गगन थापा का सरकार पर निशाना, कहा- “संसद को भी खुलामंच चाहिए”
काठमांडू, खुलामन्च, 4 ऑक्टोबर । नेपाली कांग्रेस के सभापति गगन थापा ने काठमांडू के खुलामंच में आयोजित पार्टी के 15वें महाधिवेशन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मौजूदा राजनीतिक हालात और प्रधानमंत्री के रवैये पर तीखा प्रहार किया है। अधिवेशन स्थल ‘खुलामंच’ को एक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करते हुए उन्होंने कहा कि आज देश की संसद को भी एक ‘खुलामंच’ की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री के रवैये और संसद की गरिमा पर सवाल
थापा ने संसद के सुचारू रूप से संचालित न होने का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “जिन सांसदों ने जिन्हें प्रधानमंत्री बनाया है, खुद को प्रधानमंत्री बनाने वाली उस संसद और जनता की गरिमा के लिए जब तक प्रधानमंत्री उस सदन में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज नहीं कराते, तब तक संसद सही मायने में खुली नहीं कहलाएगी।”
नागरिकों के अनसुलझे सवाल: निर्मला पन्त से लेकर गणेश नेपाली तक
सभापति थापा ने देश के आम नागरिकों की चिंताओं को मंच पर रखते हुए कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों के मन में कई गंभीर सवाल हैं। उन्होंने निर्मला पन्त के अनसुलझे मामले से लेकर तीनकुने में खुद को आग लगाकर जान देने वाले गणेश नेपाली की घटना का जिक्र किया। थापा ने स्पष्ट किया कि ये सवाल केवल मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के बाद पैदा नहीं हुए हैं, बल्कि ये पुराने सवाल हैं जिनका जवाब अब तक नहीं मिला है।
कुर्सी की दौड़ (म्यूजिकल चेयर) और जनता की निराशा
शांति प्रक्रिया और संविधान निर्माण के बाद की स्थिति पर बोलते हुए थापा ने कहा कि जनता ने यह देखा कि राजनीतिक दलों ने देश हित में सही प्रयास किए या नहीं। जब जनता ने देखा कि राजनीतिक दल केवल ‘प्रधानमंत्री की कुर्सी’ के लिए दौड़ रहे हैं, तो उनमें भारी निराशा छा गई। उन्होंने इस सत्ता के खेल को ‘म्यूजिकल चेयर’ करार दिया और अपनी गलती स्वीकारते हुए कहा, “नागरिकों की वाजिब आकांक्षाएं थीं, लेकिन हम कहीं न कहीं चूक गए।”
‘एंटी-पॉलिटिक्स’ और ‘हाइपर-पॉलिटिक्स’ का द्वंद्व
गगन थापा ने विश्वभर में बढ़ रही ‘एंटी-पॉलिटिक्स’ (राजनीति के प्रति वितृष्णा) का जिक्र करते हुए कहा कि नेपाल में एक अलग ही तरह की स्थिति है जहाँ एंटी-पॉलिटिक्स और ‘हाइपर-पॉलिटिक्स’ (अति-राजनीतिकरण) एक साथ देखने को मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि देश में जानबूझकर एक ऐसा विमर्श (नैरेटिव) गढ़ा गया है कि पुराने राजनीतिक दल बेकार हैं और सभी नेता व सांसद भ्रष्ट या खराब हैं। उन्होंने इस विरोधाभास पर कटाक्ष करते हुए कहा कि लोग कहते हैं कि उन्हें राजनीति पसंद नहीं है, लेकिन चाय की दुकानों से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह वे राजनीति ही कर रहे हैं। थापा ने चिंता व्यक्त की कि इस तरह की प्रवृत्तियों ने नेपाली समाज को एंटी-पॉलिटिक्स से निकालकर हाइपर-पॉलिटिक्स की दिशा में धकेल दिया है।


