बाढ़ के कारण रसुवा और नुवाकोट में स्वास्थ्य संकट: इलाज के लिए तरस रहे मरीज
काठमांडू/रसुवा, 8 सितंबर 2026 । 10 भाद्र को भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने रसुवा और नुवाकोट जिलों में मुख्य राजमार्गों और पुलों को पूरी तरह तबाह कर दिया है, जिससे इन क्षेत्रों में एक बड़ा स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है। यातायात विच्छेद होने के कारण सामान्य से लेकर गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अस्पताल पहुँचने के लिए भारी संघर्ष करना पड़ रहा है। जो त्रिशूली अस्पताल पहले 10-15 मिनट की दूरी पर था, वहाँ तक पहुँचने के रास्ते अब बह चुके हैं।
बाढ़ के बाद सामने आई प्रमुख स्वास्थ्य चुनौतियाँ:
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हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू करने की मजबूरी: कैदलेटार के एक मरीज (मिलन) को एपेन्डिसाइटिस होने पर घंटों जाम और खराब रास्तों का सामना करते हुए धुंचे अस्पताल ले जाया गया। लेकिन 25 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ और उपकरणों के अभाव में डॉक्टर सर्जरी करने से हिचकिचाए। एम्बुलेंस के लिए रास्ते न होने के कारण अंततः हार-गुहार कर मिलन को हेलीकॉप्टर से काठमांडू के कांति बाल अस्पताल लाया गया, जहाँ फटने की कगार पर पहुँच चुके एपेंडिक्स की सफल सर्जरी हुई।
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मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा: सोमवार को रसुवा की आमाछोदिंगमो गाउँपालिका की 29 वर्षीय फुर्पुयामो तामांग और उनके नवजात शिशु को स्वास्थ्य जटिलताओं के बाद हवाई उद्धार (Airlift) कर काठमांडू के परोपकार प्रसूति अस्पताल लाया गया। सड़क मार्ग पूरी तरह कट जाने के कारण हवाई उद्धार ही एकमात्र विकल्प बचा था।
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गाँवों में फंसे गंभीर मरीज: हाकू की पासांग म्हेन्दो तामांग, जिनका 21 वर्षीय बेटा बाढ़ के बाद से लापता है, गहरे सदमे में हैं और बार-बार बेहोश हो रही हैं। उन्हें बेहतर इलाज के लिए काठमांडू ले जाने की आवश्यकता है, लेकिन सड़क संपर्क टूटने के कारण वह गाँव में ही फंसी हुई हैं।
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गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच रुकी: त्रिशूली अस्पताल के निदेशक डॉ. राजेंद्र लामा के अनुसार, अस्पताल की सेवाएँ सुचारू होने के बावजूद मरीज वहाँ तक पहुँच नहीं पा रहे हैं। बड़ी संख्या में महिलाएँ अपनी नियमित गर्भ जांच (Antenatal care) से वंचित हो गई हैं, जिससे घर पर ही असुरक्षित प्रसव होने की संभावना और मातृ-शिशु मृत्यु दर का जोखिम काफी बढ़ गया है।
प्रशासन और अस्पतालों की प्रतिक्रिया:
धुंचे और त्रिशूली अस्पतालों में मरीजों की संख्या में भारी कमी आई है, जो बीमारियों के कम होने का नहीं, बल्कि लोगों के अस्पताल तक पहुँचने में असमर्थ होने का संकेत है। बागमती प्रदेश स्वास्थ्य मंत्रालय के सूचना अधिकारी दिनेश रूपाखेती के अनुसार, मरीजों का दबाव बढ़ने पर छात्रवृत्ति और अनुबंध वाले डॉक्टरों को भेजा जा सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल विशेषज्ञ डॉक्टर भेजने से समस्या हल नहीं होगी, क्योंकि धुंचे अस्पताल में नए पदों का सृजन, आवश्यक उपकरण और अन्य सहयोगी कर्मचारियों की भारी कमी अभी भी बरकरार है।


