ख्याति प्राप्त कवियों सीता की प्राकट्य स्थल पुनौरा धाम व पंथ पाकर धाम का किया दर्शन
जनकपुरधाम/नेपाल। देश के विभिन्न राज्यों से आए 16 कवियों के दल ने डॉ. भावना के नेतृत्व में जगत जननी माता सीता की जन्मस्थली पुनौरा धाम एवं ऐतिहासिक पंथ पाकर धाम का दर्शन किया। इस अवसर पर सीता संवाद आध्यात्मिक एवं साहित्यिक यात्रा के निदेशक आग्नेय कुमार ने पंचतीर्थ दर्शन पुस्तिका भेंट कर सभी का स्वागत किया। साहित्यकार विमल कुमार परिमल ने सीता जन्मभूमि के पंचतीर्थ एवं पंथ पाकर धाम के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वाल्मीकि रामायण के अनुसार यहीं भगवान श्रीराम और भगवान परशुराम का ऐतिहासिक मिलन हुआ था। पंथ पाकर धाम के महंत राम रेखा दास ने पाकर वृक्ष, नागपुष्प एवं सीता कुंड की महिमा बताते हुए इसे शांति और प्रेम का प्रतीक कहा। कवि अनिल कुमार झा ने अपनी पुस्तक हे राम से तुलसी पदावली तथा मिथिला की सनेश भार यात्रा पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। बेंगलुरु की कवयित्री गरिमा सक्सेना ने जनकपुर आए हैं रघुवर गीत प्रस्तुत किया, जबकि डॉ. भावना एवं उनकी टीम ने घूमती फिर रही जिस गली जानकी… गीत के माध्यम से नारी चेतना, संघर्ष और मर्यादा का प्रभावशाली चित्रण किया। इस साहित्यिक यात्रा में विज्ञान व्रत (नोएडा), अनिरुद्ध सिन्हा, दिनेश प्रभात, हरिनारायण सिंह हरि, गरिमा सक्सेना, कविता विकास, डॉ. अमर पंकज, राहुल शिवाय, रामनाथ बेखबर, डॉ. संजय पंकज, डॉ. भावना, नीता सक्सेना, रश्मि सक्सेना सहित अनेक कवि उपस्थित रहे। अंत में पंथ पाकर निवासी उपेंद्र सिंह ने सभी कवियों को सीता जन्मभूमि का प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।


