रसुवा की अपर त्रिशूली–1 जलविद्युत परियोजना में बाढ़ से 39 लोगों की मौत, 439 अब भी लापता
रसुवा जिले में निर्माणाधीन 216 मेगावाट क्षमता वाली अपर त्रिशूली–1 जलविद्युत परियोजना में 10 भदौ को आई विनाशकारी बाढ़ के कारण अब तक 39 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 439 लोग अभी भी लापता हैं।
भोटेकोशी नदी से होते हुए त्रिशूली नदी में आई इस भीषण बाढ़ ने परियोजना स्थल पर व्यापक तबाही मचाई। लगातार चल रहे खोज और बचाव अभियान के दौरान यह बड़ी मानवीय क्षति सामने आई है।
बाढ़ के समय परियोजना स्थल पर 1,433 कर्मचारी मौजूद थे
परियोजना की प्रवर्तक कंपनी नेपाल वाटर एंड एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी प्रा. लि. द्वारा सोमवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, बाढ़ आने के समय परियोजना स्थल पर परामर्शदाता, मुख्य निर्माण कंपनी और सब-कॉन्ट्रैक्टर के अंतर्गत नेपाल, दक्षिण कोरिया, चीन और भारत के लगभग 1,433 कर्मचारी कार्यरत थे।
इनमें से—
-
877 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है।
-
78 कर्मचारी बाद में संपर्क में आ चुके हैं।
-
39 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है।
-
439 लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है।
सुरंगों और भूमिगत विद्युतगृह में लोगों के फंसे होने की आशंका
कंपनी के अनुसार बाढ़ ने बांध स्थल से मुख्य सुरंग तक भारी तबाही मचाई। बड़े वाहन और ट्रक तक पलटे हुए मिले हैं।
आशंका है कि कई लोग सुरंगों, भूमिगत विद्युतगृह और अन्य संरचनाओं के भीतर मलबे और कीचड़ में दबे हो सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए मलबा और गाद हटाने का काम तेज कर दिया गया है।
सेना, पुलिस और विदेशी विशेषज्ञ संयुक्त रूप से राहत अभियान में जुटे
राहत और बचाव अभियान में संयुक्त रूप से शामिल हैं—
-
नेपाली सेना,
-
सशस्त्र प्रहरी बल,
-
नेपाल पुलिस,
-
दक्षिण कोरियाई विशेषज्ञ,
-
तथा परियोजना की तकनीकी टीम।
खोज अभियान में प्रशिक्षित खोजी कुत्तों और पर्वतारोहण विशेषज्ञ बचाव दल की भी मदद ली जा रही है।
हेलिकॉप्टर से मशीनें और उपकरण पहुंचाए गए
बाढ़ में परियोजना तक जाने वाली सड़क पूरी तरह बह जाने के कारण राहत सामग्री और भारी उपकरण हेलिकॉप्टर से पहुँचाए जा रहे हैं।
हेलिकॉप्टर के जरिए—
-
दो मिनी एक्स्कावेटर,
-
जनरेटर,
-
गैस-कटिंग उपकरण,
परियोजना स्थल तक पहुँचाए गए हैं, जिनकी मदद से मलबा हटाने और लोहे की सरियों को काटने का कार्य किया जा रहा है।
मैलुङ कैंप में भी राहत कार्य जारी
मैलुङ स्थित कैंप क्षेत्र में जमा कीचड़ हटाने और रुके हुए पानी की निकासी का काम भी जारी है।
बाढ़ से बरामद शवों को नेपाली सेना के हेलिकॉप्टर से नुवाकोट के विदुर स्थित सेना शिविर ले जाया जा रहा है, जहाँ परिजनों के लिए पहचान और शव की पुष्टि की प्रक्रिया आसान बनाई गई है।
प्रभावित परिवारों के लिए सहायता
कंपनी ने बताया कि—
-
मृतकों के परिवारों को तत्काल अंतिम संस्कार (काजक्रिया) के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है।
-
लापता लोगों के परिवारों के लिए मनोसामाजिक परामर्श की व्यवस्था की गई है।
-
परिवारों को नियमित रूप से खोज अभियान की अद्यतन जानकारी भी दी जा रही है।
कठिन परिस्थितियों में जारी है खोज अभियान
कंपनी का कहना है कि दुर्गम भौगोलिक स्थिति, आवास और संचार सुविधाओं की कमी, भूमिगत संरचनाओं में मौजूद खतरे और लगातार भूस्खलन की आशंका के बावजूद बचाव दल अभियान जारी रखे हुए हैं।
नेपाल सरकार के गृह मंत्रालय, ऊर्जा मंत्रालय और आपदा समन्वय वार रूम के साथ लगातार समन्वय कर उपलब्ध सभी संसाधनों, तकनीक और उपकरणों का उपयोग लापता लोगों की तलाश को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए किया जा रहा है।
मुख्य आंकड़े (एक नजर में)
|
विवरण |
संख्या |
|---|---|
|
परियोजना की क्षमता |
216 मेगावाट |
|
बाढ़ की तिथि |
10 भदौ |
|
बाढ़ के समय कुल कर्मचारी |
1,433 |
|
सुरक्षित बचाए गए |
877 |
|
बाद में संपर्क में आए |
78 |
|
मृतकों की पुष्टि |
39 |
|
अब भी लापता |
439 |
यह घटना नेपाल के जलविद्युत क्षेत्र की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदियों में से एक मानी जा रही है, जहाँ खोज और बचाव अभियान अभी भी जारी है।


