बच्चों के साथ किस व्यवहार हो ? : नवनीत कौर
अपने बच्चों के सामने एक -दूसरे पर चिल्लाना, गुस्सा करना या लड़ाई करना क्या सही है ? ज्यादातर लोग यही कहेंगे यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है। परंतु क्या हम इस बात का ध्यान रखते हैं कि हम अपने बच्चों के सामने कैसा बर्ताव कर रहे हैं ?
एक बच्चे का पहला स्कूल उसका घर ही होता है, क्योंकि सीखने की शुरुआत यहीं से होती है। बच्चे अक्सर वही सब सीखते हैं, जो वह अपने बड़ों को करते हुए देखते हैं । माता-पिता अक्सर अपने बच्चों के सामने प्यार जताने से, एक – दूसरे की फिक्र करने से शरमाते हैं । लेकिन जब झगड़ा करने की बात आती है तब वह थोड़ा- सा भी हिचकिचाते नहीं है । अजीब है, पर सच है । हमें अपने बच्चों में नफरत का बीज बोना मंजूर है, पर प्यार का नहीं।
किसी भी जोड़े में मतभेद होना एक आम बात है। लेकिन उस मतभेद को शांतिपूर्वक सुलझाना है या मतभेद को लड़ाई का रूप देना है, यह हमारे हाथ में होता है । जब कोई भी मतभेद लड़ाई का रूप ले लेता है, तब वह बच्चों के कोमल मन पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है।
ऐसा देखा गया है कि जो बच्चे एक ऐसे माहौल में पलते – बढ़ते हैं, जहाॅं छोटी – छोटी बातों पर झगड़े होते हैं, एक – दूसरे को नीचा दिखाया जाता है या गुस्सा किया जाता है । उन बच्चों के विकास और स्वास्थ्य को हानि पहुॅंचती है। वह अपनी पढ़ाई और खेल-कूद पर भी ध्यान नहीं दे पाते हैं । उन बच्चों में कभी-कभी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ भी जन्म ले लेती हैं । उनमें आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की कमी हो जाती है । कभी-कभी तो यह भी देखा जाता है कि बच्चे यह मानने लगते हैं कि समस्याओं का हल करने का यही सही तरीका होता है – चिल्लाओ, झगड़ों और बहुत ज्यादा गुस्सा करो। जिस कारण वह स्वयं भी बड़े होकर सफल और मजबूत रिश्ते बनाने में असमर्थ रहते हैं।
यदि एक जोड़ा एक जीव को इस दुनिया में लेकर आया है, तो यह उस जोड़े का फर्ज़ बनता है कि वह अपने बच्चे को एक सुरक्षित, सकारात्मक और प्यार भरा वातावरण उपलब्ध करवाएं, ताकि वह बच्चा अपना पूरा जीवन सही रूप से, प्यार के साथ, हॅंसी – खुशी जी पाए।

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-नवनीत कौर (cp.navneetkaur@gmail.com)

