दो-तिहाई बहुमत भी नहीं दे सकता स्थिरता की गारंटी, सुशासन जरूरी : सुशीला कार्की
काठमांडू। नेपाल की पूर्व प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने कहा है कि पिछले वर्ष हुए जेनजी आंदोलन ने देश की राजनीतिक व्यवस्था को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लेने मात्र से सरकार को स्थिरता नहीं मिल सकती, जब तक शासन व्यवस्था में सुशासन, जवाबदेही और जनविश्वास कायम न हो।
जेनजी आंदोलन की पहली वर्षगांठ के अवसर पर कार्की ने कहा कि इस आंदोलन ने राजनीतिक दलों और सरकारों के सामने यह सवाल खड़ा किया है कि केवल बहुमत के आधार पर सत्ता चलाना पर्याप्त नहीं है। जनता को बेहतर शासन, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और जवाबदेह प्रशासन चाहिए।
उनका कहना है कि किसी भी सरकार की वास्तविक ताकत केवल संसद में उसकी संख्या से तय नहीं होती। सरकार तभी प्रभावी और स्थिर मानी जाएगी, जब वह नागरिकों की अपेक्षाओं को पूरा करने और राज्य की संस्थाओं में विश्वास कायम करने में सफल हो।
कार्की का यह बयान ऐसे समय आया है जब जेनजी आंदोलन के बाद नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। आंदोलन ने पुरानी राजनीतिक व्यवस्था और नेतृत्व की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए थे। इसके बाद हुए राजनीतिक घटनाक्रम ने देश की सत्ता संरचना को बदल दिया और नई राजनीतिक ताकतों के लिए रास्ता तैयार किया।
आंदोलन की पृष्ठभूमि में भ्रष्टाचार, राजनीतिक अस्थिरता, जवाबदेही की कमी और युवाओं में बढ़ती निराशा जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। चुनाव के बाद नई सरकार को संसद में लगभग दो-तिहाई समर्थन हासिल हुआ, लेकिन इसके बावजूद शासन की गुणवत्ता और जनअपेक्षाओं को लेकर बहस जारी है।
पूर्व प्रधानमंत्री कार्की के बयान का मूल संदेश यही है कि लोकतंत्र में बहुमत महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन बहुमत अपने आप में सुशासन की गारंटी नहीं है। यदि सरकार पारदर्शिता, कानून के शासन, भ्रष्टाचार नियंत्रण और नागरिकों के प्रति जवाबदेही को प्राथमिकता नहीं देती, तो बड़ा से बड़ा संसदीय बहुमत भी राजनीतिक स्थिरता और जनविश्वास कायम नहीं रख सकता।
जेनजी आंदोलन ने इसी अंतर को उजागर किया है—जनता केवल सरकार बदलने की नहीं, बल्कि शासन करने की संस्कृति बदलने की अपेक्षा रखती है। ऐसे में मौजूदा सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने संसदीय बहुमत को प्रभावी शासन और ठोस परिणामों में बदलने की है।

