भारत समयावधि के भीतर नेपाल के परियाेजनाअाें काे करेगा पूरा
२५ अगस्त
नई दिल्ली
कुछ बाहरी हस्तक्षेप और कुछ आंतरिक हालात की वजह से भारत और नेपाल के द्विपक्षीय रिश्तों में दरकते भरोसे को बहाल करने की सफल कोशिश दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की तरफ से की गई। पीएम नरेंद्र मोदी और नेपाल के पीएम शेर बहादुर देउबा की द्विपक्षीय बातचीत में आपसी रिश्तों में तनाव का कारण बन रहे हर कांटे को निकालने पर सहमति बनी। चीन का असर परोक्ष तौर पर पूरी वार्ता में रहा। देउबा ने भारत को यह कहते हुए आश्वस्त किया कि अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत के हितों के खिलाफ वो नहीं होने देंगे।
सबसे अहम बात, जिन वजहों से नेपाल चीन की तरफ से आकर्षित हो रहा है उसकी भरपाई अपने स्तर पर करने की भारत ने कोशिश की है। भारत ने कहा है कि उसके सहयोग से चल रही हर परियोजना (भूकंप राहत, ढांचागत विकास आदि) को समयसीमा के भीतर पूरा किया जाएगा। भारत ने नेपाल में ढांचागत विकास से जुड़ी 10 नई परियोजनाओं को शुरू करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है। ये सारे प्रस्ताव इस महीने की शुरुआत में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने नेपाल सरकार से मांगे थे। इसमें वहां एक अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाने से लेकर तीन नई रेल लाइनें बिछाने की परियोजना भी शामिल है।
नेपाल ने हाल ही में चीन से एलपीजी लेनी शुरू की है। भारत ने कहा है कि मोतीहारी (बिहार) से अमलेकगंज (नेपाल) के बीच बिछाई जाने वाली एलपीजी पाइपलाइन को और दूर तक बिछाया जाएगा। पांच हजार मेगावाट की पंचेश्वर पनबिजली परियोजना को अब नहीं लटकाया जाएगा। इसकी विस्तृत रिपोर्ट अगले महीने तक तैयार करने का निर्देश दिया गया है। एक अन्य पनबिजली परियोजना (अरुण-थ्री) पर जल्द काम शुरू होगा। इसमें भारत नेपाल सीमा पर एक विशेष आर्थिक क्षेत्र के निर्माण का भी प्रस्ताव है।
देउबा के साथ पीएम मोदी के संयुक्त बयान से भी भारत की बदली कूटनीति की झलक मिलती है। मोदी ने कहा कि रक्षा व सुरक्षा में नेपाल के साथ भागीदारी बहुत महत्वपूर्ण है, दोनों देशों की रक्षा व सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय होना भी बहुत अहम है। विदेश सचिव एस जयशंकर ने भी कहा कि दोनों देशों को सुनिश्चित करना होगा कि कोई इसका गलत फायदा नहीं उठाए।
भारत की तरफ से संविधान संशोधन को लेकर बहुत ज्यादा आक्रामकता नहीं दिखाई गई। वैसे देउबा ने उम्मीद जताई कि जल्द नेपाल की पूरी आबादी संशोधन को स्वीकार करेगी। अभी इसकी प्रक्रिया स्थगित है, क्योंकि सरकार के पास संसद में दो तिहाई बहुमत नहीं है। इस विवाद की वजह से भी भारत ने वर्ष 2015 में नेपाल को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति रोक दी थी। इससे परियोजनाओं में मदद की रफ्तार भी काफी धीमी हो गई है। नेपाल में आए भीषण भूकंप में राहत के लिए भारत की तरफ से दी गई एक अरब डॉलर की परियोजना से जुड़े चार समझौता पत्रों पर दोनों देशों के बीच समझौता हुआ। दोनों के बीच सहयोग के आठ समझौते हुए हैं।
नेपाल के लिए खोला दिल
1. 5000 मेगावाट क्षमता की पंचमेश्वर परियोजना पर जल्द शुरू होगा काम।
2. एक तकनीकी संस्थान व एक श्वसन रोग चिकित्सा केंद्र।
3. मोतीहारी-अमलेकगंज एलपीजी पाइपलाइन का विस्तार होगा।
4. दो मौजूदा रेल नेटवर्क का विस्तार और तीन नए रेल नेटवर्क पर विचार।
5. दो सड़क परियोजनाओं को चार लेन में तब्दील करना।
6. एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण पर विचार।
7. महाकाली नदी पर एक साथ कई पुलों का निर्माण, मैत्री पुल का विस्तार।
8. धोधड़ा चांदनी में एक ड्राई पोर्ट का निर्माण।
9. भारत-नेपाल सीमा पर विशेष आर्थिक क्षेत्र के निर्माण पर होगा विचार
साभार दैनिक जागरण


