Sat. Sep 26th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

मन्त्री फेरबदल की अटकलों के बीच राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के पदाधिकारियों में किसकी चर्चा ?

 

काठमांडू, १७ असार २०८३ (१ जुलाई २०२६)। राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के चितवन में संपन्न प्रथम राष्ट्रीय महाधिवेशन ने पार्टी के भीतर एकता के बजाय संशय की स्थिति पैदा कर दी है। असार (७-१२) में संपन्न इस महाधिवेशन में सर्वसम्मति से नेतृत्व चुनने के प्रयास विफल होने के बाद चुनावी प्रतिस्पर्धा हुई।

महाधिवेशन में केंद्रीय समिति सदस्यों के निर्वाचन में समायोजन प्रक्रिया से आए उम्मीदवारों को अत्यधिक मत मिलने के बाद पदाधिकारी पदों के लिए आकांक्षियों की संख्या अचानक बढ़ गई। हालांकि, सभापति पद के लिए बालेन के प्रस्ताव पर रवि लामिछाने सर्वसम्मति से निर्वाचित हुए। वरिष्ठ नेता के रूप में बालेन का बने रहना लगभग तय है, उन्हीं के लिए विधान में वरिष्ठ नेता का प्रावधान किया गया है।

पदाधिकारी चुनाव के परिणाम

दो उपसभापति, एक महामंत्री और तीन सह-महामंत्री कुल ६ पदों के लिए २६ उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था।

उपसभापति पद:

· पुरुष उपसभापति: डॉ. स्वर्णिम वाग्ले निर्विरोध निर्वाचित
· महिला उपसभापति: कानूनमंत्री सोविता गौतम ने समीक्षा बास्कोटा और डॉ. तोसिमा कार्की को हराया

महामंत्री पद: विपिन आचार्य विजयी रहे। उनके खिलाफ कई उम्मीदवार थे, लेकिन अंतिम समय में शिशिर खनाल, कवीन्द्र बुर्लाकोटी, गणेश पराजुली, रञ्जु दर्शना और प्रमोद न्यौपाने ने अपना नामांकन वापस लेकर आचार्य का समर्थन किया।

यह भी पढें   प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के भारत दौरे की कूटनीतिक तैयारी तेज, मंसिर के पहले सप्ताह जा सकते हैं नई दिल्ली

सह-महामंत्री पद:

· खुला: हरि ढकाल और असिम शाह निर्वाचित
· महिला: निशा डाँगी निर्वाचित

सहमति के प्रयास और आंतरिक खींचतान

सभापति रवि ने ११ असार की रात मतदान स्थल पर रहकर सर्वसम्मति से नेतृत्व चुनने का प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हुए। सहमति न बनने पर निर्वाचन आयोग ने चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ाई। महामंत्री पद के लिए संस्थापक सदस्यों के बीच प्रतिस्पर्धा होती देख मनिष झा अपनी जीत को लेकर आश्वस्त दिख रहे थे।

गणेश पराजुली ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी भी पद के लिए सौदेबाजी नहीं की। उन्होंने कहा, “साझा सहमति और पार्टी के दीर्घकालिक हित को ध्यान में रखते हुए मैंने राजनीतिक परिपक्वता दिखाई है। यह रणनीतिक त्याग इतिहास में सदैव याद रखा जाएगा। मुझे किसी ने उपनेता या उद्योग मंत्री बनाने का प्रस्ताव नहीं दिया है।”

वहीं कवीन्द्र बुर्लाकोटी ने महाधिवेशन के दौरान कुछ साथियों पर पार्टी निर्माण के बजाय त्याग के बदले में पद पाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “कुछ साथी पार्टी निर्माण से अधिक त्याग के बदले क्या पद पाऊंगा, ऐसी बातें कर रहे थे।”

यह भी पढें   रेखा यादव ‘निर्झर’ की कहानी संग्रह ‘प्रश्न ‘? का लोकार्पण

मंत्रिमंडल फेरबदल की संभावना

सूत्रों के अनुसार, बालेन सरकार के कार्यप्रदर्शन में कमजोर दिखे कुछ मंत्रियों को वापस बुलाकर उम्मीदवारी वापस लेने वाले नेताओं को समायोजित करने की तैयारी है। महाधिवेशन से पहले ही स्वास्थ्यमंत्री निशा मेहता, महिला, बालबालिका तथा ज्येष्ठ नागरिक मंत्री सीता वादी, सूचना एवं संचार मंत्री डॉ. विक्रम तिमिल्सिना, कृषि, वन एवं पर्यावरण मंत्री गीता चौधरी और उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्री गौरी कुमारी को हटाने की चर्चा थी। हालांकि, प्रधानमंत्री के प्रेस सलाहकार दीपा दाहाल ने मंत्री फेरबदल को निश्चित नहीं बताया।

मनोनीत पदों में किसकी दावेदारी

पार्टी विधान के अनुसार, सभापति को ५१ सदस्य मनोनीत करने का अधिकार है। इसमें एक वरिष्ठ नेता, एक उपसभापति, एक महामंत्री, दो सह-महामंत्री, एक प्रवक्ता, तीन सह-प्रवक्ता, एक कोषाध्यक्ष और दो सह-कोषाध्यक्ष शामिल हैं।

संभावित मनोनीत पदाधिकारियों में:

· वरिष्ठ नेता: बालेन (लगभग निश्चित)
· उपसभापति: भौतिक पूर्वाधार मंत्री सुनिल लम्साल
· महामंत्री: भूपदेव शाह
· प्रवक्ता: कवीन्द्र बुर्लाकोटी (मनिष झा के इंकार के बाद), हालांकि प्रमोद न्यौपाने भी दावेदार हैं
· सह-महामंत्री: थारू समुदाय से लक्ष्मण थारू और दलित समुदाय से खगेन्द्र सुनार
· कोषाध्यक्ष: पद पर लिमा अधिकारी के दोहराने की इच्छा नहीं होने के कारण नए चेहरे की संभावना

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 26 सितंबर 2026 शनिवार

आगे का कार्यक्रम

रास्वपा के नवनिर्वाचित केंद्रीय सदस्यों और पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण केंद्रीय कार्यालय वनस्थली में होगा। गणेश पराजुली ने बताया कि शपथ ग्रहण के बाद केंद्रीय समिति की पहली बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें मनोनीत सदस्यों के बारे में निर्णय लिया जाएगा।

महाधिवेशन के बाद रास्वपा के भीतर गुटबाजी और पदों के लिए होड़ की चर्चाएं जारी हैं, लेकिन नेतृत्व का दावा है कि पार्टी एकता और दीर्घकालिक हित को प्राथमिकता दी जा रही है। आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल विस्तार और मनोनीत पदों की घोषणा से पार्टी की आंतरिक राजनीति में और स्पष्टता आएगी।

रिपोर्ट, साभार: गणेश पाण्डे, वरिष्ठ संवाददाता, रातोपाटी

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com