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लुम्बिनी में बुद्ध जयंती का भव्य आयोजन, भारत-नेपाल सांस्कृतिक व बौद्धिक साझेदारी हुई और मजबूत

 

लुम्बिनी, नेपाल, 1 मई 026 ।  भगवान की जन्मस्थली लुम्बिनी में बुद्ध जयंती के अवसर पर भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और शैक्षिक सहयोग का एक भव्य उदाहरण देखने को मिला। कल भारतीय दूतावास द्वारा लुम्बिनी विकास कोष के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में विविध गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिसने बुद्ध के संदेशों को समकालीन संदर्भ में पुनर्जीवित किया।

कार्यक्रम की शुरुआत स्कूली छात्रों की चित्रकला प्रदर्शनी से हुई, जिसमें बुद्ध के जीवन, करुणा और शांति के संदेश को रंगों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इसके बाद भारत और नेपाल के भिक्षुओं द्वारा संयुक्त रूप से मंत्रोच्चारण और प्रार्थना की गई, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा।

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शाम के सांस्कृतिक कार्यक्रम ने आयोजन को और भी आकर्षक बना दिया। (ICCR) के कलाकार दल ने सुश्री दीप्ति गुप्ता के नेतृत्व में बौद्ध विषय पर आधारित कथक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति में बुद्ध के जीवन और उनके उपदेशों को शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया।

वहीं, नेपाल की ओर से प्रसिद्ध सरोद वादक सुरेश बज्राचार्य के नेतृत्व में एक संगीत बैंड ने पारंपरिक और आधुनिक संगीत का सुंदर संगम प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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इस अवसर पर लुम्बिनी प्रदेश के माननीय प्रदेश प्रमुख कृष्ण बहादुर धर्ती मगर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में बुद्ध के उपदेशों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में शांति, सहिष्णुता और सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर भारतीय दूतावास के डीसीएम डॉ राकेश पांडेय और pic प्रमुख श्री बसिष्ठ नन्दन जी की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के अंतर्गत के सहयोग से लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय में “बुद्ध के उपदेशों की प्रासंगिकता: शांति, समरसता और सतत विकास के मार्ग” विषय पर एक अकादमिक संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में भारत और नेपाल के विद्वानों ने अपने विचार साझा करते हुए बताया कि बुद्ध के सिद्धांत आज भी वैश्विक चुनौतियों—जैसे संघर्ष, असमानता और पर्यावरणीय संकट—के समाधान में मार्गदर्शक बन सकते हैं।

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इस पूरे आयोजन ने न केवल भगवान बुद्ध के सार्वभौमिक संदेश को पुनः स्थापित किया, बल्कि भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक कूटनीति, धार्मिक विरासत और शैक्षिक सहयोग को भी एक नई ऊर्जा प्रदान की।

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