संपादकीय हिमालिनी अपडेट हिमालिनी पत्रिका हिमालिनी विशेष मौन सरकार, लाचार तंत्र और बेजुवान जनता इस देश की नियति है : श्वेता दीप्ति 8 years ago प्रधानमंत्री की सोच सराहनीय परन्तु समयानुकूल नहीं सम्पादकीय, हिमालिनी, अंक जुलाई २०१८ | मानसून की
संपादकीय हिमालिनी अपडेट हिमालिनी पत्रिका हिमालिनी विशेष “योगक्षेमं वहाम्यहम्” 8 years ago सम्पादकीय,हिमालिनी अंक जून 2018 । आदिगुरु श्री शंकराचार्य जी का मत है कि “अप्राप्त वस्तु
संपादकीय हिमालिनी अपडेट हिमालिनी पत्रिका हिमालिनी विशेष आरोप प्रत्यारोप के बीच जनकपुर ने दिल खोलकर मोदीजी का स्वागत किया : श्वेता दीप्ति 8 years ago ठंडे पड़े रिश्तों में गर्माहट के आसार सम्पादकीय, हिमालिनी, मई अंक 2018 । भारतीय
biratnagar birgunj janakpur lumbani nepalgunj siraha-lahan संपादकीय हिमालिनी पत्रिका हिमालिनी विशेष विवादों ही विवादों में नेताओं के वादे कहीं खोने लगे हैं : श्वेता दीप्ति 8 years ago पूर्वाग्रह से ग्रसित विचार और वर्चस्व की भावना, कभी–कभी गम्भीर परिस्थितियाँ और परिणाम को जन्म
संपादकीय हिमालिनी अपडेट हिमालिनी पत्रिका हिमालिनी विशेष अस्थिर देश में स्थिरता की नाकाम तलाश : श्वेता दीप्ति 8 years ago काठमांडू | राजनीतिक अस्थिरता के बीच ही हमने २०१८ का सफर शुरु कर दिया है
मधेश संपादकीय हिमालिनी अपडेट चुनाव ने मधेश के मिजाज को स्पष्ट कर दिया है : श्वेता दीप्ति 8 years ago ( देश की जनता स्थायित्व खोज रही है, सम्पादकीय- दिसम्बर २०१७ ) जनता के बीच
संपादकीय हिमालिनी अपडेट राजनीतिक जोड़–तोड़ और गठबन्धन की कोशिश जारी है 8 years ago श्वेता दीप्ति, हिमालिनी, अक्टूबर अंक । संसद विघटित हो चुका है और भूतपूर्व साँसद एक
संपादकीय हिमालिनी अपडेट हिमालिनी पत्रिका हिमालिनी विशेष ये जनता है, सब जानती है और मधेश भावुक हो सकता है पर मुर्ख नहीं : श्वेता दीप्ति 9 years ago पहाड़ का दर्द भी अलग नहीं है |(सम्पादकीय ) हिमालिनी, अगस्त अंक | प्रकृति
संपादकीय हिमालिनी अपडेट हिमालिनी पत्रिका दूसरे चरण का चुनाव सम्पन्न : माहोल कहीं खुशी और कहीं गम 9 years ago श्वेता दीप्ति, कहीं खुशी, कहीं गम, सम्पादकीय (जुलाई अंक ) बारिश का मौसम इंतजार का
संपादकीय हिमालिनी अपडेट हिमालिनी पत्रिका चुनौतियों से घिरी देउवा सरकार 9 years ago अनुमानतः छः लाख नेपाली नागरिक कतार में हैं जिनका भविष्य फिलहाल अँधेरे में है ।
संपादकीय हिमालिनी अपडेट हिमालिनी विशेष चुनावी गठबन्धन,प्रजातंत्र का विकृत नमूना पेश किया जा रहा है : श्वेता दीप्ति 9 years ago यह गहन प्रश्न कैसे समझाएँ ? दस बीस अधिक हों तो हम नाम गिनाएँ ।
संपादकीय हिमालिनी अपडेट लोकतंत्रीय व्यवस्था महज दिखावा तो नहीं ? श्वेता दीप्ति 9 years ago चुनावी चिन्ह पार्टियों को प्राप्त नहीं हुए हैं, मतदाताओं की नामावली सूची नदारद है, ऐसी
संपादकीय हिमालिनी अपडेट बन्द करो यह खून की होली,जो रक्त बहा वह, एक इंसान का था… : श्वेता दीप्ति 9 years ago सरकार का कहना है कि सप्तरी में जो हुआ उसका आदेश नहीं था, तो क्या
संपादकीय हिमालिनी अपडेट हिमालिनी पत्रिका हिमालिनी विशेष सीके राउत को गिरफ्तार करके देश बचाने की वकालत की जा रही है : श्वेता दीप्ति 9 years ago जब भी देश किसी निर्णायक मोड़ पर होता है और जनता की आंखें किसी परिणाम
संपादकीय हिमालिनी अपडेट हिमालिनी पत्रिका हिन्दी प्रेम,मिलन और सौहार्द की भाषा है : श्वेता दीप्ति 9 years ago हिन्दी भाषा प्रेम,मिलन और सौहार्द की भाषा है। यह मुख्यरूप से आर्यों और पारसियों की
संपादकीय हिमालिनी पत्रिका “पाकिस्तान भूटान या नेपाल नहीं है” परवेज मुसर्रफ की उक्ति पर नेपाल चुप क्यों : श्वेता दीप्ति 10 years ago खुश रहो, क्योंकि उनके जेब भरे हुए हैंश्वेता दीप्ति, १९-०१६, (सम्पादकीय,अक्टूबर अंक), शारदीय नवरात्र की
संपादकीय हिमालिनी पत्रिका अटकलों का बाजार गर्म है-श्वेता दीप्ति 10 years ago वर्ष-१९,अंक-१,मेई २०१६ (सम्पादकीय) वक्त की धार और मार दोनों ही बहुत तेज होती है ।
संपादकीय अनुदान और सहयोग में सिमटी राजनीति-श्वेता दीप्ति 10 years ago वर्ष-१९,अंक-१,अप्रिल २०१६ (सम्पादकीय) आत्मनिर्भरता मनुष्य को सबल बनाता है और सबल मनुष्य समाज को और
संपादकीय हिमालिनी पत्रिका महिला अधिकार का चीरहरण-श्वेता दीप्ति 10 years ago वर्ष-१९,अंक-१,मार्च २०१६ (सम्पादकीय)मौसम अपनी करवटें बदल चुका है । बसन्ती बयार और फाल्गुनी फिजा ने
संपादकीय हिमालिनी पत्रिका संशोधन का तोहफा: श्वेता दीप्ति 10 years ago वर्ष-१९,अंक-१,फरवरी २०१६ (सम्पादकीय)अनिश्चितताओं का दौर जारी है, समाप्ति के आसार नजर नहीं आ रहे ।
संपादकीय ओली सरकार कुर्सी बचाने के लिए सांसदों को मंत्रालय का उपहार दे रही है : श्वेता दीप्ति 10 years ago वर्ष-१९,अंक-१,जनवरी २०१६ (सम्पादकीय) बिना किसी विशेष उपलब्धि के बीता हुआ वर्ष नेपाल की जनता को
संपादकीय संविधान किसी वर्ग विशेष का नहीं हो सकता 10 years ago सम्पादकीय राजधानी में जितनी तेज सर्द हवाएँ चल रही हैं, उतनी ही तेज सरगर्मी सत्ता
संपादकीय विकल्प नहीं समाधान 10 years ago न तुम बदले न मौसम बदला, दिलों के जज्बात जरूर बदल गए । भाईचारा, सद्भाव,
संपादकीय संविधान निर्विवाद हो सकता था, अगर उसमें सम्पूर्ण देशवासियों का सम्बोधन होता : श्वेता दीप्ति 11 years ago सम्पादकीय देश ने नए संविधान को पाया है । निःसन्देह यह एक अविस्मरणीय क्षण होता
संपादकीय हर घड़ी दर्द में पैबन्द लग जाते हैं 11 years ago सम्पादकीय सत्ता का खेल भी अजीब होता है । कभी तो जनता की उम्मीदों को
संपादकीय उलझनों का दौर जारी 11 years ago बड़े ही तामझाम के साथ सुझाव संकलन की प्रक्रिया सम्पन्न हो गई । नेताओं का
संपादकीय वक्त अब भी है आत्मविश्लेषण करें 11 years ago उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान् निबोधत अर्थात् उठो, जागो और जब तक तुम अपने अंतिम ध्येय
संपादकीय नेपाल के नवनिर्माण में सहयोग दें 11 years ago पिछले महीने देश ने जो भोगा वह अप्रत्यासित था, उसकी किसी ने कल्पना नहीं की
संपादकीय प्रकृति ने गलत नहीं किया, यह उसकी अपनी गति है : श्वेता दीप्ति 11 years ago बाढ़ की सम्भावनाएँ सामने हैं और नदियों के किनारे घर बने हैं । चीड़–वन में
संपादकीय इंतजार की एक और तारीख 11 years ago सम्पादकीय वि.सं. २०७२ दस्तक दे रहा है और उसके साथ ही राजनेताओं के द्वारा तय
संपादकीय तमाशा बनता लोकतन्त्र 11 years ago सम्पादकीय खुला मंच में तीस दलीय मोर्चा द्वारा हुए शक्ति–प्रदर्शन के पश्चात् एक बार पुनः
संपादकीय नेपथ्य का रहस्य 11 years ago सम्पादकीय प्रयत्न करने से ही कार्य पर्ूण्ा होते हैं, किन्तु इसमें सम्बन्धित पक्ष की प्रतिबद्धता
संपादकीय र्सार्क, उपहार और ऊर्जा समझौता 11 years ago सम्पादकीय र्सार्क आया और चला गया । उम्मीदों के कई पुलिन्दे थे जो खुले भी,
संपादकीय आतिथ्य की तैयारी में व्यस्त राजधानी 11 years ago सम्पादकीय उत्साह और उमंग का मौसम जा चुका है । त्योहारों का खुमार उतर चुका
संपादकीय डा. राउत पर कसता शिकंजा 12 years ago सम्पादकीय जहाँ देश का एक हिस्सा सुलग रहा है, वहीं पहाडÞ की हवा उसे और
संपादकीय सम्पादकीय 12 years ago पीडा अपनों की प्रकृति का प्रकोप हर वर्षहमें पीडा का वह दंश दे जाता है जिससे
संपादकीय सम्पादकीय विचारणीय मुद्दे 12 years ago संविधान प्राप्ति के दर्ीघकालीन सपने को साकार करने हेतु नेपाली जनता ने दूसरे संविधान सभा
संपादकीय खिलाडियों का मनोबल बढाएं 12 years ago सगरमाथा और गौतम बुद्ध के देश के रुप में परिचित नेपाल अब विश्व में विश्वकप
संपादकीय साहित्य-सेवा ही मेरा अध्यात्म 12 years ago ० साहित्य की ओर आपकी रुझान कैसे हर्ुइ – पारिवारिक परिवेश- व्यक्तिविशेष अथवा और कोई
संपादकीय संपादकीय 14 years ago लोकतन्त्र एक जीवंत और लगातार अपने अनुभवों से समृद्ध होनेवाली व्यावस्था है। पञ्चायती व्यावस्था ओर
संपादकीय संपादकीय 14 years ago संवैधानिक संसद बनने के बाद नेपाली जनता ने लम्बी साँस ली थी। उसे लगने लगा
संपादकीय संपादकीय 14 years ago नेपाल-भारत बीच स्थापित सम्बन्ध को कुछ परिधियों के तहत स्थापित है, ऐसा मानना हमारी अल्पज्ञानता
संपादकीय या देवी र्सवभूतेष शक्ति रुपेण संस्थिता 15 years ago या देवी र्सवभूतेष शक्ति रुपेण संस्थिता नमस्तस्यैं नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमों नमः २०६८ विजया दशमी की
विविध संपादकीय संपादकीय 15 years ago ०६२/६३ जनान्दोलन के बाद प्रत्येक जनता की अभिलाषा थी कि अब देश में अहिंसा से
संपादकीय सम्पादक की कलम से… 15 years ago शान्ति एवं संविधान देश में चर्चा का विषय र्सवांधिक महत्वपर् रहा है। फिर भी सभी
संपादकीय सम्पादक की कलम से… 15 years ago समीप आती जाती है, त्यों-त्यों नेपाल में राजनीतिक महाप्रलय आने की त्रास र्सवत्र छा जाती
संपादकीय सम्पादक की कलम से … 15 years ago “कालो न जातः वयमे व जातः” समय नहीं खत्म हो ता हम लोंग कालकवलित हो ते जा र हे