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संतान के दीर्घायु होने की कामना के साथ करती हैं माँएँं जीवित्पुत्रिका व्रत

 
संतान की बेहतरी के लिए किया जाना वाला जीवित्पुत्रिका व्रत 12 सितंबर से शुरू हो गया है. मंगलवार को संतान के दीर्घायु होने के लिए निर्जला उपवास और पूजा-अर्चना के साथ संपन्न होगा. 12 सितंबर को नहाय खाय के साथ इसकी शुरुआत होगी. दूसरे दिन बुधवार यानी 13 सितंबर को निर्जला उपवास किया जायेगा. वहीं पारण 14 सितंबर को 5 बज कर 35 मिनट पर होगा.
 पं वन बिहारी मिश्र ने बताया कि कुश से जीमूतवाहन की प्रतिमा बनाकर पूजा की जायेगी. पं श्रीपति त्रिपाठी ने बताया कि यह व्रत आश्विन माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आता है. ऐसी मान्यता है कि यह व्रत सौभाग्यवती स्त्रियों द्वारा अपनी संतान की आयु, आरोग्य तथा उनके कल्याण हेतु पूरे विधि-विधान से किया जाता है. यदि आप क्षेत्रीय संदर्भ से देखें तो इस व्रत के कई अन्य नाम आपको मिलेंगे, जैसे कि ‘जीतिया’ या ‘जीउतिया’ तथा ‘जिमूतवाहन व्रत’, आदि.
पंडितों का मत: संतान के लिए किया जाता है जीउतिया : पंडितों का मत है कि यह गलत मान्यता है कि पुत्र के लिए जीउतिया व्रत किया जाता है. यह व्रत संतान को दीर्घायु होने की कामना के साथ किया जाता है.
महावीर मंदिर के पं भवनाथ झा कहते हैं कि दरअसल पुत्र शब्द का प्रयोग संतान यानी पुत्र और पुत्री दोनों के लिए किया जाता है जैसे छात्र का प्रयोग हम छात्र और छात्राओं दोनों के लिए करते हैं. इस कारण कोई भ्रम नहीं रखना चाहिए. श्रीपति त्रिपाठी कहते हैं कि यह पर्व बेटा और बेटी दोनों के प्रति माता का समर्पण दर्शाता है. पं वन बिहारी मिश्र ने बताया कि यह व्रत जिनको बेटा और बेटी दोनों है उन्हें ही करना चाहिए तो हनुमान मंदिर बेली रोड के पं सुरेंद्र झा ने कहा कि इस व्रत का मर्म ही संतान की बेहतरी है.

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