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संपादकीय

अपने मताधिकार की ताकत को पहचानें और इसका सार्थक उपयोग करें : श्वेता दीप्ति

 

डॉ श्वेता दीप्ति, सम्पादकीय हिमालिनी अंक फरवरी ०२६।नेपाली जनता के सामने दो तरह की चुनौतियाँ

सरकार की विफलता और अंतरिम सरकार का इतिहास : श्वेता दीप्ति

 

डॉ श्वेता दीप्ति, सम्पादकीय हिमालिनी अंक दिसम्बर। नेपाल में अंतरिम सरकार का इतिहास लम्बी अवधि

शेख हसीना – सत्ता से सजा तक की यात्रा : श्वेता दीप्ति

 

डॉ श्वेता दीप्ति, सम्पादकीय, हिमालिनी अंक नवंबर । बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के

चुनौतियों के बीच सुशासन की उम्मीद : श्वेता दीप्ति

 

डॉ श्वेता दीप्ति, सम्पादकीय, हिमालिनी सितम्बर। वर्ष २०८२ (२०२५, ८ सितम्बर) नेपाल के राजनीतिक इतिहास

चिन्तन का विषय यह है कि नीति बड़ी होती है या नेता ? : श्वेता दीप्ति

 

डॉ श्वेता दीप्ति, सम्पादकीय हिमालिनी अंक जुलाई ०२५। नेता कब नीति के अनुरूप आचरण करेंगे

यह समय सृष्टि के लिए चिंतित होने का है : श्वेता दीप्ति

 

डॉ श्वेता दीप्ति, सम्पादकीय हिमालिनी, अंक मार्च 025 । प्राकृतिक प्रकोप, असामयिक मृत्यु, साँसों पर

विकास की होड़ में प्राकृतिक संपदा के साथ खिलवाड़ : श्वेता दीप्ति

 

तिब्बत में आया भूकम्प चीन के कारण तो नहीं ? डॉ श्वेता दीप्ति, सम्पादकीय हिमालिनी

सीरिया के पतन के साथ तीसरे विश्वयुद्ध की दस्तक : श्वेता दीप्ति

 

डॉ श्वेता दीप्ति, सम्पादकीय हिमालिनी अंक दिसम्बर 025 । युद्ध कभी भी फलदायी नहीं होता,

बीआरआई समझौता अनुदान, कर्ज या सहयोग ? – डॉ. श्वेता दीप्ति

 

डॉ श्वेता दीप्ति, हिमालिनी अंक दिसंबर 024। प्रधानमंत्री ओली दो से पांच दिसंबर तक चीन

: चीन दौरे की तैयारियां धीमी, किन्तु बहस तेज

 

सम्पादकीय, हिमालिनी अंक नवंबर 024 । प्रधानमंत्री ओली की आगामी चीन यात्रा की तैयारी शुरू

बांग्लादेश की स्थिति पर नेपाल की कूटनीतिक पहल हो : श्वेता दीप्ति

 

डॉ श्वेता दीप्ति, अंक अगस्त २०२४  (सम्पादकीय) । जब भी किसी आंदोलन में उपद्रवी तत्व

‘होइहि सोइ जो राम रचि राखा ! को करि तर्क बढ़ावै साखा’ : श्वेता दीप्ति

 

डॉ श्वेता दीप्ति, हिमालिनी अंक जून, (सम्पादकीय) नियति जो तय करती है होता वही है ।

लुभावने वादे के साथ २०८१/८२ के लिए नीति कार्यक्रम की घोषणा : श्वेता दीप्ति

 

डॉ श्वेता दीप्ति (सम्पादकीय) हिमालिनी, अंक मई 2024। सरकार द्वारा आगामी वर्ष २०८१/८२ के लिए

हिन्दू विक्रम संवत अंग्रेजी कलेंडर से ५८ साल आगे है : श्वेता दीप्ति

 

हिंदू नववर्ष की महत्ता डॉ श्वेता दीप्ति, सम्पादकीय, हिमालिनी अंक अप्रैल 2024 । हिंदू धर्म

ज्ञान की सर्वोच्च पराकाष्ठा मनुष्य को मनुष्यता से जोड़ना है : श्वेता दीप्ति

 

डॉ श्वेता दीप्ति, (सम्पादकीय-हिमालिनी), अंक फरवरी, 2024 मनुस्मृति में कहा गया है– “सत्य बोलना भी

“अस्थिरता लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं” : श्वेता दीप्ति

 

डॉ श्वेता दीप्ति, (सम्पादकीय) हिमालिनी ,अंक मार्च 2024  : प्रायः गठबंधन की सरकारें प्रजातंत्र का

यह देश बूढ़े कंधों पर टिका हुआ है : श्वेता दीप्ति

 

डॉ श्वेता दीप्ति, सम्पादकीय, हिमालिनी अंक दिसम्बर 023। “कालवित् कार्यं साधयेत्” एक और वर्ष गुजर

अतीत का शोक नहीं, वर्तमान पर दृष्टि हो : श्वेता दीप्ति

 

डॉ श्वेता दीप्ति, सम्पादकीय, हिमालिनी नवम्बर २०२३ अंक, अतीत का शोक नहीं, वर्तमान पर दृष्टि

यह देश सचमुच ‘सती द्वारा शापित देश’ है : श्वेता दीप्ति

 

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिन: -डॉ श्वेता दीप्ति डॉ श्वेता दीप्ति, सम्पादकीय, हिमालिनीअक्टूबर २०२३ अंक। इजराइल

नेपाल कभी गुलाम नहीं रहा लेकिन इसका अपनों से ही संघर्ष का लम्बा इतिहास है : श्वेता दीप्ति

 

डॉ श्वेता दीप्ति, सम्पादकीय हिमालिनी, अंक अगस्त । हमारा पड़ोसी मित्र राष्ट्र भारत अपनी स्वतंत्रता

व्यक्तिगत धन और स्वार्थ, राजनीति को भ्रष्ट करते हैं – नेल्सन मंडेला

 

डॉ श्वेता दीप्ति, हिमालिनी अंक मई (सम्पादकीय) । नेपाल में भ्रष्टाचार नियंत्रण और सुशासन की

बड़े बेआबरू हो कर, तेरे कूचे से हम निकले : डा श्वेता दीप्ति

 

काठमांडू , हिमालिनी फ़रवरी अंक सम्पादकीय | राष्ट्रधर्म सभी धर्मों से सर्वोच्च होता है और

शक्ति ही जीवन है, शक्ति ही धर्म है, शक्ति ही सत्य और सर्वत्र है : श्वेता दीप्ति

 

या देवी सर्वभूतेषू शक्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। डा.श्वेता दीप्ति, (सम्पादकीय हिमालिनी

प्रकृति के असीमित दोहन का परिणाम मानव भुगत रहा है : श्वेता दीप्ति

 

सम्पादकीय, हिमालिनी ,अप्रील २०२१ अंक, पिछले कुछ दिनों से काठमान्डू के आकाश में पर्यावरण प्रदूषण

देश अँधेरे सुरंग के मुहाने पर खड़ा है, हम रोशनी तलाश रहे हैं : श्वेता दीप्ति

 

शक्ति–प्रदर्शन का विद्रूप तमाशा हिमालिनी, (सम्पादकीय) अंक फरवरी,2021।नेपाल की राजनीति अपने इतिहास में एक महत्वपूर्ण

कर्तव्य वह जिससे मानवता और नैतिकता हमेशा जिन्दा रहे : डॉ श्वेता दीप्ति

 

सम्पादकीय : हिमालिनी २०२० डिसेम्वर अंक | हमारी जिंदगी में सुख और दुःख दोनों लगे

रोम जल रहा था और नीरो बंसी बजाने में मशगूल था : श्वेता दीप्ति

 

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु। मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्।। ॐ

सत्ताधारी हर नेता का बयान नेपाल–भारत के सम्बन्धों में खाई ही पैदा कर रही है : श्वेता दीप्ति

 

  देश प्राकृतिक आपदा, वैश्विक महामारी के साथ अदूरदर्शिता का भी शिकार हो रहा है

हमारे पर्व हमें प्रकृति की पूजा करना सिखाते हैं : श्वेता दीप्ति

 

हिन्दू संकृति और आस्श्विन मास हिमालिनी  अंक अगस्त , सितंबर  2019 (सम्पादकीय ) | हिन्दू

आत्महत्या ! आखिर इसका समाधान क्या है ? : श्वेता दीप्ति

 

क्यों हार जाता है मन ? हिमालिनी,अंक अगस्त,2019 (सम्पादकीय)| आत्महत्या । एक डरावना शब्द । एक शब्द,

अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता लोकतन्त्र की प्राणवायु : डा.श्वेता दीप्ति

 

हिमालिनी, सम्पादकीय, अंक मई 2019 |विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता लोकतन्त्र की प्राणवायु की भांति

 नारी को देवी नहीं सिर्फ इंसान समझें : डॉ श्वेता दीप्ति

 

नारी को देवी नहीं सिर्फ इंसान समझें स्वभावो नोपदेशेन शक्यते कर्तुमन्यथा । सुतप्तमपि पानीयं पुनर्गच्छति शीतताम् ।।

धर्म जीवन को संयमित करता है : श्वेता दीप्ति

 

एकवर्णं यथा दुग्धं भिन्नवर्णासु धेनुषु । तथैव धर्मवैचित्त्यं तत्वमेकं परं स्मृतम् ।। आकाशात् पतितं तोयं यथा गच्छति

हिंदी उर्वरा है, इसमें भाव प्रवणता है तथा व्याकरण से अनुशासित है : डा.श्वेता दीप्ति

 

सर्वग्राह्य हिन्दी भाषा को संवैधानिक दर्जा प्राप्त हो आज हिन्दी २२ देशों में करीब १००

प्रत्येक साहित्यकार अपने देश के अतीत से प्राप्त विरासत पर गर्व करता है : श्वेता दीप्ति

 

साहित्यसङ्गीतकलाविहीनः साक्षात्पशुः पुच्छविषाणहीनः हिमालिनी, अंक डिसेम्वर 2018, (सम्पादकीय ) भर्तृहरि नीतिशतक में कहा गया है

आहः प्रकृति हमें कितना देती है : श्वेता दीप्ति

 

हिमालिनी, अंक नोभेम्बर 2018, (सम्पादकीय ) हिन्दू धर्म या यूँ कहूँ कि सनातन हिन्दू धर्म

काला झंडा दिखाना देशद्रोह कैसे हो गया ? : श्वेता दीप्ति

 

नीति और नीयत पर सवाल हिमालिनी, अंक सितंबर,२०१८, सम्पादकीय प्रहरी हिरासत में राममनोहर यादव की