रसुवा बाढ़ में लापता लोगों के जीवित मिलने की संभावना अब बहुत कम : गृह सचिव केदारनाथ शर्मा
काठमांडू।
नेपाल के गृह मंत्रालय के सचिव केदारनाथ शर्मा ने कहा है कि रसुवा जिले में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद लापता हुए लोगों के अब जीवित मिलने की संभावना बहुत कम रह गई है।
उन्होंने यह बात संसद की कानून, न्याय तथा मानवाधिकार समिति की बैठक में कही। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि संभावना कम होने के बावजूद खोज और बचाव अभियान लगातार जारी रखा गया है।
सुरंगों में अब भी चल रहा है खोज अभियान
गृह सचिव शर्मा ने बताया कि विशेष रूप से जलविद्युत परियोजनाओं की भूमिगत सुरंगों में खोज और बचाव कार्य जारी है। उनके अनुसार कई सुरंगों में प्रवेश करने में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, आवश्यक तकनीक की कमी और जोखिमपूर्ण वातावरण के कारण काफी समय लगा।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खोज एवं बचाव विशेषज्ञों ने भी घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद माना है कि वहां का भूगोल अत्यंत चुनौतीपूर्ण है।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से भी हो रही है सलाह
शर्मा के अनुसार जब तक संभावना बनी रहेगी, खोज अभियान जारी रखने के विषय में सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों और आपदा विशेषज्ञों के साथ लगातार चर्चा की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस समय सरकार की पहली प्राथमिकता खोज और बचाव है। इसके बाद राहत कार्य, फिर पुनर्वास और अंत में पुनर्निर्माण का चरण शुरू किया जाएगा।
21 दिन बाद भी जीवित मिलने के उदाहरणों का उल्लेख
गृह सचिव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे उदाहरण भी हैं, जहाँ किसी आपदा के 21 दिन बाद भी लोग जीवित मिले हैं। इसी कारण जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में खोजबीन जारी रखी गई है, हालांकि जीवित मिलने की संभावना अब बहुत कम मानी जा रही है।
उन्होंने कहा,
“सभी सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख अभियान में जुटे हैं। कुछ तकनीक हमारे पास उपलब्ध नहीं थी और भूगोल भी बेहद कठिन था। अन्य देशों के विशेषज्ञों ने भी स्थल देखकर माना कि बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण है, इसलिए अभियान में कुछ देरी हुई।”
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
गृह सचिव ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा स्थानीय सरकारों के साथ समन्वय करके सुनिश्चित की जा रही है।
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राष्ट्रीय बाल अधिकार परिषद के प्रतिनिधियों को होल्डिंग सेंटरों में तैनात किया गया है।
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बचाए गए और अपने अभिभावकों से बिछड़े बच्चों की देखभाल स्थानीय सरकारें कर रही हैं।
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स्थानीय स्तर पर कार्यरत गैर-सरकारी संस्थाएँ भी बच्चों की देखरेख और प्रबंधन में सहयोग दे रही हैं।
शर्मा ने कहा कि अब तक होल्डिंग सेंटरों में रह रहे बच्चों की स्थिति को लेकर कोई गंभीर या अतिरिक्त समस्या सामने नहीं आई है।
मुख्य बातें (संक्षेप में)
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गृह सचिव केदारनाथ शर्मा ने कहा कि रसुवा बाढ़ के लापता लोगों के जीवित मिलने की संभावना अब बहुत कम है।
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इसके बावजूद जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में खोज और बचाव अभियान जारी है।
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कठिन भूगोल और तकनीकी सीमाओं के कारण बचाव कार्य में देरी हुई।
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सरकार का अगला चरण राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण होगा।
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महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए स्थानीय सरकार, राष्ट्रीय बाल अधिकार परिषद और गैर-सरकारी संस्थाएँ मिलकर काम कर रही हैं।


