राप्रपा चुनाव में उम्मीदवार तक नहीं मिलने की स्थिति में पहुँच गई हैः नेता थापा

वीरगंज, २८ अक्टूबर । राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) के नेता कमल थापा ने कहा है कि पार्टी ऐसी स्थिति में पहुँच गई है, जहाँ उसे चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार तक नहीं मिलेंगे । राप्रपा अपने ३५ वर्षों के लंबे इतिहास में इस समय सबसे कमजोर स्थिति में पहुँच गई है, ऐसा दावा करते हुए थापा ने यह बात कही ।
वीरगंज में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए थापा ने कहा, ‘एक तरफ राजा की लोकप्रियता बढ़ी है और जनता राजा की मांग कर रही है । इसी तरह जनता हिंदू राष्ट्र चाहती है । जनता भ्रष्टाचार का अंत करके सुशासन चाहती है, आर्थिक समृद्धि चाहती है और बेरोजगारी का अंत चाहती है । लेकिन इन विचारों को लेकर चलने वाली एकमात्र पार्टी राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी इतिहास में सबसे कमजोर हो गई है ।’
नेता थापा ने कहा कि पार्टी केवल चुनाव में हार या जीत के कारण ही नहीं, बल्कि संगठनात्मक दृष्टिकोण से भी कमजोर हुई है । उन्होंने बताया कि पार्टी के प्रति नेताओं और कार्यकर्ताओं में उत्साह तक नहीं है । उन्होंने आगे कहा, ‘विभिन्न स्तरों की कार्यसमितियों में रहना चाहने वाले लोग भी निराश हैं और उनमें कोई उत्सुकता नहीं है । देश की राजधानी काठमांडू जैसे जिले में, जहाँ २०७० साल के चुनाव में हमें कांग्रेस, एमाले और माओवादी से भी अधिक मत मिले थे, वहाँ जिला कार्यसमिति के चुनाव में निर्विरोध चुने जाने का अवसर होने के बावजूद पर्याप्त संख्या में सदस्य तक नहीं मिले ।’ उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व को अपनी कार्यशैली और प्रवृत्ति में सुधार करना होगा ।
स्मरणीय है, कमल थापा राप्रपा के पूर्व अध्यक्ष भी हैं । उन्होंने आगे कहा, ‘पार्टी इतनी कमजोर स्थिति में इससे पहले कभी नहीं थी । अब तीन महीने बाद स्थानीय चुनाव होने वाला है । फागुन से ही स्थानीय चुनाव शुरू हो जाएगा । हम ऐसी स्थिति में पहुँच गए हैं कि हमें उम्मीदवार तक नहीं मिल पा रहे हैं ।’ हालाँकि, उन्होंने नेताओं और कार्यकर्ताओं से निराश न होकर पार्टी के अभियानों में जुटने का आग्रह किया । उन्होंने विश्वास जताया कि भले ही उनकी पीढ़ी ऐसा करने में सफल न हो, लेकिन नई पीढ़ी हिंदू राष्ट्र और राजसंस्था की पुनस्र्थापना करके रहेगी ।
थापा ने आगे कहा, ‘हमें राप्रपा को फिर से पुनर्जीवित करना ही होगा, इसे उठाना होगा और हम ऐसा कर भी सकते हैं । इसके लिए आप सभी पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊँचा होना चाहिए । यदि कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊँचा रह सका, तो राप्रपा जल्द ही फिर से जाग उठेगी । छह महीने पहले स्थापित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) एक ही चुनाव में लगभग दो–तिहाई बहुमत हासिल कर सकती है, तो हिंदू राष्ट्र और राजसंस्था का एजेंडा लेकर चलने वाली राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी भी जनता के बीच जाकर देश की स्थिति और पार्टी के एजेंडे को सही ढंग से समझा सके, तो एक ही चुनाव में भारी बहुमत हासिल कर सकती है ।’

