हाइड्रोपावर सुरंगों में बचाव कार्य को लेकर प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने जारी किया विवरण
काठमांडू, 22 भाद्र 2083। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा है कि सीमित संसाधनों के बावजूद विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फँसे लोगों का बचाव कार्य लगातार जारी है। सोमवार को फेसबुक के माध्यम से आपदा प्रबंधन और बचाव कार्यों का विवरण साझा करते हुए उन्होंने सुरंगों में चल रहे राहत प्रयासों की जानकारी दी।
प्रधानमंत्री ने लिखा, “परियोजना क्षेत्रों से लोगों के संपर्क विहीन होने के कारण हमने शुरुआत से लेकर अब तक खोज और बचाव अभियान जारी रखा है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम समय तक यह अभियान चलाया जाएगा।
परियोजनाओं के अनुसार बचाव कार्य की वर्तमान स्थिति:
-
रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना: अब तक हेलीकॉप्टर लैंड न हो पाने के कारण बचाव सामग्री भेजने में कठिनाई आ रही है। इसके बावजूद नेपाली सेना सुरंग के 275 मीटर अंदर तक पहुंच चुकी है। वर्तमान में हेलीकॉप्टर से एक मिनी एक्सकेवेटर उतारकर इलाके में तलाश की जा रही है।
-
लांगटांग जलविद्युत परियोजना: गैस वेल्डिंग के जरिए सुरंग में छेद कर बचाव के प्रयास किए गए, जिसके दौरान दो शव बरामद हुए हैं। इस क्षेत्र में राहत कार्य अभी भी जारी है।
-
चिलिमे जलविद्युत परियोजना: भारी दलदल के कारण यहाँ बचाव में काफी कठिनाई आ रही है। भारत से आई विशेषज्ञ टीम की रेकी के बाद 14 भाद्र को यहाँ बचाव कार्य शुरू किया गया। सुरंग में 90 मीटर अंदर प्रवेश करने पर दो शव मिले हैं।
-
अपर त्रिशूली 1 परियोजना: यहाँ 10 भाद्र से खोज अभियान शुरू हुआ। 14 भाद्र से नेपाली सेना और चीनी विशेषज्ञों की टीम ने मिलकर कार्य आगे बढ़ाया। 200 मीटर अंदर प्रवेश करने पर एक झील जैसी स्थिति दिखाई दी। थर्मल ड्रोन के उपयोग से की गई तलाश में तीन शव बरामद हुए हैं, जबकि एक व्यक्ति को जीवित निकालने में सफलता मिली है।
-
त्रिशूली 3ए परियोजना: 13 भाद्र को बचाव अभियान शुरू किया गया। 6 एक्सकेवेटर का उपयोग कर 25 मीटर खुदाई करने के बाद बिजली के तारों के लिए इस्तेमाल होने वाली सुरंग का पता चला। बचाव दल इसी रास्ते अंदर दाखिल हुआ है और थर्मल इमेजिंग व इन्फ्रारेड कैमरों की मदद से तलाश कर रहा है।
-
त्रिशूली 3बी परियोजना: बचाव दल ऑडिट सुरंग के 1.7 किलोमीटर अंदर तक पहुँच चुका है, जहाँ उन्हें एक गाड़ी मिली है। अभियान के लिए अतिरिक्त उपकरण ले जाने का काम जारी है। बाढ़ के कारण परियोजना के 6 आवासीय और 1 कार्यालय भवन मलबे में दब गए हैं, जिनका पता लगाने के लिए 15 मीटर गहराई तक खुदाई की जा चुकी है।


