हिन्दू धर्म का ह्रास एक विडम्बना
आदिकाल से र्सवविदित है कि नेपाल संसार का एकमात्र हिन्दूराष्ट्र था । परिदृश्य बदला और चंद नेताओं की स्वार्थपरता ने इसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना दिया । आज स्थिति ये है कि विगत में जो एक देश हिन्दू राष्ट्र के रूप में जाना जाता था आज वहीं हिन्दू धर्म का ह्रास होता जा रहा है । गली कूचों में अन्य धर्मों के प्रचारक घूम रहे हैं और आसानी से धर्म परिवर्त्तन कराने में सफल हो रहे हैं । कहीं गरीबी के नाम पर, कहीं अशिक्षा के नाम पर, कई एक प्रलोभन देकर हिन्दूधर्मी कोर् इसाइ धर्म स्वीकार कराया जा रहा है । जनता की मनोदशा का फायदा लेते हैं ये । हर रोज इससे जुडÞे समाचार सामने आ रहे हैं । आर्श्चर्य की बात तो यह है कि इन सारी परिस्थितियों से सरकार अवगत है किन्तु उनकी ओर से कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है । ये सभी सिर्फसत्तामद में डूबे हुए हैं । तथ्यांक बताता है कि जिस देश में ८३ प्रतिशत जनता हिन्दू धर्म मानने वाली थी । आज वही संख्या घट कर ६५ प्रतिशत रह गई है । आदिदेव पशुपतिनाथ जिस देश के आराध्य देव हैं, जिस देश को इनसे ही पहचाना जाता है उसी देश में धर्म का नाश हो रहा है ।
नैतिकता हनन की पराकाष्ठा तो इस हद तक हो गई है कि हमारे राष्ट्रीय जानवर और हिन्दू धर्म में जिसे पूजा जाता है, अर्थात् गौमाता, उसे सरेआम काटा जा रहा है और दावतों में गोमांस शामिल किया जा रहा है । कुछ नेताओं ने तो शर्म की हदें पार कर दी हैं यह कह कर कि कुत्ते और हाथी को राष्ट्रीय जानवर बना दिया जाय । इतना ही नहीं ऋषि मुनियों के इस तपोभूमि पर अवस्थित कई मठ मंदिरों को तोडÞा जा रहा है ।
अपने धर्म और राष्ट्रीय स्वाभिमान की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्त्तव्य होता है । आज सभी हिन्दू धर्मावलम्बियों को आगे आने की आवश्यकता है । सरकार इस ओर कोई कदम नहीं उठा रही है किन्तु कई हिन्दू संगठन इस ओर कार्य कर रहे हैं । आज आवश्यकता है कि लोगों में अपने धर्म के प्रति जागरुकता लाई जाय और धर्म परिवर्तन तथा गौ हत्या जैसे जघन्य अपराध को रोका जाय । हिन्दू धर्म का एक गौरवशाली अतीत रहा है जिसे जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया जाना चाहिए । इसी दिशा की ओर तर्राई मधेश हिन्दू युवा संघ नेपाल अग्रसर है । संघीयलोकतांत्रिक गणतंत्र सहित का हिन्दू राष्ट्र इसकी परिकल्पना है । हिन्दू धर्म और संस्कृति के परिवर्द्धन और विकास के लिए यह संगठन तत्पर है । धर्म परिवर्त्तन और गौहत्या को रोकने और हिन्दू धर्म को स्थापित करना ही इसका उद्देश्य है । पडÞोसी देश भारत में भी कई संघ संस्था इस ओर कार्यरत हैं । धर्मान्तरण रोकने हेतु सभी हिन्दुओं को आगे आना होगा, एक संगठित संस्था के रूप में काम करना होगा । तभी यह राष्ट्र अपनी पहचान और गौरवशाली अतीत की रक्षा कर सकता है ।

