ही भारत छोड़ो आंदोलन में अपना संदेश रेडियो प्रसारण के माध्यम से प्रसारित किया था। इसके साथ-साथ सुभाष चंद्र बोस जी का भी नारा जो था तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा यह नारा रेडियो के माध्यम से ही प्रसारित किया गया और इसी तरह और भी कई सारे नारे रेडियो के माध्यम से पूरे भारत देश के कोने कोने तक पहुंचाए गए।
रेडियो की इस शक्ति को प्रधानमंत्री जी ने जाना और जब रेडियो संचार के अन्य माध्यमों के बीच पिछड़ता दिखा तो रेडियो को बचाए रखने के लिए माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सन 2014 से मन की बात का कार्यक्रम आरंभ किया गया है। मन की बात आकाशवाणी पर प्रसारित किया जाने वाला एक कार्यक्रम है जिसके जरिये भारत के प्रधानमंत्री भारत के नागरिकों को संबोधित करते हैं। इस कार्यक्रम का पहला प्रसारण 3 अक्तूबर 2014 को किया गया। रेडियो को इसकी व्यापक पहुंच के कारण इस कार्यक्रम के लिए रेडियो को माध्यम के रूप में चुना गया था। और अब मन की बात आकाशवाणी के लिए राजस्व का एक प्रमुख स्रोत बन गया है।
रेडियो ने आज़ादी से लेकर अब तक एक लंबा सफ़र तय किया है… आज 13 फरवरी को ‘विश्व रेडियो दिवस’ है इस साल इसका थीम यानि विषय है- ‘रेडियो- सूचना देने, मनोरंजन करने और शिक्षित करने वाली एक सदी’ है। रेडियो एक ऐसा माध्यम है जिसने समय के साथ अपना उपयोग बरकरार रखा है। यह जानकारी प्रदान करने, लोगों को शिक्षित करने, विभिन्न संस्कृतियों में अभिव्यक्ति की अनुमति देने और निश्चित रूप से हमारे सभी पसंदीदा संगीत बजाने का एक मंच है। 2011 में, यूनेस्को के सामान्य सम्मेलन के 36वें सत्र में, 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस के रूप में घोषित किया गया था। इस तिथि को यूनेस्को के महानिदेशक द्वारा चुना गया था क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय प्रसारण सेवा की वर्षगांठ की तारीख थी, जिसे 13 फरवरी, 1946 को बनाया गया था।
विश्व रेडियो दिवस का विचार 2010 में स्पेन में उत्पन्न हुआ था। स्पेनिश रेडियो अकादमी ने रेडियो के महत्व और समाज में इसके योगदान के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को पहचानते हुए यूनेस्को को इस विचार का प्रस्ताव दिया था। 2011 में, यूनेस्को के सामान्य सम्मेलन के 36वें सत्र में सर्वसम्मति से प्रस्ताव को अपनाया गया, जिसमें आधिकारिक तौर पर 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस घोषित किया गया। यह तारीख 1946 में संयुक्त राष्ट्र रेडियो की स्थापना की वर्षगांठ के साथ मेल खाती है, जो रेडियो की वैश्विक पहुंच और महत्व को और उजागर करती है। पहला विश्व रेडियो दिवस 2012 में मनाया गया था, जिसमें दुनिया भर में कार्यक्रम और गतिविधियाँ से जागरुकता फैलाई गई ।
प्राचीन समय से अब तक की बात करें तो संचार का सबसे तेज और सटीक माध्यम है रेडियो। रेडियो की शुरुआत बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ से हुई। तब से लेकर आज तक रेडियो की अपनी अलग ही पहचान रही है। जन-जन तक अपने मन की बात पहुंचाने का सटीक माध्यम है रेडियो…. रेडियो की महत्वपूर्णता इसलिए भी अधिक है कि दूर-दराज इलाकों में जहां आज भी संसाधनों की पहुंच नहीं है वहां भी रेडियो उपलब्ध है।

अमिता कमल

(लेखक – आकाशवाणी और ज्ञान वाणी एफ. एम में रेडियो उद्घोषिका के रुप में कार्यरत है साथ ही डी.डी.किसान में आलेख-लेखन भी करती है ये ज्ञान दर्शन के कई वृतचित्रों यानि documentary में काम कर चुकी है। ये डी डी नेशनल के स्वराज में voice over भी कर चुकी है । (amita.kuku@yahoo.com)



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