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बड़े बेआबरू हो कर, तेरे कूचे से हम निकले : डा श्वेता दीप्ति

 

काठमांडू , हिमालिनी फ़रवरी अंक सम्पादकीय | राष्ट्रधर्म सभी धर्मों से सर्वोच्च होता है और राष्ट्र की सर्वोच्च इकाई देश की न्याय व्यवस्था होती है । जिसकी अवमानना राष्ट्रद्रोह माना जाता है । किन्तु, जब न्याय व्यवस्था, न्यायालय या न्यायाधिकारियों पर सवाल उठने लगे और उसे ही कटघरे में खड़ा होने की नौबत आ जाए तो निःसन्देह यह अवस्था किसी भी राष्ट्र को शर्मशार करती है ।

२०१७ में सुशीला कार्की पर महाभियोग लगा और अब चोलेन्द्र शमशेर राणा । गौर करने वाली बात ये है कि जिस चीफ जस्टिस के फैसले से नेपाल में गठबन्धन की सरकार बनी थी और शेर बहादुर देउवा प्रधानमंत्री बने थे उसी गठबन्धन दलों ने मुख्य न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर जेबी राणा के खिलाफ संसद सचिवालय में महाभियोग प्रस्ताव दर्ज कराया है । उनपर कई गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद ये कदम उठाया गया है ।  नेपाली कांग्रेस और उसके गठबंधन सहयोगियों के सांसदों ने संसद सचिवालय में राणा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव दर्ज किया है । प्रस्ताव में करीब १०० सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं ।

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सीजे के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को लेकर काफी समय से मांग की जा रही थ ।.मुख्य न्यायाधीश राणा पर आचार संहिता का उल्लंघन करने, उच्चतम न्यायालय में न्यायिक माहौल बनाए रखने में विफल रहने और नैतिक आधार नहीं अपनाए जाने सहित तमाम आरोप लगे हैं । जिसके चलते उनके खिलाफ ये कदम उठाया गया है । नेपाल के संविधान के अनुच्छेद १०१ (२) में कहा गया है कि संसद के एक चौथाई सदस्य संवैधानिक पद पर आसीन किसी भी व्यक्ति के खिलाफ इस आधार पर महाभियोग प्रस्ताव दर्ज कर सकते हैं कि वह अपने कर्तव्य को प्रभावी ढंग से नहीं निभा रहा है या संविधान के खिलाफ काम कर रहा है या गंभीरता से उसकी आचार संहिता का उल्लंघन कर रहा है । एक चौथाई सांसद महाभियोग प्रस्ताव को पंजीकृत कर सकते हैं, लेकिन इसे समर्थन देने के लिए संसद के दो–तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है ।

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प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए मुख्य विपक्षी सीपीएन–यूएमएल का समर्थन जरूरी है, क्योंकि जिन दलों ने प्रस्ताव दायर किया है उनके पास कुल १३३ वोट हैं । २७१  में से प्रस्ताव को पारित करने के लिए १८१ मतों की आवश्यकता है । वैसे महाभियोग के साथ ही राणा पद से निलम्बित हो चुके हैं ।

वर्तमान समय में देश की राजनीति अमेरिकी परियोजना एमसीसी को लेकर तरंगित है । सत्तारूढ गठबन्धन में टकराव की अवस्था आ गई है और गठबन्धन टूटने के कगार पर पहुंच गया है ।

लेकिन रातों रात बदली हुई राजनीतिक घटनाक्रम में सत्तारूढ गठबन्धन के सांसदों ने संयुक्त रूप से महाभियोग दर्ज करा दिया । यह महज संयोग है, या इसके पीछे कोई गूढ़ राज है, यह भी जल्द ही सामने आ जाएगा । फिलहाल वर्तमान राजनीति कई उथल–पुथल की अवस्था से गुजर रही है, इस अवस्था में यह भी कयास लगाया जा रहा है कि घोषित चुनाव निर्धारित समय पर होने की सम्भावना कम ही है । फिर भी दल और नेताओं ने जोर लगाना शुरु कर ही दिया है । वही चेहरे, वही नीतियाँ, वही लोलुपता और जनता तमाशबीन । बस देखते जाइए कि आगे–आगे होता है क्या, वैसे नया कुछ होने की सम्भावना तो बिल्कुल नहीं है ।

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