त्रिशूली-3 ‘बी’ जलविद्युत परियोजना: कीचड़ और मलबे के कारण बचाव कार्य में भारी चुनौती, 178 लोग अभी भी लापता
रसुवा/काठमांडू, ७ सितम्बर: रसुवा में आई विनाशकारी बाढ़ से क्षतिग्रस्त 37 मेगावाट क्षमता वाली ‘अपर त्रिशूली-3 बी’ जलविद्युत परियोजना स्थल पर बचाव और खोज अभियान लगातार चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। बाढ़ के कारण परियोजना स्थल पर भारी मात्रा में कीचड़, मलबा और दलदल जमा हो गया है, जिससे राहत कार्यों में भारी बाधा उत्पन्न हो रही है।
बचाव उपकरणों को ले जाने में समस्या
नेपाली सेना के अनुसार, बाढ़ के कारण जमा हुए कीचड़ और दलदल की वजह से घटनास्थल तक बचाव उपकरण (मशीनें) ले जाना और मलबा हटाना बेहद मुश्किल हो गया है। सेना ने इस कठिन परिस्थिति से निपटने और लापता लोगों की तलाश के लिए 90 जवानों की एक विशेष टीम को मौके पर तैनात किया है। यह टीम परियोजना के कार्यालय और आवासीय क्षेत्रों में खोज अभियान चला रही है।
178 लोग लापता, परिजनों का माइतीघर में प्रदर्शन
इस भीषण आपदा के बाद से परियोजना स्थल और उसके आसपास के 178 लोग अभी भी संपर्क से बाहर (लापता) बताए जा रहे हैं। अपनों की कोई खबर न मिलने से हताश और चिंतित परिजनों ने राजधानी काठमांडू के माइतीघर में विरोध प्रदर्शन किया है। परिजन सरकार और संबंधित अधिकारियों से बचाव कार्य में तेजी लाने और लापता लोगों को जल्द से जल्द खोजने की गुहार लगा रहे हैं।
स्थिति की गंभीरता
बाढ़ ने इस 37 मेगावाट की अहम जलविद्युत परियोजना को भारी नुकसान पहुंचाया है। दलदल और मलबे की वजह से न केवल बुनियादी ढांचा तहस-नहस हो गया है, बल्कि जिंदगियों की तलाश का काम भी एक बड़ी परीक्षा बन गया है। नेपाली सेना और अन्य बचाव दल विषम परिस्थितियों के बावजूद भग्नावशेष हटाने और लोगों को निकालने का लगातार प्रयास कर रहे हैं।




