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धान दिवस की सार्थकता : लिलानाथ गौतम

 

लिलानाथ गौतम

नेपाल कृषि प्रधान देश है, धान को ही यहां प्रमुख खाद्यान्न माना जाता है । तथ्यांक  के अनुसार धान, गेहूँ, मकई, मड़वा, जौ, फापर आदि कुल खाद्यान्न उत्पादन की तुलना में धान की उपज करीब ५३ दशमलव ७ प्रतिशत रहा है । इसीलिए नेपाल सरकार ने प्रत्येक साल आषाढ़ १५ गते को ‘राष्ट्रीय धान दिवस’ के रूप में  मनाने का निर्णय लिया है । हम लोग विगत एक दशक से आषाढ़ १५ को ‘राष्ट्रीय धान दिवस’ के रूप में मनाते आ रहे हैं । वि.सं. २०६१ मंसिर २९ गते नेपाल सरकार, मन्त्रिपरिषद् की बैठक ने इस दिन को ‘राष्ट्रीय धान दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया था ।हाल ही में सरकारी तौर पर ‘दुईबाली धानको विस्तार, आर्थिक समृद्धिको आधार’ नारा देकर १४वें राष्ट्रीय धान दिवस विविध कार्यक्रम के साथ मनाया गया है । इस तरह सरकारी स्तर में धान दिवस मनाया तो जाता है लेकिन किसानों में अभी तक कृषि को आधुनिकीकरण करने का पर्याप्त ज्ञान और कौशल में वृद्धि नहीं हो पा रहा है, जिसके चलते धान दिवस की सार्थक प्रभावकारी नहीं दिखाई देता ।नेपाल में विशेषतः तराई क्षेत्र में ज्यादा धान उत्पादन होता है । झापा जिला, जहां नेपाल के अन्य जिला की तुलना में सबसे ज्यादा धान उत्पादन होता है । इसीलिए सरकार ने झापा जिला को धान उत्पादन के लिए ‘सुपरजोन’ की भी घोषणा की है । माना जाता है कि पहाड़ के अन्य २२ जिलों में जितना धान उत्पादन होता है, उससे ज्यादा धान सिर्फ झापा में उत्पादन होता है । आज बहुत लोग दिन–प्रति–दिन कृषि पेशा छोड़ते जा रहे हैं । कृषि पेशा में आबद्ध किसान को पेशागत सम्मान और परिश्रम के अनुसार उसका सही  मूल्यांकन न होने के कारण कृषि व्यवसाय के प्रति लोगों की रुचि कम हो जाती है । स्वाभाविक है, ऐसी अवस्था में खाद्यान्न उत्पादन में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो सकता । नेपाल में धान उत्पादन की औसत वृद्धि दर अत्यन्त न्यून होना इसका परिणाम है । हां, कुछ युवा जमात आधुनिक कृषि प्रणाली अवलम्बन करने के नाम में इसके प्रति आकर्षित भी हो रहे हैं । धान खेती के शुरुआती दिनों में सिंचाई, खाद, उन्नत बीज आदि के अभाव और आधुनिक प्रविधि को कम प्रयोग के कारण भी धान उत्पादन सन्तोषजनक नहीं हो पा रहा है । विगत १० वर्ष में धान उत्पादन में औसत सिर्फ २ दशमलव ९ प्रतिशत ही वृद्धि हुआ है । यही तथ्य काफी है कि नेपाल में धान दिवस सिर्फ सरकारी कार्यक्रमों में सीमित है ।युवा जनशक्ति का विदेश पलायन, खेती योग्य जमीन को प्लटिङ कर बिक्री–वितरण करना अथवा खाली छोड़ना, ऐसी समस्या है जिसके चलते धान उत्पादन–योग्य जमीन का क्षेत्रफल भी कम होता जा रहा है । राष्ट्रीय कृषि गणना २०६८ के अनुसार विगत एक दशक में धान उत्पादन योग्य जमीन के क्षेत्रफल में ६ प्रतिशत की कमी आई है । तथापि अभी तक राष्ट्रीय अर्थतन्त्र में कृषि क्षेत्र का योगदान २८ दशमलव ९ प्रतिशत रहा है । इसमें भी प्रमुख खाद्यान्न उत्पादन में से धान का हिस्सा ५३ दशमलव ७ प्रतिशत रहा है । इसीलिए धान उत्पादन वृद्धि के लिए राष्ट्रीयस्तर में ही पहल होना आवश्यक है । इसके लिए कृषि क्षेत्र में प्रशस्त सम्भावनाएँ हंै, इस तथ्य पर युवाओं में विश्वास जगाना होगा । और युवा जनशक्ति को कृषि व्यवसाय के प्रति प्रोत्साहित करना होगा । इसी तरह आधुनिक कृषि औजार तथा बीज का प्रयोग बढ़ा कर सिंचाई–सुविधा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सरकार को लेनी होगी । उसके बाद ही धान दिवस वास्तव में ‘धान दिवस’ बन सकता है ।कृषि योग्य जमीन तथा धान उत्पादन सम्बन्धी कुछ तथ्यच नेपाल में २५ लाख २५ हजार हेक्टर जमीन खेती योग्य है ।च खेती योग्य कुल जमीन में से ४४ दशमलव ३ प्रतिशत जमीन में धान उत्पादन किया जाता है ।च विगत १० वर्ष की अवधि में १ लाख २९ हजार हेक्टर खेती योग्य विभिन्न कारण से नाश हो गया है ।च वित्त वर्ष २०७३÷७४ में कुल ५२ लाख ३० हजार मेट्रिक टन धान उत्पादन हुआ है ।च नेपाली जनता सरदर ५० प्रतिशत कैलोरी धानजन्य उत्पादन से प्राप्त करते हैं ।च अगर धान उत्पादन में १० प्रतिशत वृद्धि हो जाता है तो कुल गार्हस्थ्य उत्पादन में १ प्रतिशत वृद्धि हो जाता है ।च राष्ट्रीय कृषि गणना के अनुसार विगत १० वर्ष में प्रमुख खाद्यान्न उत्पादन में से धान ६ प्रतिशत, गेहूँ ६ प्रतिशत, मकई १२ प्रतिशत, मड़वा १९ प्रतिशत और जौ ३५ प्रतिशत  ह«ास आया है ।च व्यापार तथा निकास प्रवद्र्धन केन्द्र के तथ्यांक अनुसार वित्त वर्ष २०७२÷७३ में ३९ अर्ब ३४ करोड़ १४ लाख का खाद्यान्न आयात किया गया । उस में से चावल २१ अर्ब ८६ करोड़ रुपये का है ।च वित्त वर्ष ०७३÷७४ में अभी तक का ही सर्वाधिक (५५ लाख मेट्रिक टन) धान उत्पादन हुआ है ।च वि.सं. २०३० की दशक में नेपाल में आवश्यकता से ज्यादा धान उत्पादन होता था । उस वक्त सरकारी स्तर से ही तराई के प्रायः सभी जिला में धान–चावल निर्यात कम्पनी स्थापना किया गया था, जो संस्थागत रूप में धान–चावल निर्यात करता था ।च वि.सं. २०४३÷०४४ के बाद नेपाल में धान÷चावल निर्यात नहीं, आयात होने लगा, जो अभी तक जारी है और दिन–प्रति–दिन आयात प्रतिशत बढ़ता जा रहा है ।

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