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भोटेकोशी बाढ़: अपनों की तलाश में भटकते परिजन, डीएनए (DNA) रिपोर्ट पर टिकी आखिरी उम्मीद

 
काठमांडू 9 सितंबर । भोटेकोशी बाढ़ के 10 दिन बीत जाने के बाद भी लापता लोगों के परिजन अपने प्रियजनों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं और अब उनकी आखिरी उम्मीद डीएनए (DNA) जांच के नतीजों पर टिकी है। रसुवा के टिमुरे पुलिस चौकी पर तैनात 40 वर्षीय पुलिस हवलदार विकासबाबू अधिकारी (जो 28 अन्य पुलिसकर्मियों के साथ लापता हैं) के पिता पूर्णप्रसाद और रसुवा में ही ड्राइवर का काम करने वाले बेटे की तलाश कर रहे कृष्णबहादुर नेपाली जैसे हजारों परिवार अस्पतालों और पुलिस स्टेशनों के चक्कर लगा रहे हैं। जिंदा न सही, तो कम से कम अंतिम संस्कार के लिए शव मिलने की आस में उन्होंने अपने खून के नमूने दिए हैं।
शवों की बरामदगी और प्रबंधन के आंकड़े
विवरण संख्या
कुल बरामद शव (रविवार तक) 1,341
अब तक पहचाने गए शव 98
चितवन में बरामद शव 362 (14 की पहचान, 333 देवघाट में दफनाए गए)
पूर्वी नवलपरासी में बरामद 222 (17 सौंपे गए, 160 दफनाए गए)
नुवाकोट में बरामद 155 (85 काठमांडू के वन क्षेत्र में दफनाए गए)
पोखरा लाए गए शव 102 (21 सौंपे गए, 76 दफनाए गए)
डीएनए परीक्षण का दबाव और चुनौतियां
  • सीमित प्रयोगशालाएं: नेपाल में मुख्य रूप से केवल दो प्रयोगशालाएं हैं (नेपाल पुलिस केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला और राष्ट्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला)। सामान्यतः ये साल भर में 1000 से कम नमूने जांचती थीं, लेकिन अब एक साथ 2,000 से अधिक नमूने आ चुके हैं।
  • लंबी प्रक्रिया: ताजे खून से नतीजे जल्दी आ सकते हैं, लेकिन पानी में लंबे समय तक रहने से सड़ चुके शवों की हड्डियों और दांतों से डीएनए निकालने में कम से कम तीन महीने का समय लग सकता है।
  • अंतरराष्ट्रीय सहायता: मौजूदा दबाव को देखते हुए भारत से 19 और चीन से 4 डीएनए विशेषज्ञ मदद कर रहे हैं। साथ ही, दक्षिण कोरिया की 44 सदस्यीय आपदा प्रतिक्रिया टीम भी सहयोग कर रही है। जापान और सिंगापुर से भी मदद का प्रस्ताव है।
अज्ञात शवों का वैज्ञानिक प्रबंधन
  • संक्रमण का खतरा: शवों के सड़ने और मोर्चरी में जगह न होने के कारण महामारी का खतरा बढ़ गया था, जिसके चलते सरकार ने शवों को दफनाने का निर्णय लिया।
  • सुरक्षित प्रक्रिया: “लावारिस शव प्रबंधन (प्रथम संशोधन) निर्देशिका, 2083” के तहत पोस्टमार्टम और डीएनए सैंपल लेने के बाद शवों को 1.5 मीटर गहरे गड्ढे में प्लास्टिक बैग में डालकर दफनाया जा रहा है।
  • ट्रैकिंग और पहचान: हर शव की जगह को कंक्रीट के मार्कर, जीपीएस (GPS) लोकेशन और क्यूआर (QR) कोड के साथ सुरक्षित किया गया है।
  • भविष्य में दावा: परिजन केवल तस्वीर देखकर शव का दावा नहीं कर सकते। डीएनए रिपोर्ट मैच होने पर ही गड्ढे से शव निकालकर परिजनों को सौंपा जाएगा। परिवार के सदस्य 12 साल तक शव पर अपना दावा पेश कर सकते हैं।

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