नेपाल में खाद्य तेल और वनस्पति घी की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी
2 months ago
काठमांडू।
नए आर्थिक वर्ष की शुरुआत के साथ ही नेपाल में खाद्य तेल और वनस्पति घी की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले दो सप्ताह में ही खाद्य तेलों के दाम प्रति लीटर 5 से 15 रुपये तक बढ़ गए हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं की रसोई का बजट बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पिछले एक वर्ष में विभिन्न खाद्य तेलों की कीमतों में 40 से 50 रुपये प्रति लीटर तथा वनस्पति (डालडा) घी में 30 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि हुई है।
नेपाल खुद्रा व्यापार संघ के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष 15 सावन को भुना हुआ सरसों का तेल 410 रुपये प्रति लीटर था, जो अब बढ़कर 460 रुपये हो गया है। इसी तरह प्रथम श्रेणी का कच्चा सरसों तेल 335 से बढ़कर 380 रुपये, द्वितीय श्रेणी का कच्चा सरसों तेल 250 से 290 रुपये, सनफ्लावर तेल 245 से 290 रुपये, सोयाबीन तेल 245 से 285 रुपये और वनस्पति घी 250 से 280 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है।
15 दिनों में भी तेज़ बढ़ोतरी
केवल एक वर्ष ही नहीं, बल्कि सावन की पहली 15 दिनों में भी तेल और घी के दाम तेजी से बढ़े हैं। सोयाबीन तेल 280 से 285 रुपये, सनफ्लावर तेल 285 से 290 रुपये और वनस्पति घी 265 से 280 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
हालांकि उपभोक्ताओं को ये उत्पाद सरकारी सूची वाले दाम पर नहीं मिल रहे हैं। बाजार में अलग-अलग ब्रांड के अनुसार एक लीटर सनफ्लावर और सोयाबीन तेल 300 से 320 रुपये तक में बिक रहा है। खुदरा व्यापारियों का दावा है कि उन्हें एक कार्टन तेल 2,850 रुपये तक में खरीदना पड़ रहा है।
खुदरा व्यापारियों ने उद्योगों पर लगाए आरोप
नेपाल खुद्रा व्यापार संघ के महासचिव अमूलकाजी तुलाधर ने आरोप लगाया कि कीमतों में वृद्धि के पीछे बड़े उद्योगपति और आयातक जिम्मेदार हैं।
उनका कहना है कि उद्योगपति कभी कच्चे माल की कीमत, कभी डॉलर की विनिमय दर और कभी परिवहन खर्च बढ़ने का हवाला देकर बार-बार दाम बढ़ा देते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कई महीनों का पुराना स्टॉक गोदाम में रखा होता है, तो उसकी कीमत अचानक अगले ही दिन कैसे बढ़ जाती है।
तुलाधर ने कहा कि उपभोक्ता सबसे पहले मोहल्ले के खुदरा दुकानदार को दोष देते हैं, जबकि उन्हें यह भी पता नहीं होता कि फैक्ट्री ने किस आधार पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) तय किया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उद्योगपति बड़ी मात्रा में खाद्य तेल भारत निर्यात कर घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ा रहे हैं।
उद्योगपतियों का दावा – हमने कीमत नहीं बढ़ाई
दूसरी ओर, नेपाल वनस्पति घी एवं तेल उत्पादक संघ के अध्यक्ष विकास दुगड़ ने बाजार में तेल की कीमत बढ़ाने से साफ इनकार किया है।
उन्होंने कहा कि नेपाल में खाद्य तेल का कच्चा माल पूरी तरह विदेशों से आयात होता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार और डॉलर की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का असर लागत पर पड़ता है। उन्होंने खुदरा व्यापार संघ के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि 15 दिनों में कीमतें 15 रुपये तक बढ़ी हैं।
दुगड़ ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटती हैं तो उद्योग भी दाम कम करते हैं, लेकिन उस समय कोई उनकी सराहना नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि उद्योगों का लाभ केवल 3 से 5 प्रतिशत के बीच रहता है और उन्हें भी निवेश, बैंक ऋण और कारोबारी जोखिम का ध्यान रखना पड़ता है।
खुदरा व्यापारियों द्वारा एक कार्टन तेल 2,850 रुपये में खरीदने के दावे पर उन्होंने बिल दिखाने की चुनौती देते हुए कहा कि यह दावा गलत है।
वाणिज्य विभाग ने माना, निगरानी नहीं हो सकी
वाणिज्य, आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने स्वीकार किया कि खाद्य तेल की कीमतों को लेकर कुछ शिकायतें मिली हैं, लेकिन हाल के दिनों में एलपीजी गैस से जुड़े मामलों में व्यस्त रहने के कारण व्यापक निरीक्षण नहीं किया जा सका।
विभाग के सूचना अधिकारी अनिल किराँती ने बताया कि खुदरा दुकानों में एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने के प्रमाण नहीं मिले हैं, बल्कि फैक्ट्रियों और आयातकों द्वारा ही बढ़ी हुई एमआरपी के साथ सामान भेजा जा रहा है।
त्योहारों से पहले बढ़ी चिंता
अब तीज, दशैं, तिहार और छठ जैसे प्रमुख त्योहार नज़दीक हैं, जिनमें खाद्य तेल की मांग काफी बढ़ जाती है। उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कुछ व्यापारी और बिचौलिए कृत्रिम अभाव पैदा कर कीमतें बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
उपभोक्ता अधिकारकर्मी माधव तिमिल्सिना ने कहा कि यदि उद्योगपति डॉलर को बहाना बनाएंगे, खुदरा व्यापारी उद्योगों को दोष देंगे और सरकार निगरानी नहीं करेगी, तो उपभोक्ताओं को न्याय कैसे मिलेगा। उन्होंने इसे उपभोक्ताओं का खुला शोषण बताया।
भारत को अरबों रुपये का तेल निर्यात
नेपाल से हर वर्ष अरबों रुपये मूल्य का खाद्य तेल भारत सहित अन्य देशों को निर्यात किया जाता है। नेपाल आयातित कच्चे तेल का प्रसंस्करण कर उसे निर्यात करता है। भारत में नेपाली तेल पर शून्य सीमा शुल्क लागू होने के कारण निर्यात लगातार बढ़ा है।
भंसार विभाग के आंकड़ों के अनुसार, आर्थिक वर्ष 2082/83 में नेपाल से 1.28 खर्ब रुपये (लगभग 128 अरब रुपये) का सोयाबीन तेल तथा 1 खर्ब 6 अरब 79 करोड़ रुपये का अन्य खाद्य तेल (मुख्यतः सोयाबीन/वनस्पति श्रेणी) निर्यात किया गया। इससे स्पष्ट है कि घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों के बीच खाद्य तेल का निर्यात भी लगातार ऊँचे स्तर पर बना हुआ है।

