Fri. Oct 23rd, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

अग्निपथ योजना के जरिए सेना में नेपाली गोरखों की भर्ती को लेकर संशय बरकरार

 

भारत की तरफ से नेपाल को बताया जा चुका है कि नई योजना में पहले की ही तरह गोरखों की भर्ती जारी रहेगी। लेकिन नेपाल ने इसे 1947 में हुए त्रिपक्षीय समझौते का उल्लंघन बताया है। इसके चलते नेपाल गोरखों की भर्ती की इजाजत नहीं दे रहा है।अग्निपथ योजना के जरिए सेना में नेपाली गोरखों की भर्ती को लेकर संशय बरकरार है।

आजादी के वक्त भारत-नेपाल और ब्रिटेन के बीच हुए समझौते के तहत दोनों देशों की सेनाओं में गोरखा नौजवानों की भर्ती पर सहमति जताई गई थी। तब से सात गोरखा रेजिमेंट में लगातार नेपाली गोरखा भर्ती होते रहे हैं। लेकिन अग्निपथ योजना में हुए बदलावों को लेकर नेपाल खुश नहीं है। उसने इसमें पेंशन और सेवाकाल से जुड़े मुद्दे उठाए हैं।

यह भी पढें   बाढ़ और भूस्खलन से बेनी–जोमसोम–कोरला सड़क को भारी नुकसान, पुनर्निर्माण के लिए 3 से 4 अरब रुपये की जरूरत

1947 में हुए समझौते का उल्लंघन बता रहा नेपाल
नेपाल  इसे 1947 में हुए समझौते का उल्लंघन बता रहा है। खबर है कि सरकार को समर्थन दे रही कम्युनिस्ट पार्टिंयां सरकार पर समझौते से बाहर निकलने के लिए दबाव डाल रही हैं। इस बीच, सेना प्रमुख मनोज पांडे ने भी नेपाल का दौरा किया है। हालांकि, उनका दौरा नेपाल सेना के निमंत्रण पर था, लेकिन समझा जाता है कि इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई होगी। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।

यह भी पढें   मंदिरों की घंटियों में छिपी है रोजगार, विकास और सांस्कृतिक विरासत को संवारने की शक्ति : बिमल सरार्फ

इस बारे में पूछने पर सेना की तरफ से कहा गया है कि अभी नेपाल में गोरखों की भर्ती को लेकर कोई नई तारीख तय नहीं की गई है। पहले दो तिथियां तय हुई थीं, लेकिन नेपाल से अनुमति न मिलने के कारण वह रद्द कर दी गई थीं। अग्निपथ योजना में जहां सिर्फ चार साल के लिए अग्निवीरों की भर्ती का प्रावधान है, वहीं इसमें रेजिमेंट के अनुसार भर्ती प्रक्रिया भी नहीं होगी।

यह भी पढें   सऊदी अरब के तेल क्षेत्र पर ड्रोन हमला: एक नेपाली सहित दो विदेशी श्रमिकों की मौत

सेना में 30 हजार नेपाली गोरखा जवान कार्यरत
भारतीय सेना में इस समय करीब 30 हजार नेपाली गोरखा जवान कार्यरत हैं। नेपाल में 1.25 लाख पूर्व सैनिक हैं, जिन्हें रक्षा मंत्रालय से नियमित रूप से पेंशन मिलती है। भारत में ही नहीं ब्रिटेन सेना में भी आज गोरखा जवानों को बेहतरीन सिपाही माना जाता है।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com