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रक्सौल में तीन दिवसीय धर्म संसद संपन्न, संतों ने हिंदू राष्ट्र एवं गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग उठाई

 

रक्सौल, पूर्वी चंपारण। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सीमावर्ती शहर रक्सौल में आयोजित तीन दिवसीय धर्म संसद का धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस आयोजन में भारत और नेपाल से पधारे अनेक संत-महात्माओं, विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधियों तथा हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। धर्म संसद में सनातन संस्कृति, गौ संरक्षण, धार्मिक एकता तथा सामाजिक समरसता से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।

धर्म संसद के संयोजक जगतगुरु वामाचार्य सेवक संजय नाथ जी महाराज ने कहा कि धर्म संसद का उद्देश्य समाज को सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और राष्ट्रसेवा के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल के संतों का यह संगम धार्मिक एकता, सामाजिक समरसता तथा मानव कल्याण का सशक्त संदेश देता है। उन्होंने सभी लोगों से अपने धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए संगठित होकर कार्य करने का आह्वान किया।

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काली सेना की राष्ट्रीय प्रमुख पार्वती तिवारी ने कहा कि धर्म संसद केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और भारतीय परंपराओं के संरक्षण का सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि धर्म संसद में पारित प्रस्ताव संत समाज के सामूहिक चिंतन और संकल्प का प्रतीक हैं। समाज में गौ संरक्षण, सांस्कृतिक जागरूकता तथा राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक संवाद निरंतर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

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धर्म संसद की प्रमुख मांगें

– भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए।
– गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा प्रदान किया जाए।
– सनातन संस्कृति एवं भारतीय परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन को प्राथमिकता दी जाए।
– समाज में धार्मिक जागरूकता बढ़ाने तथा संगठनात्मक एकता को सुदृढ़ किया जाए।

धर्म संसद में पारित प्रमुख प्रस्ताव

– जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने तथा अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण के लिए केंद्र सरकार के प्रति धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया।
– बिहार सरकार से गुरु नाथ अखाड़ा को आवश्यक सरकारी सुविधाएँ उपलब्ध कराने की मांग की गई।
– अखाड़े की परंपरा के अनुसार अनेक संतों को नई जिम्मेदारियाँ सौंपी गईं। नेपाल के संत रामसूरत नाथ को मंडलेश्वर, अल्टर बाबा को भारत का सभापति, बुद्धनाथ को महामंत्री, नेपाल के कलैया निवासी नागा बाबा को सेनापति प्रमुख तथा गुरु नाथ भोलानाथ को अखाड़े का महंत नियुक्त किया गया।

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भारत-नेपाल के संतों का साझा संकल्प

धर्म संसद का संचालन जगतगुरु वामाचार्य सेवक संजय नाथ जी महाराज ने किया। कार्यक्रम में भारत और नेपाल से पधारे संतों ने सनातन धर्म के संरक्षण, सामाजिक सद्भाव, आपसी भाईचारे तथा राष्ट्रहित में मिलकर कार्य करने का सामूहिक संकल्प लिया। तीन दिनों तक चले इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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