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विप्लव ! प्रम ओली किसी भी अवसर को हाथ से नहीं जाने देगें : डॉ श्वेता दीप्ति

 

 सचमुच यह समय आश्चर्यचकित होने का है

हिमालिनी, सम्पादकीय, मार्च २०२१ अंक । इन दिनों नेपाली जनता अप्रत्याशित रूप से सरकार द्वारा ‘सरप्राइज गिफ्ट’ पा रही है । पिछले दो–तीन महीनों से जनता रोज आश्चर्यचकित हो रही है । अनायास संसद का विघटन, चुनाव की घोषणा और उसके बाद प्रधानमंत्री का बिना साँस लिए लगातार रोज की यात्रा (जबकि कुछ महीने पहले ही वो संसद हाल तक आने में असक्षम नजर आते थे ।)

और फिर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक ऐतिहासिक निर्णय लेना, बावजूद इसके प्रधानमंत्री का अब तक सिहांसनरूढ़ होना, सब कुछ परे रखकर रोज किसी–ना–किसी परियोजनाओं का शिलान्यास करना और इसी बहाने विकास के किस्से सुनाकर विरोधियों को लपेटे में लेना यानि, सनसनी–ही –सनसनी । इसी सनसनी में एक और कड़ी जुड़ गई है ‘एकीकृत जनक्रांति’ के सर्वेसर्वा भूमिगत नेत्र बिक्रम चंद विप्लव का खुली राजनीति में आना । इसके साथ–ही–साथ रातो–रात एकीकृत जनक्रांति के सभी नेता कार्यकर्ताओं को हिरासत–मुक्त करने की घोषणा करना । है न सरप्राइज ही सरप्राइज ? कुछ समय पहले जब सरकार ने विप्लव समूह पर प्रतिबन्ध लगाया था तब भी जनता सकते में थी और आज जब खुली राजनीति में यह समूह आ रहा है तब भी जनता आश्चर्यचकित है । सचमुच यह दौर आश्चर्यचकित होने का ही है ।

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सशस्त्र युद्ध के समय विप्लव अनेरास्ववियु (क्रांतिकारी) के अध्यक्ष थे । स्वभाव से विद्रोही, जिद्दी और गुस्सैल विप्लव प्रचण्ड के काफी करीबी माने जाते थे । यहाँ तक कि उन्होंने प्रचण्ड की जान भी बचाई थी । किन्तु बाद में यह नजदीकी दूरियों में बदलती चली गई । जिसके कई कारण सामने आते रहे हैं । किन्तु देखना है कि अब क्या होगा ? विप्लव का रुझान किस पाले में होगा ? वैसे प्रचण्ड उनका खुले दिल से स्वागत करने को आतुर हैं परन्तु प्रधानमंत्री ओली किसी भी अवसर को हाथ से नहीं जाने देना चाहेंगे । खैर एक और विद्रोही समूह का खुली राजनीति में आना देश के लिए शुभ है क्योंकि, देश अब किसी और जनयुद्ध की कल्पना भी नहीं करना चाहता । पिछला दर्द ही अब तक घाव बना हुआ है ऐसे में अब खोने के लिए कुछ बाकी भी नहीं है और विपल्व समूह की राह हिंसात्मक आन्दोलन की ओर मुड़ चुकी थी, ऐसे में पर्दे के पीछे की वजह चाहे जो भी हो सरकार द्वारा किए गए इस निर्णय का जनता स्वागत जरूर करना चाहेगी ।

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इस आगाज का अंजाम चाहे जो भी हो फिलहाल हम अच्छे की उम्मीद ही करें । हिमालिनी का यह विशेष अंक विश्व की आधी आबादी को समर्पित है जो आज भी एक सकारात्मक परिवर्तन की प्रतीक्षा कर रही है । विश्व नारी दिवस २०२१ का थीम है ‘चुनौतियों को चुनो’ हाँ ! निःसंकोच निडरता के साथ आगे बढ़ो क्योंकि तुम जननी हो, उतार फेको खुद के ऊपर से अबला का लिबास क्योंकि तुम शक्ति हो, सबला हो ।

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डॉ.श्वेता दीप्ति,
सम्पादक-हिमालिनी

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