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विश्व हिन्दी दिवस विशेष : नेपाल में हिन्दी पत्रकारिता का इतिहास : डॉ श्वेता दीप्ति

10 जनवरी

डा श्वेता दीप्ति
सन् १८२६ में नेपाल में युवा कवि मोतीराम भट्ट के सहयोग से बनारस प्रवास काल में रामकृष्ण वर्मा के सम्पादन में प्रथम नेपाली मासिक ‘‘गोरखा भारत जीवन’’ पत्रिका का प्रकाशन हुआ था और नेपाल की राजधानी काठमाण्डु में पं. मोतीकृष्ण नरदेव शर्मा द्वारा १८२६ में निजी स्तर के प्रेस की स्थापना के पांच वर्ष बाद सन् १८९८ की जुलाई (१९५५ साल श्रावण) से उन्होंने प्रथम नेपाली मासिक “सुधा सागर” का प्रकाशन आरंभ किया था । उसके ३ वर्ष बाद ही नेपाल में सरकारी स्तर पर सन् १९०१ की मई ७, (२४ बैशाख,१९५८) से गोरखापत्र साप्ताहिक का प्रकाशन आरंभ हुआ था जो क्रमशः अर्द्‌ध साप्ताहिक और सप्ताह में तीन बार होते हुए साढे तीन दशक पूर्व १८ फरवरी १९६९ (२०१७ फाल्गुन ७ गते) से नेपाल का सर्वश्रेष्ठ नेपाली दैनिक के रूप में सरकारी प्रकाशन है फिर भी पचास हजार से अधिक प्रतियां नहीं छप रही है ।
नेपाल में एकतंत्रीय राणा शासन की समाप्ति के लिए सन् १९४७ की जनवरी २६ को कलकत्ता में नेपाली कांग्रेस की स्थापना विश्वेश्वरप्रसाद कोईराला, डॉ. डिल्लीरमण रेग्मी, महेन्द्र विक्रम शाह, महावीर शमसेर आदि द्वारा किया गया और नेपाली कांग्रेस का मुख पत्र “नेपाल पुकार” नेपाली साप्ताहिक वी. लाल मोक्तायन के सम्पादन में पहले कलकत्ता से और फिर १९४९ की दिसम्बर में पटना से हिन्दी साप्ताहिक के रूप में प्रकाशित कर सन् १९५० की जनक्रान्ति के लिए नेपाल में जन जागरण लाने का काम किया गया । उधर बनारस में रह गये नेपालियों द्वारा ‘युगवाणी’ नेपाली साप्ताहिक का प्रकाशन १९४८ की जनवरी २६ से लक्ष्मी प्रसाद देवकोटा, बालचन्द्र शर्मा, कृष्ण प्रसाद उपाध्याय (भट्टराई), नारायण प्रसाद उपाध्याय के संयुक्त सम्पादकत्व में किया गया, जो नेपाली जनक्रान्ति का एक कारक तत्व साबित हुआ ।
उसी समय १८५० के अगस्त में बनारस से बालचन्द्र शर्मा के सम्पादन में नेपाल का प्रथम हिन्दी साप्ताहिक “नव नेपाल” का प्रकाशन किया गया जो सन् पचास की नम्वबर क्रान्ति में आग उगलने का काम किया । नवबंर क्रान्ति सफल हो जाने पर १८ फरवरी १९५१ को एकतंत्रीय राणा शासन की समाप्ति के बाद नेपाल में प्रजातंत्र की स्थापना हुई फिर प्रवास से प्रकाशित पत्र–पत्रिकाओं का स्थान देश के भीतर से प्रकाशित पत्र–पत्रिकाओं ने ले लिया । उसी क्रम में काठमाण्डू से १५ फरवरी १९५१ जिस दिन साढ़े तीन महिनों के दिल्ली निर्वासन के बाद राजा त्रिभुवन सपरिवार युवराज महेन्द्र और तत्कालीन राजा वीरेन्द्र के साथ स्वदेश लौटे थे, हृदय चन्द्र सिंह प्रधान के सम्पादन में जनस्तर का प्रथम नेपाली साप्ताहिक “जागरण” का प्रकाशन और प्रजातंत्र घोषणा के दूसरे दिन १९ फरवरी १९५१ से नेपाल का प्रथम नेपाली दैनिक “आवाज” का प्रकाशन कविवर सिद्धिचरण श्रेष्ठ के सम्पादन में हुआ था ।
हिन्दी पत्रकारिता में नेपाल से प्रकाशित पत्रों का भी उल्लेखनीय स्थान है । नेपाल की राजधानी काठमांडू से “नेपाल” शीर्षक से एक हिन्दी पत्र प्रकाशित होता था । ज्ञातव्य है कि यह पत्र दैनिक रूप में प्रकाशित होने वाला एक विशिष्ट पत्र था । काठमांडू से ही प्रकाशित जो अन्य पत्र उल्लेखनीय है उनमें “हीमोवत संस्कृत” पत्र भी है । इसी प्रकार “हिमालय” शीर्षक से भी एक पत्र बीरगंज से प्रकाशित हुआ था । इसी क्रम में ‘नव नेपाल’ शीर्षक से एक साप्ताहिक पत्र काठमांडू (नेपाल) से प्रकाशित हुआ । इसके सम्पादक मणिराज उपाध्यक्ष थे । इसका प्रकाशन १९५५ से आरम्भ हुआ था ।
नेपाल में हिन्दी पत्रकारिता का इतिहास बहुत पुराना नहीं हैं फिर भी नेपाल के प्रजातांत्रिक इतिहास से जुड़ी हुई है । भारत में प्रथम हिन्दी साप्ताहिक कलकत्ता से पं० युगल किशोर शुक्ल के सम्पादन में ३० मई, १८२६ में प्रकाशित हुआ था और उसके पाँच वर्ष बाद कलकत्ता से ही १८ जनवरी १८३१ को श्याम सुन्दर सेन के संपादन में हिन्दी का प्रथम दैनिक प्रकाशित हुआ था । नेपाल और भारत दो निकटतम पड़ोसी ही नहीं बल्कि एक दूसरे के अभाव में अस्तित्वहीन है । यही कारण है कि नेपाल का न सिर्फ हिन्दी पत्रकारिता बल्कि नेपाली पत्रकारिता का शुभारंभ भी बनारस में हुआ था ।
नेपाली के भीतर हिन्दी पत्रकारिता का आरंभ प्रजातंत्र स्थापना के बाद सन् १९५१ की जुलाई ३ (१५ श्रावण २००८) से राजधानी काठमाण्डू मे भोजराज सिंह न्यौपाने के सम्पादन में तरंग साप्ताहिक के साथ हुआ । उसके अगले वर्ष २६ मई से जनकपुरधाम से ‘सात दिन’ साप्ताहिक गिरीन्द्र मोहन भट्टा के सम्पादन में और फिर १५ अक्टूबर से युगेश्वर प्रसाद वर्मा और बद्री परासर मिश्र के सम्पादन तथा रामस्वरूप प्रसाद बी.ए. के प्रकाशनत्व में ‘मुक्त नेपाल’ साप्ताहिक का प्रकाश हुआ था ।
उन दिनों सम्पूर्ण नेपाल तराई का सम्पर्क स्थल पटना होने के कारण वहाँ से २३ अक्टूबर १८५२ में ‘नया नेपाल’ साप्ताहिक जन कांग्रेस के मुख पत्र के रूप में अयोध्या प्रसाद के सम्पादन मे प्रकाशित हुआ । प्रजातंत्र पूर्व बनारस से प्रकाशित ‘नव नेपाल’ साप्ताहिक बाद में राजधानी काठमाण्डू से गणेश प्रसाद शर्मा के सम्पादन में १ नवम्बर १९५२ से और २४ अप्रैल १९५३ से मणिराज उपाध्याय के सम्पादन में ‘सही रास्ता’ साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ हुआ । इसी तरह २० जुलाई १९५५ से कैलाशपति बी. ए. के सम्पादन में ‘नया जमाना’ साप्ताहिक प्रकाशित हुआ । किन्तु सभी बाद में सभी बन्द होते चले गये ।
नेपाल से प्रथम हिन्दी दैनिक ‘जय नेपाल’ का प्रकाशन काठमाण्डू से २४ जुलाई १९५५ से इन्द्रचन्द्र जैन के सम्पादन में हुआ उसके कुछ ही महीनों के बाद १५जनवरी १९५३ से राम सिंह के सम्पादन में वहीं से दूसरे दैनिक ‘नेपाल टाइम्स’ का प्रकाशन हुआ और २० दिसम्बर १९५८ से उमाकान्त दास के सम्पादन में ‘नेपाली’ नाम से तीसरे हिन्दी दैनिक का प्रकाशन काण्डमाडू में हुआ । प्रथम दैनिक का प्रकाशन बन्द हो गया और दूसरे दैनिक नेपाल टाइम्स का प्रकाशन भी परिवर्तित परिस्थिति (प्रजातंत्र खत्म किए जाने के बाद) में बन्द हो जाने पर १ जून १९६४ से अंग्रेजी में और दो वर्ष बाद १९६६ की सितम्बर २० से चन्द्रलाल झा के सम्पादन में नेपाली में) प्रकाशन होकर ख्याति प्राप्त करता रहा किन्तु अब यह भी बन्द हो चुका है । राजधानी काठमाण्डू के बाहर जनकपुरधाम से ‘सात दिन’ और ‘मुक्त् नेपाल’ साप्ताहिक के प्रकाशन के साथ ही विराटनगर से लक्ष्मण शास्त्री के सम्पादन में ‘आर्दशवाणी’ नेपाली/हिन्दी मासिक १९५२ की अगस्त (श्रावण से कार्तिक तक) से नवम्बर तक चार अंक प्रकाशित हुआ था । उसी समय वीरगंज से कृष्ण प्रसाद मानंधर के सम्पादन में ‘नया नेपाल’ त्रैमासिक का प्रकाशन हुआ था, जिसका तीसरा अंक २० जनवरी १९५३ को प्रकाशित हुआ था । विराटनगर से नवम्बर १९५५ में आनन्द लाल श्रेष्ठ के सम्पादन में ‘ज्योति नेपाली’, हिन्दी मासिक प्रकाशन हुआ था । काठमाडू में नेपाली, नेवारी, हिन्दी और अंग्रेजी चतुर्भाशिक पाक्षिक कमर्स १७ सितम्बर १९५८ को प्रकाशित हुआ । किन्तु, उससे तीन महीने पूर्व वहीं से केशवराम जोशी के सम्पादन में ‘ज्ञान विकास’ चतुर्भाषिक मासिक १२ जून से प्रकाशित होना शुरु हुआ था ।
नेपालगंज से १९५५ में स्व. महावीर प्रसाद गुप्ता के सम्पादन में ‘नया संदेश’ मासिक का प्रकाशन हुआ और विराटनगर से रद्युनाथ ठाकुर के सम्पादन में १९५७ के दिसम्बर १६ को ‘राजहंस’ साप्ताहिक प्रकाशित हुआ । साहित्यिक पत्र–पत्रिकाओं में जनकपुरधाम से हिन्दी, नेपाली और मैथिली का त्रैमासिक नवोनाथ झा के सम्पादन में अप्रैल १९५७ में छपा था । परन्तु, दूसरा अंक नहीं छप सका । आनन्द कुटी विद्यापीठ का मुखपत्र ‘आनन्द’, ‘नेपाली’, तिवारी, हिन्दी और अंग्रेजी त्रैमासिक नवम्बर १९६१ में छपा था । काठमाडू से ‘नया समाज’ साप्ताहिक शिवहर सिंह प्रधान पागल के सम्पादन में जून १९६२ में प्रकाशित हुआ था । सन् १९६० दिसम्बर १६ में प्रजातन्त्र की हत्या से पूर्व नेपाल में हिन्दी दूसरी भाषा के रूप में मान्यता प्राप्त रहने से हिन्दी पत्रों के साथ ही पत्रिकाओं के भी विकास हुए । इस क्रम में प्रथमतः काठमाडू से ‘कारवां’ मासिक और फिर श्री अटेर के सम्पादन में हिन्दी नेपाली मासिक पिटारी हस्तलिखित १९५४ अप्रैल में प्रकाशित किया गया था ।
काठमाडू से ‘लोकमंच’ साप्ताहिक युगेश्वर प्रसाद वर्मा के सम्पादन में २० अक्टूबर १९५८ से प्रकाशित हुआ । उसके बाद ही सत्यनारायण झा के सम्पादन में नेपाल प्रजापरिषद् का मुखपत्र ‘जनवाणी’ साप्ताहिक उसी वर्ष २० नवम्बर से प्रकाशित हुआ था । किन्तु ये दोनों भी कुछ ही अंकों के बाद बन्द हो गए । आनन्द प्रसाद पाठक के सम्पादन मे प्रकाशित ‘अग्रदूत’ साप्ताहिक का प्रकाशन भी १९६१ जुलाई ३० को बंद कर दिया गया । उसी अवधि में अखिल नेपाल किसान संध द्वारा किसान बुलेटिन और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा ‘जनमत’ साप्ताहिक प्रकाशित किया गया था ।
नेपालगंज से योगेश्वर मिश्र के सम्पादन में १८ फरवरी १९६० (२०१६ फाल्गुण ७) में ‘मातृभूमि’ साप्ताहिक तथा उसी वर्ष वहीं से महावीर प्रसाद गुप्ता और इन्द्रमणि मानव के संयुक्त सम्पादन में प्रकाशित हो रहे मासिक ‘अनुराधा’ पत्रिका जो निकटवर्ती भारतीय क्षेत्रों में भी ख्याति प्राप्त था को १६ दिसम्बर से प्रजातंत्र की हत्या के बाद बन्द कर दिया गया ।
जनकपुर धाम से प्रकाशित ‘लोकमत’ नियमित साप्ताहिक है और तराई के सभी जिलों में पहुंचती है । इसके सम्पादक हिन्दी के योद्धा राजेश्वर नेपाली हैं । इसके साथ ही राजधानी काठमान्डू से शुकेश्वर पाठक के सम्पादन मे ‘विश्लेषण’ और वीरगंज से गणेश साह के सम्पादन में ‘सन्डे टाइम्स’ दोनो साप्ताहिक प्रकाशित होते थे । सन् १९५२ में ‘मुक्त नेपाल’ जो जलेश्वर से साप्ताहिक प्रकाशित होता था जिसका सम्पादन रामस्वरूप प्रसाद किया करते थे किन्तु, वह भी वर्तमान में बंद हो चुका है ।
प्रजातंत्र पुनर्स्थापना के बाद सन् १९९० की दिसम्बर से ‘नव नेपाल’ मासिक का प्रकाशन डॉ कृष्णचन्द्र मिश्र के सम्पादन में आरम्भ हुआ था । किन्तु चार अंक प्रकाशन के बाद यह भी बन्द हो गया । उसी तरह गजेन्द्र प्रसाद सिंह के सम्पादन में प्रकाशित ‘इंकलाब’ साप्ताहिक जो कुछ ही अंकों के बाद बन्द हो गया था वह पुनः नमिता सिंह के सम्पादन में मासिक रूप में प्रकाशित होना शुरु हुआ बाद में वह फिर से बंद हो गया । वर्तमान में ‘हिमालिनी’ एक ऐसी मासिक हिन्दी पत्रिका है जो निरंतर पचीस वर्षों से प्रकाशित हो रही है । हिमालिनी की शुरुआत साहित्यिक पत्रिका के रुप में हुई थी किन्तु वक्त और हालात के साथ इसके तेवर बदले और आज यह विविधता के साथ एक सम्पूर्ण मासिक पत्रिका के रूप में प्रककाशित हो रही है । राजनीति, साहित्य, समाज, संस्कृति, अध्यात्म, स्वास्थ्य इनसे जुड़ी समग्र जानकारी हिमालिनी में शामिल होती है । नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र और भारत के बिहार और उत्तरप्रदेश में हिमालिनी के पाठक हैं । इसका ऑनलाइन संस्करण भी सजग पाठकों के लिए हाजिर है जो रोज की खबर पाठकों के समक्ष लाती है ।
हिमालिनी का प्रकाशन डॉ. कृष्णचन्द्र मिश्र अकादमी और नेपाल हिन्दी साहित्य कला संगम के सहयोग से प्रारम्भ हुआ । विगत में भी कई हिन्दी पत्रिकाएँ प्रकाशित हुईं पर सफल नहीं हो पाई । वजह चाहे जो भी हो पर इनकी असफलता के पीछे हिन्दी भाषा को लेकर नेपाल का प्रतिकूल परिदृश्य अवश्य था । हिमालिनी का प्रथम अंक १९९८ जनवरी में प्रकाशित हुआ । सफर की शुरुआत त्रैमासिक साहित्यिक–सांस्कृतिक पत्रिका के रूप में हुई । समय की माँग थी कि नेपाल की राजनीति को जन–जन तक पहँुचाया जाय और जनता अपने अधिकार और अस्तित्व से रुबरु हो सके । इस महत् कार्य के लिए हिमालिनी ने अपना स्वरूप बदला और २००६ से राजनीति इसका विशेष आधार बन गया ।
हिन्दी पत्रिका प्रकाशन के क्रम में काठमान्डु से प्रकाशित समसामयिक पत्रिका ‘द पब्लिक’ का नाम भी आता है जो विगत कई वर्षों से प्रकाशित हो रही है । इसी तरह ‘द पोपुलर टाइम्स’ और ‘अभ्युत्थान’ नामक हिन्दी पत्रिका की भी शुरुआत हुई किन्तु कुछ माह प्रकाशन के बाद यह भी बंद हो गई । भारतीय दूतावास से प्रकाशित होने वाली ‘विविध भारत’ भी पिछले कई सालों से बंद हो चुकी है । वर्तमान में आनलाइन हिन्दी पत्रिकाओं में ‘हिमालिनी’ के अतिरिक्त रातोपाटी और अक्षरंग वेवपत्रिका चल रही है ।

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