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वक्त अब भी है आत्मविश्लेषण करें

 
श्वेता दीप्ति
श्वेता दीप्ति

उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान् निबोधत अर्थात् उठो, जागो और जब तक तुम अपने अंतिम ध्येय तक नहीं पहुँच जाते, तब तक चैन न लो । विवेकानन्द की यह घोषणा आज के सन्दर्भ में समयोचित लग रही है । आशा का संचार उम्मीद जगाती है और उम्मीद ही कत्र्तव्य पथ पर मानव को अग्रसर करती है । आज जो हो रहा है, वह अंतिम सच नहीं है, बल्कि एक नए कल की शुरुआत है । नेपाल की आधी आबादी असमंजस में है । संविधान से मिलने वाली संघीयता, सम्मान, अधिकार और पहचान की बातें धाराशायी होती दिख रही हैं । किन्तु हतोत्साह होने की कोई वजह नहीं है क्योंकि, अति ही किसी भी परिणाम की दशा और दिशा बदलती है । पेश किए हुए संविधान मसौदे ने सिर्फ सवाल खड़े किए हैं । सर्वोच्च की अवमानना, बहुमत का मद और हर हाल में संविधान लाने की जिद ये सारी बातें किसी अच्छी सम्भावना के संकेत नहीं हैं । यह सच है कि एक साथ सबों को संतुष्ट नहीं किया जा सकता पर कोशिश तो की जा सकती थी । किन्तु कोशिश की सम्भावना तो दूर की बात है, जो हासिल था, उसे भी छीन लेने की साजिश है । मधेश, महिला, दलित, जनजाति, मुस्लिम, नागरिकता, संचार माध्यम, धर्म, समाज किसी की भी सटीक व्याख्या मसौदे में नहीं है । संविधान कानून का जीवित दस्तावेज होता है, जो देश के हर नागरिक को सम्बोधित करता है । फास्ट ट्रैक से देश के भविष्य का निर्धारण एक मजाक है, जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है । नेता शायद भूल रहे हैं कि वो जनता से हैं, जनता के लिए हैं और जनता के द्वारा हैं । उन्हें यह सच आत्मसात् करनी होगी नहीं तो असमंजस और असंतोष की ये आँधी अग्नि को प्रज्जवलित करने की क्षमता अपने अन्दर छिपाए हुए है । वक्त अब भी है आत्मविश्लेषण करें, मधेश को यकीन दिलाएँ कि वो देश का ही हिस्सा है ।
दाता सम्मेलन की सफलता से सत्तापक्ष अति उत्साहित नजर आ रहा है । उम्मीद से अधिक मिल जाने की खुशी है । अपेक्षा है कि सरकार इसका उचित और सही जगह पर उपयोग करेगी । बहस जारी है और आनेवाले परिणाम पर देश का भविष्य टिका हुआ है । अग्रसर होकर महत्तर कर्मों का अनुष्ठान करें समय साथ देगा ।
अन्त में, वरिष्ठ भारतीय पत्रकार रामाशीष जी, जिनकी रग–रग में नेपाल बसा था उनका असामयिक हमें छोड़कर चला जाना हमेशा मर्माहत करेगा । हिमालिनी के लिए ये एक अपूरणीय क्षति है, हम स्तब्ध हैं नियति के इस क्रुर प्रहार से । ईश्वर उनकी शुद्ध आत्मा को चिरशांति प्रदान करे ।shwetasign

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