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अवधी भाषा तथा साहित्य की बर्तमान परिदृश्य पर दो दिन की अन्र्तराष्ट्रीय संगोष्ठी

 

नेपालगन्ज (बाके), पवन जायसवाल, २०७२ पुष १९ गते ।
भारत के उत्तर प्रदेश लखीमपुर खीरी में अवधी भाषा तथा साहित्य की बर्तमान परिदृश्य के विषय पर दो दिन की अन्र्तराष्ट्रीय संगोष्ठी तथा सम्मेलन भव्यता पुुर्बक सम्पन्न हुआ है ।
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गोष्ठी में अवधी भाषा और साहित्य के विषय में देश विदेश से आये हुये अवधी विद्धान तथा साहित्यकारों ने अपना अपना विचार ब्यक्त किया इस के अलावा अवधी भाषा के बारे में विशेष विचार विमर्ष भी हुआ था ।
भगवानदीन आर्य कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के स्वर्ण जयन्ती समारोह मल्हार के तहत में अवधी भाषा तथा साहित्य की वर्तमान परिदृश्य के दो दिन के कार्यक्रम में गुरुकुल कांगडी विश्व विद्यालय हरिद्धार के पूर्व कुलपति प्रोफेसर धर्मपाल आर्य, कालीगम विश्वविद्यालय श्रीलंकाकय हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर उपुल रंजीत, नेपाल के वरिष्ठ साहित्यकार तथा अवधी सांस्कृतिक विकास परिषद बा“के जिला के अध्यक्ष सच्चिदानन्द चौबे, साहित्यकार गंगाप्रसाद अकेला, उर्दू हिन्दी प्रतिष्ठान के अध्यक्ष अब्दुल मोवीन खान, अवधी पत्रकार संघ नेपाल के महासचिव तथा पत्रकार राकेशकुमार मिश्र, बा“के की अवधी अवधी महिला मण्डल की अध्यक्ष तथा साहित्यकार प्रतिभारानी चौबै, और भारत के अवधी साहित्यकार तथा विज्ञ डा. सुर्यचन्द्र दिक्षित, डा. योगेश प्रविण, प्रो. यज्ञप्रसाद तिवारी डा. तिलक सिंह, डा.जगदीश पीयूष, डा. दुषी भारद्धाज, डा. विनय दास, डा. अरुण त्रिवेदी, ओपी पाठक, लगायत लोग अपनी अपनी बिचार रखा था ।

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सभा में वक्ता लोगों ने अवधी भाषा जीवन्त भाषा है और अवधी भाषा से ही और भाषा की विकास हुई है बताये थे । अवधी भााषा मधुर और वैज्ञानिक उचित सम्मान मिलती और हरेक देश में इस को राष्ट्रीय भाषा के रुप में विकास करने के लिये मा“ग भी किया है । उन लोगों ने अवधी भाषा एक अलग पह“चान और सरलता होने के इसकी ज्यादा महत्व रही है बताये थे ।
विद्वान लोग देशविदेश के अवधी भाषी लोग ही अवधी को नोक्सान पहु“चाते है । अवधी भाषा की प्रयोग करन में अधिकतर लोग हीन भावना अनुभव करते है जव की ईस को बोलने में गर्व होना चाहियें । अवधी सशक्त लोकभाषा है । ई अवधी भाषा की प्रसार प्रचार क्षेत्र काफी में विस्तार । भाषा में मधुरता और वैज्ञानिकता है । ई विषय में कार्यपत्र प्रस्तुतिकरण के साथ साथ छलफल भी किया गया था ।

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सम्मेलन में आयोजित अवधी काव्य सन्ध्या में विभिन्न देशों के साहित्यकारों ने अपनी अपनी रचना वाचन कियें थे । नेपाल से पत्रकार राकेशकुमार मिश्रद्वारा संचालन किया गया गोष्ठी में साहित्यकार डा. अरुण त्रिवेदी, जगदीश अवस्थी, राजेन्द्र प्रसाद तिवारी, विजेन्द्र पाण्डेय, संदीप सरस, फारुक सरल, विशेष शर्मा, हेमन्त पाण्डेय, विष्णुदयाल त्रिवेदी, अनील हमल, अवधी महिला मण्डल की अध्यक्ष प्रतिभारानी चौबै लगायत लोगों ने रचना वाचन किये थे ।
वह अवसर में नेपाल के वरिष्ठ अवधी साहित्यकार तथा अवधी सांस्कृतिक विकास परिषद बा“के जिला के अध्यक्ष सच्चिदानन्द चौबे ने अवधी में अनुवाद रामयन की विमोचन भी किया गया था । आयोजक महाविद्यालयद्वारा किया गया कार्यक्रम में भारत के विभिन्न जिला और विदेशों से आये हुये नेपाल और श्रीलंका से आये अतिथि लोगों को दोसल्ला ओढाकर, स्मृति पत्र के साथ सम्मान पत्र और फूल की माला से स्वागत तथा सम्मान किया गया था ।
महाविद्यालय के प्राचार्या डा. निरुपमा अशोक के अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ दो दिनों की कार्यक्रम की संचालन कार्यक्रम संयोजिका डा. वीनारानी गुप्ता और सहसंयोजिका शशीप्रभा बाजपेयी ने की थी । कार्यक्रम में भारत के बिभिन्न जिला, नेपाल, श्रीलंका के अवधी विद्वान लोगों की सहभागिता रही थी ।

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महाविद्यालय के स्वर्ण जयन्ती के अवसर में साताव्यापी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथेन बिभिन्न कार्यक्रम की आयोजन भी किया गया था ।

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