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संपादकीय

मौन सरकार, लाचार तंत्र और बेजुवान जनता इस देश की नियति है : श्वेता दीप्ति

 

 प्रधानमंत्री की सोच सराहनीय परन्तु समयानुकूल नहीं सम्पादकीय, हिमालिनी, अंक जुलाई २०१८ | मानसून की

विवादों ही विवादों में नेताओं के वादे कहीं खोने लगे हैं : श्वेता दीप्ति

 

पूर्वाग्रह से ग्रसित विचार और वर्चस्व की भावना, कभी–कभी गम्भीर परिस्थितियाँ और परिणाम को जन्म

“पाकिस्तान भूटान या नेपाल नहीं है” परवेज मुसर्रफ की उक्ति पर नेपाल चुप क्यों : श्वेता दीप्ति

 

खुश रहो, क्योंकि उनके जेब भरे हुए हैंश्वेता दीप्ति, १९-०१६,  (सम्पादकीय,अक्टूबर अंक), शारदीय नवरात्र की

ओली सरकार कुर्सी बचाने के लिए सांसदों को मंत्रालय का उपहार दे रही है : श्वेता दीप्ति

 

वर्ष-१९,अंक-१,जनवरी २०१६ (सम्पादकीय) बिना किसी विशेष उपलब्धि के बीता हुआ वर्ष नेपाल की जनता को

संपादकीय

 

लोकतन्त्र एक जीवंत और लगातार अपने अनुभवों से समृद्ध होनेवाली व्यावस्था है। पञ्चायती व्यावस्था ओर

संपादकीय

 

नेपाल-भारत बीच स्थापित सम्बन्ध को कुछ परिधियों के तहत स्थापित है, ऐसा मानना हमारी अल्पज्ञानता