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संसद का चिर हरण, राष्ट्रपति मौन : विजयकुमार पांडे का बालेंन शाह पर बड़ा हमला

 
साभार, हेलो समाज

काठमांडू, 12 अप्रैल । वरिष्ठ पत्रकार विजय कुमार पाण्डे ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के संसद में हालिया व्यवहार पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादा और संसदीय गरिमा पर हमला बताया है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि यदि संविधान की रक्षा करनी है, तो राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल को या तो प्रधानमंत्री को सार्वजनिक रूप से सचेत करना चाहिए या फिर अपने पद से इस्तीफा देकर राष्ट्रपति पद की गरिमा बचानी चाहिए।

सोमवार को सोशल मीडिया पर जारी एक कड़े वक्तव्य में विजय कुमार पाण्डे ने लिखा कि राष्ट्रपति की उपस्थिति में प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने संसद में जिस प्रकार का व्यवहार किया, वह केवल संसद का ही नहीं बल्कि पूरे संवैधानिक ढाँचे का अपमान है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति, जो संविधान के संरक्षक माने जाते हैं, यदि ऐसी घटनाओं पर भी मौन रहते हैं तो यह संस्था की गरिमा पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

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पाण्डे ने संसद संचालन को लेकर सभामुख डीपी अर्याल की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि इतनी बड़ी घटना के बाद क्या सभामुख अगले दिन भी ऐसे ही सदन चलाएंगे मानो कुछ हुआ ही न हो, या फिर वे कोई सख्त रूलिंग देंगे। साथ ही उन्होंने नेपाली कांग्रेस के नेता गगन थापा और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) समेत अन्य दलों पर भी कटाक्ष करते हुए आरोप लगाया कि वे सत्ता और राजनीतिक सुविधा के कारण चुप बैठे हैं।

अपने वक्तव्य में पाण्डे ने राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी की आंतरिक स्थिति पर भी व्यंग्य किया। उन्होंने कहा कि अब यह पार्टी केवल “एक व्यक्ति की पार्टी” बनकर रह गई है। उनके अनुसार पार्टी में वास्तविक रूप से केवल दो ही “स्वतंत्र” लोग दिखाई देते हैं — रवि लामिछाने और पार्टी से भी ऊपर खड़े दिखाई देने वाले बालेन्द्र शाह। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब तो ऐसा लगने लगा है कि पार्टी में सिर्फ एक ही सांसद बचा है, जो स्वयं को राष्ट्रपति से भी ऊपर समझता है।

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विजय कुमार पाण्डे ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने अपने व्यवहार से बाकी राजनीतिक दलों और नेताओं का असली चेहरा जनता के सामने ला दिया है। उन्होंने विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों को “कायर, लालची, सिद्धांतहीन और अवसरवादी” बताते हुए कहा कि शायद यही नेपाल की राजनीति और संसद की वास्तविक स्थिति बन चुकी है।

अपने बयान के अंत में उन्होंने संसद की मौजूदा स्थिति की तुलना “चीरहरण” से करते हुए बेहद भावुक और आक्रामक टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि “एक संसद भवन कुछ दिन पहले जलकर खत्म हुआ था, और आज दूसरी संसद का चीरहरण हो गया।” साथ ही उन्होंने रवि लामिछाने को भी तंज भरे अंदाज़ में बधाई देते हुए कहा कि अब वे “सिर्फ एक सांसद वाली पार्टी” के सभापति बनकर रह गए हैं।

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विजय कुमार पाण्डे की यह टिप्पणी नेपाल की राजनीति में बढ़ते टकराव, संसदीय मर्यादा पर उठते सवालों और प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की शैली को लेकर चल रही बहस को और तेज कर सकती है।

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