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महिला कमजोर नहीं हैं : संगीता यादव (सन्दर्भ-अन्तर्राष्ट्रिय महिला दिवस)

 

– संगीता यादव
मेरा मानना हैं कि, ‘महानता’, ‘ममता’, ‘मातृत्व’, ‘मृदुलता’ और ‘मानवता’ झल्कनें बाली कोई एक शब्द में कहा जाए तो वो शब्द ‘महिला’ में समावेश है । महिलाओं के कारण ही सृष्टि में सुख–शांति, सहृदयता, सहयोग के संस्कार से संस्कृति का उत्थान और उत्कर्ष हो रहा है । इसलिए, प्राचीन युग में ही हमारे समाज में महिला का विशेष स्थान रहा हैं । हमारे पौराणिक ग्रंथों में महिाला को पूज्यनीय एवं देवीतुल्य माना गया है । हमारी धारणा रही है कि देव शक्तियाँ वहीं पर निवास करती हैं जहाँ पर समस्त महिला जाति को प्रतिष्ठा व सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है ।

इन प्राचीन ग्रंथों का उक्त कथन आज भी उतनी ही महत्ता रखता है जितनी कि इसकी महत्ता प्राचीन काल में थी । कोई भी परिवार, समाज अथवा राष्ट्र तब तक सच्चे अर्थों में प्रगति की ओर अग्रसर नहीं हो सकता जब तक वह महिला के प्रति भेदभाव, निरादर अथवा हीनभाव का त्याग नहीं करता है ।

आज का युग परिवर्तन का युग है । फलतः आज महिलायें पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है । विज्ञान व तकनीकी सहित लगभग सभी क्षेत्रों में उसने अपनी उपयोगिता सिद्ध की है । उसने समाज व राष्ट्र को यह सिद्ध कर दिखाया है कि शक्ति अथवा क्षमता की दृष्टि से वह पुरुषों से किसी भी भाँति कम नहीं है । निस्संदेह नारी की वर्तमान दशा में निरंतर सुधार राष्ट्र की प्रगति का मापदंड है । वह दिन दूर नहीं जब नर–नारी, सभी के सम्मिलित प्रयास फलीभूत होंगे ।

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लेकिन दुसरी तरफ देखा जाए तो जैसे जीवन के हर क्षेत्र में महिलाएँ अपनी श्रेष्ठता–विशिष्टता बढ़–चढ़कर सिद्ध प्रसिद्ध कर रही है । इसके बावजूद भी आज भीं महिला उत्पीड़न शून्य नही हुवा हैं । आज भी महिला हिंसा, महिला की पीड़ा संबन्ध में तरह–तरह की घटना, हत्या और आत्महत्याओं का दौर अभी भी कम नहीं हुवा हैं । महिलाओं की सहजता, सहनशीलता और संकोच के दबाव को कमजोरी समझा जा रहा है, जबकि महिलाएँ किसी भी तरह से कमजोर नहीं है । हमारें समाज के दों रुप देखनें को मिलेंगें एक महिलाओं के मिली आजादी मेें कुछ कर समाज को दिखाया हैं तो वही पुरूष प्रधान समाज में महिलाओं को पहले तरह आज भी कमजोर समझ कर उसे अपनी जीवन में कुछ नहीं करने दें रहें हैं ।

हमारें मुल्क में आज अन्र्तराष्ट्रिय महिला दिवस मनाया जा रहा हैं, लेकिन देश के मूख्य हिस्सें में सिमट कर रह गया हैं । आज भी गावों के महिलाओं मे महिला सशक्तिकरण की जरुरत हैं । देश के बडें शहरों मे जैसे–जैसे महिला जागृति बढ़ी मानवाधिकार की आवाज बुलंद हुई, हर क्षेत्र में महिलाओं को आंशिक प्राथमिकता दिए जाने के अनुसार आरक्षण दिए जाने लगी तों उस से शहर केन्द्रित महिलाओं नें ज्यादा लाभ लिया हैं, जब की आज भी देहात के महिला इस बात से अन्जान बनी बैठी हुई हैं । इस लिए भी गाँव और देहात के महिलाओं के लिए महिला सशक्तिकरण की जरुरत पडी हैं ।

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महिला सशक्तिकरण
महिला सशक्तिकरण का सब से पहला शब्द यह होता हैं कि महिला को शक्ति प्रदान करना । महिलाओं के शक्ति देने की बात इस लिए हो रही हैं क्यों की हम जिस समाज में सास ले रहें हैं, उस में महिलाओं को कमजोर सम्झा जाता हैं । पुरानें जमानें से पुरुषों के अधिन में महिलाओं के काम करना पड़ रहा हैं जो एक महिला प्रति अत्याचार हैं ।

महिला सशक्तिकरण में सब से जरुरी बात यह हैं कि लोगों की सोच बदल्नी पडेगी, और सभी जगह महिलाओं के बराबरी का मौका देना पडेगा । आज भी गावों में लोग बेटी से ज्यादा प्यार बेटें से करते हैं । लडकियों के कम उम्र में हि शादी के बन्धन में बाँध दिया जाता हैं । आज के जमानें में लडकियों के भी उतना हि शिक्षा पानें का अधिकार जितना कि लडकों का हैं । शिक्षित होने के बाद हि महिला अपनी पैरों पर खडें हो सकती हैं और जमानें के साथ कदम से कदम मिलाके चल सकती हैं ।

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महिला पुरुष समान हैं जो कि भगवान नें भी समान मानसिक ताकत व शक्ति के साथ पृथ्वी पर भेजी हैं । सशक्त नारी से हि सशक्त समाज के निर्माण होगी । ‘नारी आगे बढेगा तो हि देश आगे बढेगी’ ‘नारी हैं तो कल हैं’ जैसी नारें के साथ अन्तराष्ट्रिय नारी दिवस हर साल मनाया जाता हैं । लेकिन फिर भी नारी हमारें देश में पुरुषों के तुलना में आगें नहीं हैं ।
हमारें यहाँ के लोगों को माँ, पत्नी, बहन, बुवा, दिदी चाहिए लेकिन बेटी नहीं चाहतें हैं, क्यों ? जबतक इस सोच से हमारा समाज ग्रसित रहेगा तबतक समाज का विकास नहीं होगा ।

महिलाओं के सशक्त बनाने के लिए उन्हे समाजिक और पारिवारीक सीमाओं को छोड कर उन्हे अपनी, मन, विचार, अकिार आदी सभी पहलूओं में स्वतन्त्र बनाने की आवश्यता हैं । पुरुष और महिला को सम्मान व्यवहार की आवश्यता हैं । महिला सशक्तिकरण के कारण हि आज महिलाओं के अवस्था में धीरें–धीरें मजबुत हो रहीं हैं, और मुझे लगता हैं कि कुछ दिनों मे पुरुष और महिला में कोई भेदभाव नहीं रहेगा ।

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