आक्रोशित युवा, अनिश्चित भविष्य और शासन की जवाबदेही : देश के सामने बढ़ती चुनौती : बिमल सरार्फ
बिमल सरार्फ, रक्सौल,02 अक्टूबर 2026 । किसी भी देश का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी के सपनों, सोच और मेहनत पर निर्भर करता है। युवा देश की सबसे बड़ी ताकत होते हैं, लेकिन जब उनके मन में अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता, व्यवस्था के प्रति असंतोष और अपनी बात न सुने जाने की भावना बढ़ती है, तो यह समाज और शासन, दोनों के लिए विचार करने का विषय बन जाता है।
आज युवाओं की अपेक्षाएं केवल शिक्षा और रोजगार तक सीमित नहीं हैं। वे समान अवसर, पारदर्शी व्यवस्था, सम्मानजनक जीवन और अपने भविष्य को सुरक्षित देखने की इच्छा रखते हैं। जब उनकी उम्मीदों और वास्तविक अनुभवों के बीच दूरी महसूस होती है, तो आक्रोश और निराशा जन्म ले सकती है।
शासन की जिम्मेदारी केवल योजनाएं बनाना और निर्णय लेना नहीं है, बल्कि जनता की समस्याओं को समझना और समय पर उनका समाधान करना भी है। यदि नीतियों और फैसलों में दूरदर्शिता, संवेदनशीलता और संवाद की कमी महसूस होती है, तो जनता का भरोसा प्रभावित हो सकता है। लोकतंत्र में सत्ता की मजबूती केवल अधिकारों से नहीं, बल्कि जवाबदेही और जनविश्वास से भी आती है।
इसी तरह, किसी भी शासन व्यवस्था में असहमति को समझना और आलोचना को सुनना आवश्यक है। युवाओं की आवाज को विरोध समझकर अनदेखा करने के बजाय उनकी समस्याओं और सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और संवाद से ही शासन तथा नागरिकों के बीच विश्वास मजबूत हो सकता है।

