खुशियों के लिए किसी का इंतजार क्यों? अपने जीवन के शिल्पकार आप स्वयं हैं : बिमल सर्राफ
बिमल सर्राफ, रक्सौल / पूर्वी चंपारण । “आप कितने ही निपुण, बुद्धिमान, विवेकशील, गुणवान और धैर्यवान क्यों न हों, फिर भी जीवन की हर परिस्थिति पर आपका पूर्ण नियंत्रण नहीं हो सकता।”
मनुष्य का कर्तव्य केवल अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करना है। प्रयासों की भी एक सीमा होती है, और उस सीमा के आगे जीवन की डोर ईश्वर के हाथों में होती है। इसलिए खुशियों के लिए किसी और का इंतजार करने के बजाय स्वयं अपने जीवन के शिल्पकार बनें।
सत्कर्म ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। व्यक्ति अपने कर्मों से ही अपने भाग्य का निर्माण करता है। पीड़ा हमें अपनों का महत्व सिखाती है, जबकि धन-संपत्ति कई बार अपनों से दूर कर देती है। इसलिए बड़े कार्य करें, लेकिन व्यवहार में हमेशा विनम्रता बनाए रखें। यही महान व्यक्तित्व की सच्ची पहचान है।
जीवन मिलना भाग्य की बात है, मृत्यु समय की बात है, लेकिन मृत्यु के बाद भी लोगों के दिलों में जीवित रहना हमारे कर्मों की बात है।
जिस प्रकार वृक्ष को प्रतिदिन पानी देना पड़ता है, लेकिन फल मौसम आने पर ही लगते हैं, उसी प्रकार जीवन में भी धैर्य रखना आवश्यक है। हर कार्य अपने निश्चित समय पर ही सफल होता है।
गुण व्यक्ति को सफलता दिलाते हैं, लेकिन यदि उन गुणों के साथ विनम्रता और विवेक भी जुड़ जाए, तो व्यक्ति सफलता के सर्वोच्च शिखर तक पहुँच सकता है। लोग हमें हमारे नाम से पहचानते हैं, लेकिन याद हमारे अच्छे स्वभाव के कारण रखते हैं।
सबसे अधिक खुश वे लोग नहीं होते जो केवल पाना जानते हैं, बल्कि वे होते हैं जो दूसरों को देना जानते हैं। किसी भी समस्या का समाधान क्रोध से नहीं, बल्कि शांत मन से विचार करने से निकलता है।
भय से मुक्त होने के लिए श्रेष्ठ कर्म करना और स्वयं को अविनाशी आत्मा मानना आवश्यक है। जब जीवन की दिशा स्पष्ट होती है, तब मार्गदर्शक अपने आप मिल जाते हैं। यदि कोई मार्गदर्शक न भी मिले, तो हमारी अंतरात्मा ही हमें सही मार्ग दिखाने का कार्य करती है।

रक्सौल, पूर्वी चंपारण।

