योगेश भट्टराई ने पार्टी के ‘बहुआयामी पुनर्गठन’ का प्रस्ताव रखा, ओली से नए नेतृत्व का मार्ग प्रशस्त करने की अपील
काठमांडू।
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) के उपमहासचिव योगेश भट्टराई ने पार्टी को नया जीवन देने के लिए नीति, नेतृत्व और कार्यशैली में व्यापक बदलाव के साथ ‘बहुआयामी पुनर्गठन’ का प्रस्ताव रखा है।
राजधानी काठमांडू में सोमवार से जारी पार्टी की तीसरी केंद्रीय समिति की बैठक में बुधवार को भट्टराई ने ‘वर्तमान चुनौतियाँ और पार्टी के बहुआयामी पुनर्गठन के लिए प्रस्ताव’ शीर्षक से अपना लिखित दस्तावेज प्रस्तुत किया।
उन्होंने प्रतिनिधि सभा चुनाव में पार्टी की हार, भाद्र 23–24 की घटनाओं और हाल की प्राकृतिक आपदाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी को यथास्थितिवाद से बाहर निकालने के लिए कठोर आत्मसमीक्षा और व्यापक पुनर्गठन आवश्यक है।
नए नेतृत्व की वकालत
भट्टराई ने पार्टी अध्यक्ष केपी शर्मा ओली से सम्मानजनक तरीके से पद छोड़कर नए नेतृत्व के लिए मार्ग प्रशस्त करने की अपील की। उन्होंने लिखा कि नेतृत्व की वास्तविक महानता किसी पद पर अनंत समय तक बने रहने में नहीं, बल्कि ऐसा नया नेतृत्व तैयार करने में है जो आंदोलन को आगे बढ़ा सके।
उन्होंने आम सहमति के आधार पर नया नेतृत्व चुनने तथा तत्काल राष्ट्रीय महाधिवेशन प्रतिनिधि परिषद और विधान महाधिवेशन बुलाने की मांग की।
लोकतांत्रिक सुधारों का प्रस्ताव
पार्टी के लोकतंत्रीकरण के लिए भट्टराई ने आठवें और नौवें महाधिवेशन में तय व्यवस्थाओं को फिर से लागू करने पर जोर दिया। उनके प्रमुख प्रस्ताव हैं—
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पदाधिकारियों के लिए अधिकतम दो कार्यकाल की सीमा।
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70 वर्ष की आयु सीमा को फिर से पार्टी विधान में शामिल करना।
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समानुपातिक प्रतिनिधित्व और राष्ट्रीय सभा सदस्य के लिए ‘एक व्यक्ति, एक बार’ की नीति का सख्ती से पालन।
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गुटबंदी और परिवारवाद समाप्त कर योग्यता और कार्यक्षमता के आधार पर जिम्मेदारियों का वितरण।
जेनजी आंदोलन पर आत्मालोचना की मांग
भट्टराई ने भाद्र 23 को सुशासन और भ्रष्टाचार विरोधी मांगों को लेकर हुए जेनजी आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन सरकार ने वार्ता के बजाय दमन का रास्ता अपनाया, जिसमें 24 युवाओं की मौत हुई। उनके अनुसार, इस मामले में पार्टी और तत्कालीन सरकार को आत्मालोचना करनी चाहिए।
निष्पक्ष जांच आयोग की मांग
भाद्र 24 को हुई आगजनी, तोड़फोड़ और घुसपैठ की घटनाओं की जांच के लिए गठित गौरीबहादुर कार्की आयोग को उन्होंने अपूर्ण बताया। उनकी मांग है कि इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच के लिए सर्वोच्च अदालत के वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय न्यायिक आयोग का गठन किया जाए।


