बाढ़ ने छीने पुल तो तुइन बना सहारा, नदी पार करने में लग रहे 5 घंटे

नुवाकोट/काठमांडू, 12 सितम्बर। नेपाल के नुवाकोट जिले में भदौ 10 को भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। बाढ़ के तेज बहाव में सड़कें और पक्के तथा झोलुंगे पुल बह जाने के बाद हजारों लोगों के सामने एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचना बड़ी चुनौती बन गया है। हालात ऐसे हैं कि नदी पार करने के लिए बनाए गए अस्थायी तुइन पर भी लोगों को अपनी बारी के लिए करीब पांच घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है।
विदुर-1 के इन्द्रायणी चौर और विदुर-9 के कोलनी को जोड़ने के लिए भदौ 15 को करीब 255 मीटर लंबा तुइन लगाया गया था। शुरुआत में यहां लोगों को छह से सात घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ता था। व्यवस्था में कुछ सुधार के बावजूद अभी भी नदी पार करने में कम से कम पांच घंटे का समय लग रहा है।
स्थानीय निवासी संजीव थपलिया के अनुसार, तुइन लोगों के लिए फिलहाल एकमात्र रास्ता है। लेकिन यात्रियों की भारी भीड़ के कारण घंटों इंतजार करना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी बीमार लोगों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को लेकर यात्रा करने वाले परिवारों को हो रही है।
बाढ़ के बाद त्रिशूली नदी का उफनता और मटमैला पानी और उसके ऊपर लोहे की तार तथा लकड़ी के छोटे तुइन से नदी पार करते लोगों का दृश्य बेहद जोखिम भरा है। इसके बावजूद यही अस्थायी व्यवस्था फिलहाल स्थानीय लोगों की ‘लाइफलाइन’ बनी हुई है।
इसी तरह विदुर-5 के देवीघाट में संघ, प्रदेश और स्थानीय सरकार के समन्वय से करीब 180 मीटर लंबा दूसरा तुइन लगाया गया है। इससे खाद्यान्न और दवाइयों की आपूर्ति कुछ हद तक संभव हो पा रही है। हालांकि, बाढ़ के दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी सामान्य आवागमन बहाल नहीं हो सका है।
नेपाल रेडक्रॉस सोसाइटी नुवाकोट के मंत्री उद्धव शर्मा रिजाल भी शुक्रवार को रास्ते से ही वापस लौट गए। उनका कहना है कि लोगों की संख्या अधिक होने के कारण तुइन से नदी पार करने के लिए भी लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।
विदुर-5 के वडाध्यक्ष लीलानाथ न्यौपाने के मुताबिक, तुइन के कारण लोगों के आवागमन के साथ-साथ जरूरी दवाइयों और खाद्यान्न की ढुलाई में कुछ राहत मिली है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है।
सरकार और स्थानीय प्रशासन अब स्थायी समाधान की दिशा में काम कर रहे हैं। विदुर-1 और विदुर-9 को जोड़ने वाले स्थान पर नए झोलुंगे पुल के पिलर निर्माण का काम शुरू हो चुका है। वाहनों के आवागमन को बहाल करने के लिए ह्यूमपाइप बिछाकर नदी के बहाव को डायवर्ट करने का काम भी शुरू किया गया है। वहीं विदुर-7 और विदुर-10 को जोड़ने के लिए बेलिब्रिज निर्माण की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए टीम स्थलीय निरीक्षण करने की तैयारी में है।
बाढ़ ने नुवाकोट के लोगों से सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाएं छीन ली हैं। ऐसे में पांच घंटे की प्रतीक्षा के बाद जोखिम भरे तुइन से नदी पार करना उनके लिए महज सफर नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी और मजबूरी के बीच चल रही एक कठिन जंग बन गया है।

