कर्तव्य वह जिससे मानवता और नैतिकता हमेशा जिन्दा रहे : डॉ श्वेता दीप्ति

सम्पादकीय : हिमालिनी २०२० डिसेम्वर अंक | हमारी जिंदगी में सुख और दुःख दोनों लगे हुए रहते हैं, सुख के समय तो हम खुश रहते हंै लेकिन दुःख के समय यह हमें पहाड़ सा लगने लगता है और हम भगवान को इसका जिम्मेदार ठहराने लगते है । परन्तु दुःख या संकट हमारी जिंदगी के लिए आवश्यक है क्योंकि, ये हमें हमारे आगे की जिंदगी के लिए महत्वपूर्ण सबक दे कर जाते हैं ।
भगवद् गीता में यह बताया गया है कि मनुष्य अपने जीवन को किस तरह बेहतर ढंग से जी सकता है और अपनी हर परेशानियों पर विजय पा सकता है । हर एक पल हमें कुछ–न–कुछ सिखाता है । मनुष्य को उसकी जिंदगी में घटित हो रही हर एक छोटी–बड़ी घटना एक सीख देती है, जिससे हम चाहें तो आने वाले समय को सुधार सकते हैं । आवश्यकता सिर्फ मन की लगाम को सदैव अपने हाथों में रखने की है । यदि मनुष्य अपने मन को काबू रखे तो वह दुनिया में किसी भी असम्भव कार्य को सम्भव में परिवर्तित कर सकता है । हमें कर्तव्य करना चाहिए क्योंकि गीता में कर्तव्य को ही धर्म कहा गया है —
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।।
(द्वितीय अध्याय, श्लोक ४७)
कर्तव्य वह जो जनहित में हो, जिसमें सदाचार हो, जो खुशियाँ पैदा कर सके, जिससे मानवता और नैतिकता हमेशा जिन्दा रहे । २०२० अपने साथ ऐसे ही कई पलों को लेकर आया जब इंसान कई–कई बार टूटा और हताश हुआ । यह विपत्ति कई मायनों में इंसान की महत्त्वाकांक्षा का प्रतिफल थी क्योंकि हम अपनी इच्छाओं पर लगाम नहीं लगा रहे । सब कुछ जीत लेने की जिद में प्रकृति का दोहन कर रहे हैं ।
हमारा खाना–पीना, जीवन–दिनचर्या सब कुछ बदल गया और यह बदलाव कई बार हमारे लिए जानलेवा साबित होती आई है । परिवर्तन और विकास की ललक ने इंसान को इंसान नहीं रहने दिया है । यह गुजरता साल पाने से अधिक खोने का रहा । बावजूद इसके अगर हम अपनी सोच नहीं बदल पाए तो निःसन्देह आने वाला कल इससे भी अधिक विनाशकारी साबित होता ।
इसलिए इस नए वर्ष में आइए हम अपनी परम्पराओं, मूल्य और मान्यताओं की गम्भीरता को समझें और उसे अपनाएँ । इसके साथ ही हिमालिनी अपने तेईस साल के सफर को पूरा कर चौबीसवें पड़ाव की ओर कदम बढ़ा रही है । आप सुधीजनों, पाठकों, विज्ञापनदाताओं समस्त शुभेच्छुओं से पूर्व की भाँति ही सहयोग और साथ की अपेक्षा है । ‘हिमालिनी–परिवार’ की ओर से समस्त–जन को आने वाले नववर्ष की हार्दिक मंगलमय शुभकामनाएँ ।
श्वेता दीप्ति

