Fri. Oct 30th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है

 

 

 

हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा के पर्व का अधिक महत्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार, शरद पूर्णिमा का पर्व आज यानी 25 अक्टूबर  को मनाया जा रहा है। इस दिन मां लक्ष्मी, चंद्रदेव और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन साधना करने से जीवन में खुशियों का आगमन होता है और साधक को शुभ परिणाम मिलते हैं।

इस रात को चंद्रमा की रोशनी से अमृत की वर्षा होती है। इसलिए रात को खुले आसमान के नीचे रखने का विधान है। शरद पूर्णिमा के अवसर पर मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए कई उपाय भी किए जाते हैं। आइए एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार बताते हैं कि शरद पूर्णिमा के नियम और उपाय के बारे में।

यह भी पढें   जनकपुर बोल्ट्स को 19 रन से हराकर कर्णाली याक्स ने दर्ज की शानदार जीत, एनपीएल में रोमांचक मुकाबला

शरद पूर्णिमा की रात्रि का ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत विशेष महत्व है। इस रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट और अपनी संपूर्ण सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है।

रात को खीर रखने का महत्व
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है। खुले आसमान के नीचे खीर रखने से इसमें यह अमृत और औषधीय गुण समा जाते हैं। इस प्रसाद को ग्रहण करने से उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है।

शरद पूर्णिमा की विशेषताएं एवं योग
अमृतवर्षा का समय: शास्त्रों के अनुसार, इस रात चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है, जो शरीर और मन दोनों को आरोग्य प्रदान करती है।
सर्वार्थ सिद्धि योग: जब इस पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बनता है, तब इस काल में किया गया कोई भी शुभ कार्य, मंत्र जाप, साधना या दान-पुण्य कभी भी निष्फल नहीं होता।
शुभ कार्य: इस योग में नए कार्यों की शुरुआत, गृह प्रवेश, स्वर्ण या आभूषणों की खरीदारी और आध्यात्मिक अनुष्ठान बेहद शुभ फल प्रदान करते हैं।
मानसिक शांति: ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर स्थिति में हो या जो मानसिक अशांति से पीड़ित हों, उनके लिए शरद पूर्णिमा की रात्रि का समय ध्यान और चंद्र दर्शन के लिए रामबाण माना जाता है।

यह भी पढें   नेपाल में ‘जेन–जी आंदोलन’ का एक सालः सवाल अब भी अनसुलझे ! : विनोदकुमार विमल

माता लक्ष्मी का जन्मोत्सव और रात्रि जागरण के उपाय
लक्ष्मी प्रकटोत्सव: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान शरद पूर्णिमा के दिन ही माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं।
आर्थिक समृद्धि: इस रात्रि को माता लक्ष्मी का जन्मोत्सव मानकर रात्रि जागरण करना चाहिए तथा महालक्ष्मी स्तोत्र, कनकधारा स्तोत्र या श्री सूक्त का पाठ करना आर्थिक समृद्धि के द्वार खोलता है।
मंत्र जाप: इस रात सोने के बजाय माता लक्ष्मी और चंद्रमा के मंत्रों का निरंतर जाप करना चाहिए। महालक्ष्मी का प्रमुख मंत्र इस प्रकार है:
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

यह भी पढें   एनपीएल के उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री बालेन का ‘फ्लाइंग किस’, तस्वीरें चर्चा

दान और चंद्र दोष निवारण
आवश्यक दान: इस दिन जरूरतमंदों को दूध, चावल, श्वेत वस्त्र या अन्न का दान करना चाहिए।
लाभ: ऐसा करने से कुंडली का चंद्र दोष शांत होता है और घर में सुख-समृद्धि तथा बरकत बनी रहती है।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com