शिक्षा मंत्री को प्रो.कन्हैया झा का सुझाव, शिक्षा प्रणाली कोई अमूर्त या अपरिवर्तनीय ‘वेद’ नहीं है
नेपाल की शिक्षा प्रणाली के पुनरुत्थान हेतु आवश्यक कदम: एक यथार्थवादी ब्लूप्रिंट, शिक्षा मंत्री को प्रो. कन्हैया झा द्वारा प्रेषित सुझाव-मूलक रिपोर्ट

काठमांडू विश्वविद्यालय, धूलिखेल
प्रो कन्हैया झा, के.यू., १३ सितंबर । शिक्षा प्रणाली कोई अमूर्त या अपरिवर्तनीय ‘वेद’ नहीं है; इसमें समय के अनुरूप व्यावहारिक सुधारों की आवश्यकता होती है। भाई-भतीजावाद (Nepotism), सिंडिकेट और ‘सेटिंग’ से उपजा नेतृत्व केवल आदेशों का पालन कर सकता है, व्यवस्था में सुधार नहीं ला सकता।
वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की मुख्य समस्याएँ
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नौकरशाही की नकारात्मक मानसिकता: गरीब करदाताओं के पैसे से वेतन पाने वाले शिक्षा मंत्रालय, संबंधित विभागों और शिक्षक सेवा आयोग के कर्मचारियों का शिक्षकों के प्रति अपमानजनक रवैया सबसे बड़ी बाधा है।
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राजनीतिक हस्तक्षेप: पंचायत काल में विज्ञान शिक्षकों को विशेष प्रोत्साहन भत्ता मिलता था। बाद में, राजनीतिक प्रभाव और मात्र शिक्षा डिग्री (B.Ed/M.Ed) के आधार पर अयोग्य लोगों की भर्ती ने पूरी प्रणाली को विफल कर दिया।
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विदेशी एजेंडा और पाठ्यक्रम से खिलवाड़: विश्व बैंक ने 2013 से नेपाल को ‘लेबर एक्सपोर्ट’ (Labor Export) राष्ट्र मानकर पाठ्यक्रम बदलने के लिए अनुदान दिया है। इसी प्रभाव में आकर, IT और AI के युग में सबसे अनिवार्य विषय ‘गणित’ को पाठ्यक्रम से हटाने की साजिश रची गई थी, जिसे बाद में शिक्षकों के राष्ट्रव्यापी आंदोलन के दबाव में वापस लाया गया।
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मंत्रालय में शैक्षिक दलाल: समस्याओं को खोजने के लिए देशभर में भ्रमण करने का नाटक अनावश्यक है, क्योंकि असली बीमारी और ‘सेटिंग’ स्वयं मन्त्रालय के भीतर मौजूद है। ‘मेरिटोक्रेसी’ के नाम पर केवल करीबियों को नियुक्त किया जा रहा है।
सुधार हेतु रणनीतिक सुझाव
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विशेषज्ञों पर आधारित नीतियां: चाटुकारों और करीबियों को हटाकर, वास्तविक और स्वतंत्र शिक्षाविदों के सुझावों के आधार पर समय-सापेक्ष अधिनियम और नियमावली का निर्माण किया जाए।
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शिक्षकों का सम्मान और संस्थागत निगरानी: शिक्षकों के पेशेवर सम्मान को बहाल किया जाए। साथ ही, सभी शैक्षिक संस्थानों की नियमित निगरानी (Monitoring) और उन्हें आवश्यक सुविधाएँ (Facilitation) प्रदान करने की मजबूत व्यवस्था बने।
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आत्मनिर्भर पाठ्यक्रम का निर्माण: विदेशी दबावों से मुक्त होकर, सरकार द्वारा प्रस्तावित शिक्षा प्रणाली पर गंभीर विमर्श हो। इसे एक सक्षम और ईमानदार नेतृत्व के माध्यम से लागू किया जाए।
किसी भी देश के अस्तित्व को समाप्त करने के लिए उसकी शिक्षा प्रणाली पर प्रहार किया जाता है, और वर्तमान हालात इसी दिशा की ओर इशारा कर रहे हैं। नेपाल के युवाओं को वैश्विक स्तर पर सबल और सक्षम बनाने के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम प्रारूप और संस्थागत ढांचे में तत्काल, इमानदार सुधार अपरिहार्य है।

