३४ हजार फीट पर बने ईश्वर : कैप्टन स्मित मच्छार : डा. विजय दत्त

डा. विजय दत्त, काठमांडू १ ऑक्टोबर।
[ सचमुच अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का अनुपम उदाहरण जो १८० यात्रियों की जान बचाए भारतीय पायलट एवं उनका शौर्यगाथा जितना करे बहुत ही कम होगा देवतुल्य मानव ने अतुल्य कार्य किए अौर १८० यात्री का जान बचाए । शत शत प्रणाम् ! ]
विश्व मे अमेरिका के स्काई स्क्यापर भवन अौर भारत के मुम्बई पर हुए मुस्लिम आतंकी आक्रमण को नहि तो भारत अौर नहि तो अमेरिका भुले होगें । इसी बीच वैसा ही आतंककारी घटना करने का अन्तिम कुत्सित प्रयास हुआ है कहना राजनीतिक पंडितो का कहना है ।
पश्चिम एशिया में आश्विन और कार्तिक (अक्टूबर) का समय वैसे भी पर्यटकीय और रणनीतिक दृष्टिकोण से संवेदनशील माना जाता है। विशेष रूप से ७ अक्टूबर २०२३ को इजरायल पर हमास द्वारा किए गए भीषण हमले की तीसरी वार्षिक पुण्यतिथि समीप आते ही पूरा क्षेत्र उच्च सतर्कता पर था। ठीक इसी संवेदनशील घड़ी में, ३० सितंबर २०२६ को दुबई से इजरायल के तेल अवीव की ओर उड़ान भरने वाली फ्लाईदुबाई (Flydubai) की उड़ान संख्या FZ1073 में एक ऐसी बीभत्स और अकल्पनीय घटना घटी, जिसने पूरे विश्व नागरिक उड्डयन क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है।
१. *उड़ान का प्रारंभ और मध्य-आकाश में अचानक संकट*
दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से १८० से अधिक इजरायली यात्रियों और क्रू सदस्यों को लेकर विमान इजरायल के लिए रवाना हुआ था। विमान की कमान भारतीय मूल के अनुभवी कैप्टन स्मित मच्छार (Smit Machchhar) के हाथों में थी, जबकि सह-पायलट (को-पायलट) के रूप में ओमान के नागरिक कार्यरत थे।
विमान अपने निश्चित गंतव्य की ओर बढ़ते हुए सऊदी अरब के आकाश में लगभग ३३,००० से ३४,००० फीट की ऊंचाई पर पहुंचा था। उड़ान शुरू होने के कुछ ही समय बाद कॉकपिट के भीतर अचानक स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
२. *कॉकपिट के भीतर घातक हमला और गिरता विमान*
अकल्पनीय रूप से, ओमानी को-पायलट ने अचानक धार्मिक या उग्रवादी भावना से प्रेरित होकर कॉकपिट के भीतर ही मुख्य कैप्टन स्मित मच्छार पर चाकू से हमला कर दिया। कैप्टन मच्छार पर ताबड़तोड़ वार करते हुए उसने विमान को नियंत्रण से बाहर करके दुर्घटनाग्रस्त करने का प्रयास किया।
चाकू के गंभीर घाव और अत्यधिक रक्तस्राव के बावजूद कैप्टन मच्छार ने हिम्मत नहीं हारी। सह-पायलट ने विमान का ऑटो-पायलट सिस्टम बंद कर दिया था और जहाज को तेजी से नीचे गिराना शुरू कर दिया था। कुछ ही सेकंडों में विमान ३४,००० फीट की ऊंचाई से तेजी से गिरते हुए लगभग १४,००० से १७,००० फीट की ऊंचाई पर आ गया। विमान के भीतर यात्रियों में चीख-पुकार और चरम दहशत फैल गई।
३. *अद्भुत सूझबूझ और कॉकपिट का दरवाजा*
खुद गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति में भी कैप्टन मच्छार जानते थे—यदि कॉकपिट के बाहर से सहायता नहीं मिली, तो १८० से अधिक निर्दोष लोगों का जीवन समाप्त हो जाएगा। उन्होंने अपनी जान की बाजी लगाते हुए सह-पायलट का मुकाबला किया और आनन-फानन में कॉकपिट का सिक्योरिटी लॉक खोलकर बाहर मौजूद क्रू सदस्यों और यात्रियों के लिए अंदर आने का रास्ता खोल दिया।
कॉकपिट का दरवाजा खुलते ही केबिन क्रू (Cabin Crew) के सदस्य और कुछ साहसी यात्री तुरंत अंदर घुसे। उन्होंने अपनी जान हथेली पर रखकर उन्मादी बने ओमानी को-पायलट को नियंत्रण में लिया और बांधकर रख दिया।
४. *सऊदी अरब में आपातकालीन लैंडिंग* (Emergency Landing)
संकट अभी टला नहीं था। कैप्टन मच्छार अत्यधिक रक्तस्राव के कारण गंभीर रूप से घायल थे और विमान अभी भी अनिश्चित ऊंचाई पर था। लेकिन, अद्भुत पेशेवर दक्षता और संयम का परिचय देते हुए कैप्टन मच्छार ने पुनः कमान संभाली। उन्होंने सऊदी अरब के एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से तुरंत संपर्क कर आपात स्थिति की घोषणा की।
विमान को पास के सऊदी अरब के तबुक (Tabuk) हवाई अड्डे की ओर मोड़ा गया। अत्यधिक शारीरिक पीड़ा और मानसिक तनाव के बावजूद उन्होंने विमान को तबुक हवाई अड्डे के रनवे पर सुरक्षित रूप से लैंड (Emergency Landing) कराने में सफलता प्राप्त की।
५. *बचाव, जांच और विश्वभर में प्रशंसा*
विमान के लैंड होते ही सऊदी सुरक्षा एजेंसियों और मेडिकल टीम ने विमान को घेर लिया।
यात्रियों की सुरक्षा: विमान में सवार सभी १८० से अधिक यात्री और क्रू सदस्य पूरी तरह सुरक्षित रहे।
कैप्टन का इलाज: गंभीर रूप से घायल कैप्टन स्मित मच्छार को तुरंत सऊदी के स्थानीय अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया। फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर बताई गई है।
हमलावर पर कार्रवाई: हमलावर ओमानी को-पायलट को सऊदी सुरक्षा बलों ने हिरासत में लेकर गहन जांच शुरू कर दी है।
निष्कर्ष
७ अक्टूबर की घटना की पृष्ठभूमि में होने वाली इस संभावित बड़ी आतंकवादी त्रासदी या भयानक दुर्घटना को भारतीय पायलट स्मित मच्छार के अदम्य साहस, तत्परता और देश-जाति से ऊपर उठे मानव धर्म ने विफल कर दिया। ३४ हजार फीट की ऊंचाई पर मृत्यु से जूझते हुए १८० लोगों के प्राणों की रक्षा करने वाले कैप्टन मच्छार की इस बहादुरी को आज दुनिया भर में उच्च सम्मान के साथ देखा जा रहा है।
मुस्लिम उन्मादी-जिहादी आतंकवाद का रूप पायलट में भी देखने को मिला। ऐसे आतंकवादियों को तुरंत कठोरतम सजा मिलनी ही चाहिए, अन्यथा इस्लाम को बदनाम करने वाली ऐसी आतंकवादी गतिविधियां और बढ़ेंगी। आतंकी शिक्षण-प्रतिबन्ध तुरुन्त बन्द होना ही पडेगा ।
साथ ही, हथियार के साथ को-पायलट विमान में कैसे प्रवेश कर सका, इसकी जांच और समाधान होना अत्यंत आवश्यक है।

विश्लेषक

