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हानि एवं नुकसान कोष से 20 मिलियन डॉलर की सहायता के लिए नेपाल ने प्रस्ताव तैयार करना शुरू किया

 

काठमांडू, 2 नवंबर।

नेपाल सरकार ने हानि एवं नुकसान कोष (लॉस एंड डैमेज फंड) से मिलने वाली 20 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता के लिए परियोजना प्रस्ताव तैयार करना शुरू कर दिया है। कोष ने नेपाल के लिए 21.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर आवंटित करते हुए उसमें से 20 मिलियन डॉलर की परियोजना का प्रस्ताव पेश करने का आग्रह किया है। इसके बाद सरकार ने प्रस्ताव तैयार करने और उपयुक्त कार्यान्वयनकारी संस्था का चयन करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।

कृषि, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के जलवायु परिवर्तन प्रबंधन प्रभाग के प्रमुख डॉ. महेश्वर ढकाल ने बताया कि प्रस्ताव तैयार करने का काम शुरू हो चुका है और मंसिर के दूसरे सप्ताह तक इसका प्रारंभिक चरण पूरा होने की संभावना है।

नेपाल सरकार सीधे कोष में परियोजना प्रस्ताव पेश नहीं कर सकती। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार, कोष से संबद्ध किसी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय संस्था के माध्यम से प्रस्ताव भेजना होगा। इसलिए सरकार प्रस्ताव तैयार करने के साथ-साथ ऐसी उपयुक्त संस्था की पहचान और मूल्यांकन भी कर रही है, जो परियोजना को प्रभावी ढंग से लागू कर सके और प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा सके।

डॉ. ढकाल ने कहा, “नेपाल के लिए 21.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर आवंटित करने और उसमें से 20 मिलियन डॉलर के बराबर परियोजना प्रस्ताव पेश करने का अनुरोध करने का निर्णय लिया गया है। इसकी आधिकारिक जानकारी हमें मिल चुकी है। हमने एक समिति गठित कर प्रस्ताव तैयार करने का प्रारंभिक काम शुरू कर दिया है। प्रस्ताव लेखन और संस्था की तलाश का काम समानांतर रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है।”

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प्रभावित समुदायों की जरूरतों को मिलेगी प्राथमिकता

परियोजना में शामिल किए जाने वाले कार्यक्रमों की प्राथमिकताएँ तय करते समय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अध्ययन और राष्ट्रीय योजना आयोग की ओर से तैयार आपदा-पश्चात आवश्यकता आकलन (पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट—पीडीएनए) रिपोर्ट को आधार बनाया जाएगा।

ढकाल के अनुसार, प्रस्ताव के केंद्र में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदाओं से सबसे अधिक प्रभावित समुदायों की जरूरतें होंगी। विशेष रूप से प्रभावित महिलाओं, बच्चों और स्थानीय समुदायों के जीवन तथा सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि सरकार नवंबर के भीतर प्रस्ताव का पहला प्रारूप तैयार करने और यथासंभव कोष की दसवीं बोर्ड बैठक से पहले इसे प्रस्तुत करने की दिशा में काम कर रही है।

ढकाल ने कहा, “यह प्रस्ताव लोगों के जीवन और उनकी सुरक्षा पर केंद्रित होना चाहिए। विशेष रूप से सबसे अधिक प्रभावित बच्चों और महिलाओं की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर इसे तैयार किया जाना चाहिए।”

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राशि से अधिक महत्वपूर्ण है इसका अंतरराष्ट्रीय महत्व

नेपाल को मिलने वाली 20 मिलियन डॉलर की सहायता राशि बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन इसका अंतरराष्ट्रीय महत्व काफी अधिक है। जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए उपलब्ध कराई जा रही इस सहायता का किस तरह उपयोग किया जाता है, इससे क्या परिणाम निकलते हैं और भविष्य में यह दूसरे देशों के लिए कैसी मिसाल कायम करती है—इन सभी पहलुओं पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर है।

ढकाल ने कहा कि परियोजना के क्रियान्वयन, उससे मिलने वाले परिणामों और हानि एवं नुकसान की समस्या के समाधान के क्षेत्र में मिसाल स्थापित करने की क्षमता को लेकर राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष रुचि है। इसलिए नेपाल को इस राशि के उपयोग की ऐसी योजना तैयार करनी चाहिए, जो प्रभावी और अनुकरणीय हो।

सरकार की योजना इस राशि से विभिन्न स्थानों पर छोटी-छोटी गतिविधियाँ संचालित करने के बजाय किसी निश्चित क्षेत्र में केंद्रित होकर एक आदर्श परियोजना लागू करने की है। इससे प्राप्त अनुभव और उपलब्धियों को भविष्य में दूसरे क्षेत्रों में भी दोहराने तथा विस्तार देने में मदद मिलने की अपेक्षा है।

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मंत्रालय के प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी संभाल रहे ढकाल ने कहा, “हम अनेक स्थानों पर गतिविधियाँ बिखेरने के बजाय उन्हें एक ही क्षेत्र में केंद्रित करके एक आदर्श परियोजना या प्रदर्शन मॉडल तैयार करना चाहते हैं, ताकि भविष्य में इसी तरह की गतिविधियों को अन्य क्षेत्रों में भी दोहराने और विस्तार देने में सुविधा हो।”

22 अक्टूबर को हुआ था सहायता देने का निर्णय

हानि एवं नुकसान कोष की 22 अक्टूबर को हुई विशेष ऑनलाइन बैठक में नेपाल को यह सहायता उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया था।

नेपाल के कृषि, वन एवं पर्यावरण मंत्री तथा अर्थमंत्री के हस्ताक्षर से भेजे गए अनुरोध-पत्र पर विचार करने के बाद बैठक ने सर्वसम्मति से राशि उपलब्ध कराने का फैसला किया था।

अब सरकार परियोजना प्रस्ताव तैयार करने और कार्यान्वयन के लिए उपयुक्त संस्था चुनने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है, ताकि जलवायु परिवर्तन से प्रभावित समुदायों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस सहायता राशि का प्रभावी उपयोग किया जा सके।

— न्यूज एजेंसी नेपाल

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