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समाज निर्माण में तकनीकी महाविद्यालयों को गिट्स की आवश्यकता : राकेश जैन

 

राकेश जैन, राजस्थान, १७जनवरी । आज का युग विज्ञान और तकनीक का युग है। समाज का प्रत्येक क्षेत्र—शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, संचार और रक्षा—तकनीकी प्रगति पर निर्भर करता जा रहा है। ऐसे में केवल डिग्री प्रदान करने वाले तकनीकी महाविद्यालय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि ऐसे संस्थानों की आवश्यकता है जो गिट्स (GITS) अर्थात “Generation of Intelligent Technocreates for the Society” यानी “समाज के लिए बुद्धिमान तकनीकी सृजनकर्ताओं की पीढ़ी “का निर्माण कर सकें।तकनीकी महाविद्यालयों का उद्देश्य केवल इंजीनियर या तकनीकी विशेषज्ञ तैयार करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे तकनीकी सृजनकर्ता (Technocreates) तैयार करना होना चाहिए जो समाज की समस्याओं को समझें और तकनीक के माध्यम से उनके समाधान प्रस्तुत करें। आज देश को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो मशीनों के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी समझते हों।गिट्स की अवधारणा तकनीकी शिक्षा को समाज से जोड़ती है। इसका तात्पर्य है—ऐसे बुद्धिमान, नवाचारी और नैतिक रूप से सक्षम तकनीकी स्नातक तैयार करना जो रोजगार खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजक बनें। जब तकनीकी विद्यार्थी समाज की वास्तविक समस्याओं—जैसे ऊर्जा संकट, जल प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाएँ, पर्यावरण संरक्षण और डिजिटल साक्षरता—पर कार्य करते हैं, तब तकनीकी शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य पूर्ण होता है।

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तकनीकी महाविद्यालय यदि गिट्स के सिद्धांत पर कार्य करें, तो शोध और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। स्टार्टअप संस्कृति विकसित होगी और “मेक इन इंडिया”, “डिजिटल इंडिया” तथा “आत्मनिर्भर भारत” जैसे राष्ट्रीय अभियानों को मजबूती मिलेगी। इससे तकनीकी शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित न रहकर प्रयोगशालाओं, उद्योगों और समाज तक पहुँचेगी।आज आवश्यकता है कि तकनीकी महाविद्यालय विद्यार्थियों में समस्या-समाधान क्षमता, नैतिकता, सामाजिक उत्तरदायित्व और नेतृत्व गुणों का विकास करें। ऐसा तभी संभव है जब शिक्षा का लक्ष्य गिट्स —समाज के लिए बुद्धिमान तकनीकी सृजनकर्ताओं की पीढ़ी—तैयार करना हो।तकनीकी महाविद्यालय आज समाज और उद्योग के बीच सेतु की भूमिका निभा सकते हैं। यदि पाठ्यक्रम को स्थानीय एवं राष्ट्रीय आवश्यकताओं से जोड़ा जाए, तो विद्यार्थी पढ़ाई के दौरान ही वास्तविक समस्याओं पर काम करना सीखते हैं। इससे तकनीक केवल पुस्तकों तक सीमित न रहकर समाज के दैनिक जीवन का हिस्सा बनती है।

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गिट्स की सोच विद्यार्थियों को केवल प्रतिस्पर्धा की दौड़ में आगे बढ़ने के लिए नहीं, बल्कि सहयोग और सामूहिक विकास की भावना सिखाती है। जब तकनीकी शिक्षा में सामाजिक परियोजनाओं, सामुदायिक सेवाओं और फील्ड वर्क को शामिल किया जाता है, तब विद्यार्थी तकनीक के मानवीय पक्ष को समझ पाते हैं।आज के समय में तकनीकी शिक्षा को नैतिकता और जिम्मेदारी से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा साइंस और स्वचालन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग तभी सार्थक है जब वह समाज के हित में हो। गिट्स आधारित तकनीकी महाविद्यालय विद्यार्थियों को यह सिखाते हैं कि तकनीकी शक्ति के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व भी अनिवार्य है।

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तकनीकी महाविद्यालय नवाचार के केंद्र बन सकते हैं, जहाँ विद्यार्थी अपने विचारों को प्रयोगों और प्रोटोटाइप के माध्यम से वास्तविक रूप देते हैं। इस प्रक्रिया में असफलता को सीख का माध्यम माना जाता है, जिससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास की भावना विकसित होती है।अंततः, गिट्स की अवधारणा तकनीकी शिक्षा को मानव-केंद्रित बनाती है। जब तकनीकी महाविद्यालय समाज की आवश्यकताओं को अपनी शिक्षा का आधार बनाते हैं, तब वे केवल संस्थान नहीं रहते, बल्कि राष्ट्र के बौद्धिक और तकनीकी विकास के सशक्त स्तंभ बन जाते हैं।अतः यह स्पष्ट है कि तकनीकी महाविद्यालयों की भूमिका केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्हें गिट्स के रूप में समाज के लिए सक्षम, संवेदनशील और सृजनशील तकनीकी मानव संसाधन तैयार करने का केंद्र बनना होगा। यही राष्ट्र निर्माण की सच्ची नींव है।

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