प्रज्ञा प्रतिष्ठानों में नियुक्तियों पर भीम रावल ने उठाए सवाल
नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के नेता भीम रावल ने सरकार द्वारा तीन प्रज्ञा प्रतिष्ठानों में किए गए पदाधिकारियों और सदस्यों की नियुक्ति पर असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा की गई इन नियुक्तियों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) द्वारा दावा किए जाने वाले सुशासन, न्याय और निष्पक्षता की कोई झलक दिखाई नहीं देती।
संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, पिछले मंगलवार प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान में 35, नेपाल ललितकला प्रज्ञा प्रतिष्ठान में 24 तथा नेपाल संगीत एवं नाट्य प्रज्ञा प्रतिष्ठान में 24, यानी कुल 83 प्राज्ञसभा सदस्यों का मनोनयन किया था।
इन्हीं नियुक्तियों को लेकर नेता रावल ने सुदूरपश्चिम प्रदेश के प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कुल 29 पदाधिकारियों की नियुक्ति में सुदूरपश्चिम से एक भी व्यक्ति को शामिल नहीं किया गया, जबकि कर्णाली प्रदेश से केवल एक व्यक्ति को स्थान दिया गया है।
इसी तरह, 83 सदस्यों के मनोनयन में सुदूरपश्चिम से केवल नौ लोगों को शामिल किया गया है। रावल के अनुसार, इनमें से एक को छोड़कर सभी कैलाली और कंचनपुर जिलों से हैं।
प्रधानमंत्री बनने से पहले बालेन्द्र शाह के सुदूरपश्चिम दौरे के दौरान दिए गए ‘झिक्कै झिक्कै माया’ वाले बयान का उल्लेख करते हुए रावल ने टिप्पणी की कि अब यह साबित हो गया है कि वह कथन महज दिखावटी था।
रावल ने नियुक्त पदाधिकारियों के जातीय और सामुदायिक प्रतिनिधित्व का आंकड़ा भी प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, पदाधिकारियों में 6 बाहुन, 8 नेवार, 2 मधेसी, 9 जनजाति, 2 थारू, 1 दलित और 1 क्षेत्री शामिल हैं।
इसी प्रकार सदस्यों में 15 बाहुन, 8 नेवार, 6 मधेसी, 12 जनजाति, 6 क्षेत्री, 5 दलित, 2 थारू तथा 1-1 दशनामी और मुस्लिम समुदाय से हैं।
रावल ने यह भी कहा कि मनोनीत व्यक्तियों की उम्र, शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और दक्षता का विवरण नामावली में उल्लेख नहीं किया गया है। उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और समावेशिता पर सवाल उठाते हुए सरकार से इस संबंध में स्पष्टता की अपेक्षा की है।

