Sun. Jan 19th, 2020

बन्द करो यह खून की होली,जो रक्त बहा वह, एक इंसान का था… : श्वेता दीप्ति

सरकार का कहना है कि सप्तरी में जो हुआ उसका आदेश नहीं था, तो क्या प्रहरी अपनी मर्जी चला रहे हैं ? अगर ऐसा है तो क्या ऐसे निरंकुश प्रहरी प्रशासन के बल पर सरकार चुनाव कराने की तैयारी कर रही है ?


Shweta dipti२३, मार्च ( सम्पादकीय) | अंततः वही हुआ जिसका अंदेशा था । जो हुआ वह अप्रत्याशित नहीं था क्योंकि, जिस तरह मधेश को सैनिक छावनी में परिवर्तित कर दिया गया था, इससे जाहिर होता है कि सत्ता जान रही थी कि मधेश की स्थिति अतिसंवेदनशील है । ऐसे में सैनिक के बल पर कार्यक्रम की अनुमति देकर क्या सरकार ने सही किया ? आश्वासन और प्रतीक्षा कर के मधेश की जनता थक चुकी है और यही मानसिक थकान असंतोष और प्रतिकार को पनपने का अवसर दे रही है । मधेश की एक भी माँग आजतक संबोधित नहीं हुई है, ऐसे में एक बार फिर उनकी भावनाओं को उकसाने का कार्य किया गया, फलस्वरूप एक बार फिर मधेश की निर्दोष जनता राजनीति की बलि चढ़ गई । देश दो धार में स्पष्ट रूप में बँटा हुआ नजर आ रहा है । राजविराज में जिस तरह एक बार फिर खून की होली खेली गई वह मधेशी जनता के लिए असहनीय है । एक घाव भरा नहीं था कि दूसरा मिल गया । खुद को शक्तिशाली साबित करने की जिद ने कई घरों में मातम फैला दिया है । निर्वाचन का माहोल पूर्णरूप से बना भी नहीं था कि अब उसके नहीं होने की सम्भावना बलवती हो गई है । सरकार का कहना है कि सप्तरी में जो हुआ उसका आदेश नहीं था, तो क्या प्रहरी अपनी मर्जी चला रहे हैं ? अगर ऐसा है तो क्या ऐसे निरंकुश प्रहरी प्रशासन के बल पर सरकार चुनाव कराने की तैयारी कर रही है ? जहाँ जनता डर या भय से शामिल ही नहीं हो पाए । ये लोकतंत्र का कौन सा नमूना सरकार पेश कर रही है ? कई सवाल सामने हैं, जो जवाब माँग रहे हैं, किन्तु फिलहाल सभी गर्त में हैं । हर ओर असमंजस का माहोल बना हुआ है । जहाँ एक ओर मातम और सन्नाटा पसरा हुआ है वहीं राजनीति के गलियारे में सरगर्मी फैली हुई है । देखना यह है कि अब भी ये दल वक्त की नजाकत को समझते हैं या नहीं । वक्त जितना गुजरेगा जटिलताएँ उतनी ही बढ़ेंगी । इन जटिल परिस्थितियों से यथाशीघ्र बाहर आने का प्रयास जिम्मेदार दलों को करना ही होगा ।
बन्द करो यह खून की होली ।
जो रक्त बहा वह,
किसी गोरे या काले का नहीं था
बस एक इंसान का था ।
शव पर अट्टहास लगाने वाले
डरो उस असीम सत्ता से
क्योंकि एक दिन
तुम भी परिणत होगे शव में ।

 

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